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धर्मेंद्र कश्यप के आदर्श गांव में कुछ भी आदर्श नहीं  

Sat, 27 May 2017 01:08 AM IST
सुधाकर शुक्ला
सुधाकर शुक्ला Updated Sat, 27 May 2017 01:08 AM IST
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There is nothing ideal in Dharmendra Kashyap's Adarsh village
धर्मेंद्र कश्यप के आदर्श गांव में कुछ भी आदर्श नहीं   - फोटो : धर्मेंद्र कश्यप के आदर्श गांव में कुछ भी आदर्श नहीं  
ग्राउंड रिपोर्ट ः आदर्श गांव-रोंधी मिलक
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सांसद आदर्श योजना में रोंधी गांव का चयन सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने किया था। इसके दो मजरे हैं मिलक और फरीदापुर। गांव वालों का तो यही कहना है कि तीन साल में सांसद जी दो या तीन बार ही गांव आए हैं। जबकि सांसद का दावा है कि वह इस गांव में आते-जाते रहते हैं। गांव की हालत तो यही कहती है कि गांव पर  ध्यान ही नहीं दिया गया। आंवला के सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने अप्रैल 2014-15 में इस गांव को गोद लिया था। उस समय गांव के जो हालात थे, तीन साल बाद भी उनमें खास तब्दीली नहीं आई है। 
बदायूं रोड से नीचे उतरते ही करीब दो किलोमीटर दूर चलने पर धूल उड़ती दिखती है। मुख्य मार्ग के दोनों ओर बिल्डर कालोनी काटने में लगे हैं। गांव के बाहर एक तालाब है। इस पर घास उगी हुई है।  तालाब के पुराने जंक खा चुके गेट पर प्रधान मंजूर अहमद और सचिव सीपी सिंह का नाम लिखा है। पानी की टंकी नहीं बनी है बिजली के पोलों पर तार भी नहीं हैं। 
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गांव के बाहर एक पक्का मकान बना है। उनके घर के ठीक सामने तालाब है। आवाज देने पर बाहर निकलकर आने वाले यूसुफ बताते हैं कि तालाब की बरसों से सफाई नहीं हुई। मनरेगा का पैसा पता नहीं कहां लग गया। गांव में सबने मिलकर एक बार सफाई की थी। तबसे ऐसे ही पड़ा है। तालाब में घास होने की वजह से पानी नजर नहीं आ रहा। उनका मुख्य धंधा रोजाना बुग्गी में रेत निकालकर शहर आकर बेचना (खनन) है। मजरा मिलक के तालाब का भी यही हाल है। कुछ गलियां सीसी हैं लेकिन अधिकांश पुराना खड़ंजा होने की वजह से बदहाल हो चुकी हैं। नालियां पक्की लेकिन टूटी हुई हैं। 
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खुले में शौच मुक्त नहीं है गांव
गांव के शंकरलाल बताते हैं कि गांव में अधिकांश घरों में  शौचालय नहीं हैं। 21 शौचालय बने थे। कुछ घरों में लोगों ने निजी शौचालय बनवा रखे हैं। 80 फीसदी आबादी खेत, तालाब या अन्य खुले स्थानों पर शौच को जाती है। शौचालय बनाने के लिए ब्लाक की टीम सर्वे को आई। उसके बाद किसी ने पलट कर नहीं देखा। फिलहाल, सांसद के आदर्श गांव में स्वच्छ भारत मिशन पूरी तरह फेल है। पूर्व प्रधानपति राधेश्याम भी पुष्टि करते हैं कि गांव के अधिकांश घरों की महिलाएं और पुरुष  खुले में शौच करने को मजबूर हैं। उनकी आर्थिक स्थिति शौचालय बनवाने की नहीं है। पंचायत राज विभाग की टीम अब तक यहां नहीं आई। 
