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वायुसेना के लिए खतरा बन सकते हैं तीन हजार घर
बरेली
Updated Sat, 16 Jan 2016 01:59 AM IST
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बरेली। पठानकोट हमले ने एयरफोर्स की चिंता बढ़ा दी है। त्रिशूल एयरबेस से लगे तीन हजार भवन वायु सेना के लिहाज से संवेदशील क्षेत्र में हैं। इन मकानों या झुग्गी झोपड़ियों से एयरफोर्स स्टेशन की आसानी से रेकी की जा सकती है। यहां पीरबहोड़ा में जुआं, सट्टा, जानवरों का अवैध कटान, गैर लाइसेंस मीट की दुकानें चलाने के साथ ही अवैध हथियारों के निर्माण तक की शिकायतें आती रहती हैं। पुलिस भी यहां हाथ डालने से कतराती है। 2008 से एयरफोर्स के अधिकारियों की ओर से अपनी दीवार से लगे दो सौ से ज्यादा भवनों और झुग्गी झोपड़ियो को हटाने के लिए प्रशासन और नगर निगम को पत्र लिखा जा रहा है। मगर, प्रशासन ने अब तक सुध नहीं ली।
पीलीभीत बाईपास रोड पर फन सिटी से चंद कदम आगे बायीं ओर मुड़ने पर पीरबहोड़ा जाने वाली रोड आ जाती है। एयरफोर्स गेट तक रोड के दोनों ओर सरकारी जमीन पर दुकानदारों का जबरदस्त अतिक्रमण है। एयरफोर्स गेट के बाहर चार से पांच पक्के निर्माण हैं। रोड के दाहिनी ओर पीरबहोड़ा कालोनी में घुसने पर तीन या चार संकरी गलियों का रास्ता एयरफोर्स की दीवार के किनारे तक जाता है। इन गलियों से 24 घंटे आवागमन बना रहता है। एयरफोर्स की दीवार से लगी गली और नाले के बीच पीरबहोड़ा बाग तक तीन हजार से ज्यादा मकान और झुग्गी झोपड़ियां हैं। इनमें रहकर आसानी से त्रिशूल एयरबेस की रेकी की जा सकती है।
नगर निगम के नाले पर दो सौ से ज्यादा लोगों ने पक्के निर्माण अनाधिकृत तरीके से करा लिए हैं। नाला जगह-जगह चोक है। एयरफोर्स की दीवार से लगा आठ से 10 फुट गहरा नाले का एक हिस्सा पीरबहोड़ा मोड़ और दूसरा पीलीभीत बाईपास पर निकलता है। कोई भी संदिग्ध व्यक्ति इस नाले या कालोनी की संकरी गलियों से होकर पीलीभीत बाईपास रोड परसुरक्षित निकल सकता है। वायु सेना के प्रशासनिक अधिकारी ने 11 मई 2015 को थाना इज्जतनगर में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर भी दी लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद 23 जून 2015 को एयरफोर्स ने मेयर डा. आईएस तोमर, जिलाधिकारी गौरव दयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह और नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव को भी पत्र लिखे लेकिन न तो प्रशासन ने कोई कार्रवाई की, न ही नगर निगम ने।
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अतिक्रमणकारियों की ये नाम नगर निगम के पास है
सुकान, लतीफ खान, फहीउद्दीन, बशीर अहमद, नन्हें खान, हन्नू, रहीस अहमद, मेर अली, कालू, याकूब, मुख्तार, सईद खान, नूर अली, उस्मान खान, चांद खान, नूर अली, मो. सिद्दीक, नवीजुद्दी, नईम, हरीश, अजब खान, नट्टू, इस्लाम नवी, गुड्डू हसीना, नत्थू, अजीम बेग, सफरुद्दीन, अंबा प्रसाद, अदरूप नवी, रहीसुद्दीन, जुल्फकार, जकी मेंबर मल्लू आदि।
पुलिस के संरक्षण में चल रहे अवैध धंधे
