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‘अबकी सर्जिकल स्ट्राइक में उन सबको भी निपटा दो’
बरेली।
Updated Fri, 03 Mar 2017 01:09 AM IST
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"This time, all of them dealt two surgical strikes'
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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अमर उजाला और क्रिएथिक्स पब्लिक स्कूल के संयुक्त कवि सम्मेलन में देर रात तक कविता की रसधार बही। शहर भर से एकत्र श्रोताओं ने नामचीन कवियों की हास्य, वीर, श्रृंगार रस की कविताएं सुनीं और तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया। कवियों ने भी देर रात तक देश के समसामयिक मुद्दों से जुड़ी रचनाएं सुनाकर स्श्रोताओं को बांधे रखा।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ मेयर डा. आई एस तोमर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। छात्राओं ने अतिथियों के सम्मान में स्वागत गीत गाया। मेरठ से आए वीर रस से प्रख्यात कवि सौरभ सुमन के संचालन में सरस्वती वंदना के बाद कवि अपने मूड में आ गए। हास्य कवि लटूरी लट्ठ ने वहां मौजूद लोगों को पहले गुदगुदाया। फिर अपनी गंभीर रचना से सोचने समझने पर मजबूर करते हुए सुनाया-
‘ सफलता उनको मिलती है जो मन में ठान लेते हैं, बड़ों की बात सुनते हैं, उन्हें फिर मान लेते हैं, समय सबको ही मिलता है, प्रकृति का नियम है निश्छल, बुलंदी वह ही छूते हैं, जो वक्त पहचान लेते हैं’।
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डा. मंजू दीक्षित ने नारी उत्पीड़न पर प्रहार करते हुए कहा-
‘समझो न इसे अबला है, लाचार है औरत, अपने पे उतर आए तो तलवार है औरत।’
अनामिका जैन अंबर ने श्रृंगार रस की गजलें तरन्नुम ने पढ़कर वहां मौजूद लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनकी इस कविता-
‘जहां पर सच दया सम्मान और ईमान रहता है, वहीं पर अल्लाह और वो भगवान रहता है’
सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। लखनऊ की कविता तिवारी ने युवा पीढ़ी को संस्कार की सीख देते हुए सुनाया-
मेरे ईश्वर, मेरे दाता, ये कविता मांगती तुझसे, युवा पीढ़ी संभल करके विवेकानंद हो जाए’।
मेरठ से आए वीर रस के कवि सौरभ जैन सुमन ने सर्जिकल स्ट्राइक पर कविता पढ़ी-
‘बंसी को तज चक्रधारी श्याम हो गया, शत्रु का उसके घर में इंतजाम हो गया, लंकाएं फूंक डाली सरहदों को पार कर, ये देश आज फिर से श्री राम हो गया।’
अब्दुल गफ्फार ने कश्मीर हिंसा का समर्थन करने वाले आतंकियों को ललकारते हुए कहा-
राष्ट्रवाद का सबक भूलकर जो दुश्मन की जय बोले, जंग सामने खड़ी देखकर भीतर की सांकल खोले, आतंकी हाफिज सईद के सम्मुख नर्तन करते जो, कश्मीरी पत्थरबाजों का खुला समर्थन करते जो, मोदी अब हिम्मत करके नाग विषैला लिपटा दो, अबके सर्जिकल स्ट्राइक करके उन सबको भी निपटा दो।’
कवि सम्मेलन में संजय अग्रवाल, शिव कुमार अग्रवाल, बाला अग्रवाल, रति अग्रवाल, अंकित अग्रवाल, अनुभव पाराशरी, अशोक अग्रवाल, आरके शर्मा, अमजद सलीम, डा. केशव अग्रवाल, राम गोपाल मिश्रा डा. नवल अग्रवाल, अंकित अग्रवाल आदि शामिल थे।
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कवि सम्मेलन का शुभारंभ मेयर डा. आई एस तोमर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। छात्राओं ने अतिथियों के सम्मान में स्वागत गीत गाया। मेरठ से आए वीर रस से प्रख्यात कवि सौरभ सुमन के संचालन में सरस्वती वंदना के बाद कवि अपने मूड में आ गए। हास्य कवि लटूरी लट्ठ ने वहां मौजूद लोगों को पहले गुदगुदाया। फिर अपनी गंभीर रचना से सोचने समझने पर मजबूर करते हुए सुनाया-
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‘ सफलता उनको मिलती है जो मन में ठान लेते हैं, बड़ों की बात सुनते हैं, उन्हें फिर मान लेते हैं, समय सबको ही मिलता है, प्रकृति का नियम है निश्छल, बुलंदी वह ही छूते हैं, जो वक्त पहचान लेते हैं’।
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डा. मंजू दीक्षित ने नारी उत्पीड़न पर प्रहार करते हुए कहा-
‘समझो न इसे अबला है, लाचार है औरत, अपने पे उतर आए तो तलवार है औरत।’
अनामिका जैन अंबर ने श्रृंगार रस की गजलें तरन्नुम ने पढ़कर वहां मौजूद लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनकी इस कविता-
‘जहां पर सच दया सम्मान और ईमान रहता है, वहीं पर अल्लाह और वो भगवान रहता है’
सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। लखनऊ की कविता तिवारी ने युवा पीढ़ी को संस्कार की सीख देते हुए सुनाया-
मेरे ईश्वर, मेरे दाता, ये कविता मांगती तुझसे, युवा पीढ़ी संभल करके विवेकानंद हो जाए’।
मेरठ से आए वीर रस के कवि सौरभ जैन सुमन ने सर्जिकल स्ट्राइक पर कविता पढ़ी-
‘बंसी को तज चक्रधारी श्याम हो गया, शत्रु का उसके घर में इंतजाम हो गया, लंकाएं फूंक डाली सरहदों को पार कर, ये देश आज फिर से श्री राम हो गया।’
अब्दुल गफ्फार ने कश्मीर हिंसा का समर्थन करने वाले आतंकियों को ललकारते हुए कहा-
राष्ट्रवाद का सबक भूलकर जो दुश्मन की जय बोले, जंग सामने खड़ी देखकर भीतर की सांकल खोले, आतंकी हाफिज सईद के सम्मुख नर्तन करते जो, कश्मीरी पत्थरबाजों का खुला समर्थन करते जो, मोदी अब हिम्मत करके नाग विषैला लिपटा दो, अबके सर्जिकल स्ट्राइक करके उन सबको भी निपटा दो।’
कवि सम्मेलन में संजय अग्रवाल, शिव कुमार अग्रवाल, बाला अग्रवाल, रति अग्रवाल, अंकित अग्रवाल, अनुभव पाराशरी, अशोक अग्रवाल, आरके शर्मा, अमजद सलीम, डा. केशव अग्रवाल, राम गोपाल मिश्रा डा. नवल अग्रवाल, अंकित अग्रवाल आदि शामिल थे।