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Bareilly News: जिले में नहीं है ऑल वेदर स्विमिंग पूल, खिलाड़ी होते है परेशान
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सर्दियों में महीनों का ब्रेक, नए सत्र में फिर से शुरुआत करने पर मजबूर
बरेली। सर्दियों का मौसम आते ही जहां अधिकतर खेलों की गतिविधियां किसी न किसी रूप में जारी रहती हैं, वहीं तैराकी ऐसा खेल है जो ऑलवेदर स्विमिंग पूल की सुविधा न होने पर पूरी तरह ठहर जाता है। तरणताल ठंड के मौसम में बंद हो जाते हैं, जिसके चलते तैराकों को चार से छह महीने तक अभ्यास से दूर रहना पड़ता है। यह लंबा ब्रेक खिलाड़ियों के प्रदर्शन, फिटनेस और तकनीक पर प्रभाव डालता है।
खिलाड़ियों का कहना है कि नवंबर से मार्च तक पूल बंद रहने के कारण उन्हें मजबूरी में अभ्यास रोकना पड़ता है। अप्रैल में जब दोबारा पूल खुलता है, तब तक तकनीक में गिरावट आ चुकी होती है। खिलाड़ी मानते हैं कि इस अंतराल में वे जिम, रनिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से खुद को फिट रखने की कोशिश जरूर करते हैं, लेकिन पानी में उतरकर होने वाली वास्तविक प्रैक्टिस की भरपाई संभव नहीं हो पाती। जिला तैराकी संघ के सचिव सुनील मित्तल ने बताया कि जिले में 40-50 पंजीकृत है। ऑलवेदर स्विमिंग पूल बनवाने के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
- अभ्यास में आ जाती है रुकावट
खिलाड़ी कार्तिकेय मिश्रा का कहना है कि ऑलवेदर स्विमिंग पूल न होने से अभ्यास में बार-बार रुकावट आती है। नए सत्र में जब वे पूल में उतरते हैं तो पहले की लय पूरी तरह टूट चुकी होती है। उन्हें फिर से तकनीक पर शुरू से काम करना पड़ता है और शरीर को पानी के अनुकूल बनाने में काफी समय लग जाता है।
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पदक से चूक जाते हैं खिलाड़ी
अभिजीत गंगवार बताते हैं कि सर्दियों के चार से पांच महीनों में वे जिम में स्ट्रेंथ कंडीशनिंग, कार्डियो और रनिंग कर अपनी फिटनेस बनाए रखने का प्रयास करते हैं। इसके बावजूद जब नया सत्र शुरू होता है, तो पहले जैसी क्षमता वापस लाने में एक से दो महीने का समय लग जाता है। इसी दौरान कई अहम प्रतियोगिताएं होती हैं, जिनमें खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाते और पदक से चूक जाते हैं।
- दोबारा से करनी पड़ती है शुरुआत
रोजल खान का कहना है कि ऑलवेदर स्विमिंग पूल की अनुपलब्धता के कारण अभ्यास का लंबा अंतराल बन जाता है। इस दौरान जो भी गति, तकनीक और लय हासिल की होती है, वह लगभग समाप्त हो जाती है। नया सत्र शुरू होता है, तो पानी में उतरते ही स्ट्रेंथ में तेजी से गिरावट महसूस होती है। दोबारा शुरुआत करना मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। संवाद
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बरेली। सर्दियों का मौसम आते ही जहां अधिकतर खेलों की गतिविधियां किसी न किसी रूप में जारी रहती हैं, वहीं तैराकी ऐसा खेल है जो ऑलवेदर स्विमिंग पूल की सुविधा न होने पर पूरी तरह ठहर जाता है। तरणताल ठंड के मौसम में बंद हो जाते हैं, जिसके चलते तैराकों को चार से छह महीने तक अभ्यास से दूर रहना पड़ता है। यह लंबा ब्रेक खिलाड़ियों के प्रदर्शन, फिटनेस और तकनीक पर प्रभाव डालता है।
खिलाड़ियों का कहना है कि नवंबर से मार्च तक पूल बंद रहने के कारण उन्हें मजबूरी में अभ्यास रोकना पड़ता है। अप्रैल में जब दोबारा पूल खुलता है, तब तक तकनीक में गिरावट आ चुकी होती है। खिलाड़ी मानते हैं कि इस अंतराल में वे जिम, रनिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से खुद को फिट रखने की कोशिश जरूर करते हैं, लेकिन पानी में उतरकर होने वाली वास्तविक प्रैक्टिस की भरपाई संभव नहीं हो पाती। जिला तैराकी संघ के सचिव सुनील मित्तल ने बताया कि जिले में 40-50 पंजीकृत है। ऑलवेदर स्विमिंग पूल बनवाने के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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- अभ्यास में आ जाती है रुकावट
खिलाड़ी कार्तिकेय मिश्रा का कहना है कि ऑलवेदर स्विमिंग पूल न होने से अभ्यास में बार-बार रुकावट आती है। नए सत्र में जब वे पूल में उतरते हैं तो पहले की लय पूरी तरह टूट चुकी होती है। उन्हें फिर से तकनीक पर शुरू से काम करना पड़ता है और शरीर को पानी के अनुकूल बनाने में काफी समय लग जाता है।
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पदक से चूक जाते हैं खिलाड़ी
अभिजीत गंगवार बताते हैं कि सर्दियों के चार से पांच महीनों में वे जिम में स्ट्रेंथ कंडीशनिंग, कार्डियो और रनिंग कर अपनी फिटनेस बनाए रखने का प्रयास करते हैं। इसके बावजूद जब नया सत्र शुरू होता है, तो पहले जैसी क्षमता वापस लाने में एक से दो महीने का समय लग जाता है। इसी दौरान कई अहम प्रतियोगिताएं होती हैं, जिनमें खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाते और पदक से चूक जाते हैं।
- दोबारा से करनी पड़ती है शुरुआत
रोजल खान का कहना है कि ऑलवेदर स्विमिंग पूल की अनुपलब्धता के कारण अभ्यास का लंबा अंतराल बन जाता है। इस दौरान जो भी गति, तकनीक और लय हासिल की होती है, वह लगभग समाप्त हो जाती है। नया सत्र शुरू होता है, तो पानी में उतरते ही स्ट्रेंथ में तेजी से गिरावट महसूस होती है। दोबारा शुरुआत करना मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। संवाद