पीरबहोड़ा की आबादी करीब 16 हजार है। तिहाड़ जेल में बंद बाबू खां का मकान भी इसी कालोनी में है। पुलिस के संरक्षण में कालोनी में 20 से 25 स्थानों पर सट्टा लगता है। नाले के किनारे दुकानों में प्रतिदिन होने वाले जुए में लाखों के वारे न्यारे होते हैं। गोकशी से लेकर अनाधिकृत रूप से कटने वाले सैकड़ों जानवरों के सिर तालाब में निकल चुके हैं। दर्जनों मीट की दुकानें बिना लाइसेंस चल रही हैं। खुले मांस की बिक्री होती है जिसे खाकर कालोनी के लोग आए दिन बीमार पड़ते हैं। तीन से चार मंजिला मकानों के ऊपर से बिजली की लाइनें निकली हैं। बैरियर टू पर चौकी इंचार्ज भारत सिंह की तैनाती को तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं। सब धंधे उनकी जानकारी में है। फिर भी कभी छापामारी नहीं होती।
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पीलीभीत बाईपास रोड पर फन सिटी से चंद कदम आगे बायीं ओर मुड़ने पर पीरबहोड़ा जाने वाली रोड आ जाती है। एयरफोर्स गेट तक रोड के दोनों ओर सरकारी जमीन पर दुकानदारों का जबरदस्त अतिक्रमण है। एयरफोर्स गेट के बाहर चार से पांच पक्के निर्माण हैं। रोड के दाहिनी ओर पीरबहोड़ा कालोनी में घुसने पर तीन या चार संकरी गलियों का रास्ता एयरफोर्स की दीवार के किनारे तक जाता है। इन गलियों से 24 घंटे आवागमन बना रहता है। एयरफोर्स की दीवार से लगी गली और नाले के बीच पीरबहोड़ा बाग तक तीन हजार से ज्यादा मकान और झुग्गी झोपड़ियां हैं। इनमें रहकर आसानी से त्रिशूल एयरबेस की रेकी की जा सकती है।
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नगर निगम के नाले पर दो सौ से ज्यादा लोगों ने पक्के निर्माण अनाधिकृत तरीके से करा लिए हैं। नाला जगह-जगह चोक है। एयरफोर्स की दीवार से लगा आठ से 10 फुट गहरा नाले का एक हिस्सा पीरबहोड़ा मोड़ और दूसरा पीलीभीत बाईपास पर निकलता है। कोई भी संदिग्ध व्यक्ति इस नाले या कालोनी की संकरी गलियों से होकर पीलीभीत बाईपास रोड परसुरक्षित निकल सकता है। वायु सेना के प्रशासनिक अधिकारी ने 11 मई 2015 को थाना इज्जतनगर में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर भी दी लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद 23 जून 2015 को एयरफोर्स ने मेयर डा. आईएस तोमर, जिलाधिकारी गौरव दयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह और नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव को भी पत्र लिखे लेकिन न तो प्रशासन ने कोई कार्रवाई की, न ही नगर निगम ने।
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अतिक्रमणकारियों की ये नाम नगर निगम के पास है
सुकान, लतीफ खान, फहीउद्दीन, बशीर अहमद, नन्हें खान, हन्नू, रहीस अहमद, मेर अली, कालू, याकूब, मुख्तार, सईद खान, नूर अली, उस्मान खान, चांद खान, नूर अली, मो. सिद्दीक, नवीजुद्दी, नईम, हरीश, अजब खान, नट्टू, इस्लाम नवी, गुड्डू हसीना, नत्थू, अजीम बेग, सफरुद्दीन, अंबा प्रसाद, अदरूप नवी, रहीसुद्दीन, जुल्फकार, जकी मेंबर मल्लू आदि।
पुलिस के संरक्षण में चल रहे अवैध धंधे
पीरबहोड़ा की आबादी करीब 16 हजार है। तिहाड़ जेल में बंद बाबू खां का मकान भी इसी कालोनी में है। पुलिस के संरक्षण में कालोनी में 20 से 25 स्थानों पर सट्टा लगता है। नाले के किनारे दुकानों में प्रतिदिन होने वाले जुए में लाखों के वारे न्यारे होते हैं। गोकशी से लेकर अनाधिकृत रूप से कटने वाले सैकड़ों जानवरों के सिर तालाब में निकल चुके हैं। दर्जनों मीट की दुकानें बिना लाइसेंस चल रही हैं। खुले मांस की बिक्री होती है जिसे खाकर कालोनी के लोग आए दिन बीमार पड़ते हैं। तीन से चार मंजिला मकानों के ऊपर से बिजली की लाइनें निकली हैं। बैरियर टू पर चौकी इंचार्ज भारत सिंह की तैनाती को तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं। सब धंधे उनकी जानकारी में है। फिर भी कभी छापामारी नहीं होती।