 झोपड़ी वालों को नहीं मिले इंदिरा आवास
दयावती के पति डोरीलाल की चार साल पहले मौत हो गई। न तो इनके पास खेती है और न आमदनी के अन्य साधन। इनके दो बेटे 15 साल का सूरज और 12 साल का विशाल खेतों में मजदूरी करते हैं। उसी से परिवार का गुजारा होता है। रहने के लिए कच्ची मिट्टी की दीवारों के ऊपर झोपड़ी बना रखी है। दयावती को विधवा पेंशन भी नहीं मिल पा रही। इनका कहना है कि प्रधान और ब्लाक के कई बार चक्कर लगाए। कोई नतीजा नहीं निकला। यही हाल पड़ोसी गणेश का है। तीन सौ रुपये रोज पर मजदूरी करने वाले गणेश भूमिहीन है। फिर भी इनको न तो इंदिरा आवास मिला और न ही पीएम आवास योजना में कोई फायदा हुआ। इनका कहना है कि प्रधान और बीडीओ से इंदिरा आवास के लिए कहा। सबने इतनी बार चक्कर लगवाए तो झोपड़ी में ही गुजारा करना ठीक समझ में आया।  
एटा के ठेकेदार बना रहे टंकी
मिलक में करीब ढाई करोड़ की लागत से पानी की टंकी बन रही है। दो महीने पहले काम शुरू हुआ है। ठेकेदार के कर्मचारी पंचायत भवन में ही रहते हैं। इसलिए यहां हर माह होने वाली ग्रामसभा और ग्राम पंचायत की मीटिंग नहीं हो पाती। पाइप लाइन डालने के लिए पाइप खरीदकर आए हैं। गांव वालों ने बताया कि जेई काम की नियमित मानीटरिंग नहीं कर रहे। पानी की टंकी सपा सरकार के समय ही स्वीकृत हुई थी। 
 रोंधी मिलक में तीन साल के विकास आंकड़े (लगभग में)
 गांव की आबादी ---  3605
कश्यप-1500, साहू-400, जाटव- 400, अन्य- 1305
मुख्य कारोबार ----- खनन, मजदूरी और पल्लेदारी
विद्युतीकरण --- छह ट्रांसफार्मर और खंभे लगे लेकिन लाइन नहीं खिंची
विद्यालय --- दो प्राथमिक और एक जूनियर हाईस्कूल 
बैंक सुविधा--- नहीं 
पेंशनार्थी-- 130 (35 वृद्धावस्था, 10 विधवा, नौ विकलांग और 76 समाजवादी पेंशन)
आवास - 24 इंदिरा आवास, सात पीएम आवास
शौचालय- 21 निर्मित, 10 प्रस्तावित
मनरेगा जॉबकार्डधारक  --412
रोजगार मिला - --- 200 से कम
100 दिन का रोजगार --- किसी को नहीं 
पौधरोपण़ ------ शून्य 
तालाब की सफाई----शून्य 
सांसद जी ने तीन साल पहले गांव गोद लिया था। तबसे वह गांव एक या दो बार ही आए लेकिन काम कोई नहीं कराया।  शौचालय बनवाने में भी जनता की मदद नहीं की। अगर वह ब्लाक और विकास भवन के अधिकारियों पर दबाव बनाते तो गांव चमक जाता। गांव जैसा तीन साल पहले था, वही अब भी है। कहीं कोई परिवर्तन नहीं आया।  मंजूर अहमद, प्रधान, रोंधी मिलक 

हाल ही में गांव में बीमारी की बात फैली तो हम डॉक्टरों की टीम लेकर गांव गए। तब हमने घर-घर जाकर पूछा कि कौन बीमार है। इसलिए गांव न जाने की बात गलत है। सीसी रोड इसलिए नहीं बना क्योंकि पानी की टंकी बन रही है। पाइप लाइन बिछने वाली है। अगर सीसी रोड बनवा देंगे तो पाइप लाइन डालते समय रोड उखड़वानी पड़ेगी। पैसा बर्बाद होगा। इसलिए सीसी रोड बाद में बनवाएंगे। शौचालय बनवाने और सोलर लाइट समेत अन्य प्रस्ताव दिए जा रहे हैं। बहुत जल्दी ही गांव की तस्वीर बदलेगी। अब तक सरकार सपा की थी, इसलिए काम नहीं हो रहे थे। अब भाजपा की सरकार बनी है। इसमें काम की रफ्तार तेज होगी।  धर्मेंद्र कश्यप, सांसद 
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