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Bareilly News: बस्ते का बढ़ा वजन, हल्की हो रही अभिभावकों की जेब
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बरेली। नए शैक्षिक सत्र में जहां बच्चों का बस्ता भारी हो रहा है, वहीं महंगाई से अभिभावकों की जेब हल्की हो रही है। निजी स्कूलों ने अभिभावकों को किताबों-कॉपियों की लिस्ट थमा दी है। छोटी कक्षाओं केे विद्यार्थियों के लिए भी 12 से 15 किताबें अनिवार्य कर दी गईं हैं। कुछ स्कूल किताबों व यूनिफाॅर्म में मामूली बदलाव कर अभिभावकों को नई खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
दरअसल, पहले स्कूलों की ओर से अभिभावकों को रिजल्ट के साथ बुक स्टाल का पर्चा थमा दिया जाता था। इस बार तरीका थोड़ा बदल गया है। स्कूल संचालकों ने कोर्स में मामूली बदलाव कर दिया है। ये किताबें केवल स्कूल की ओर से निर्धारित दुकान पर ही मिल रहीं हैं। वहां जाने पर अभिभावकों को किताबों के साथ ही कॉपियां और पूरी स्टेशनरी खरीदनी पड़ती है। सभी पब्लिक और कॉन्वेंट स्कूलों ने निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगाकर अभिभावकों का बजट बिगाड़ दिया है। केंद्रीय विद्यालय में कक्षा नौ का कोर्स 1200 से 1500 रुपये में मिल रहा है, जबकि, निजी स्कूलों में उसी कक्षा की किताबें 5,000 से 7,000 रुपये की मिल रहीं हैं। केवी की 12वीं कक्षा का सेट 2200 से 2300 रुपये में है। निजी स्कूलों में इसी कक्षा का सेट स्टेशनरी के साथ आठ से नौ हजार रुपये में मिल रहा है।
कई स्कूलों ने परिसर में ही खोल रखी है दुकान
कई स्कूलों ने मानकों के खिलाफ परिसर में ही किताबों की दुकान खोल रखी है। वहां की किताब-कॉपियां स्कूल के अलावा कहीं बाहर नहीं मिल रहीं हैं। अभिभावकों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए मनमानी कीमत वसूली जा रही है। बड़ा बाजार स्थित बुक स्टालों पर मौजूद अभिभावकों ने बताया कि जो कॉपियां बाहर 40 से 50 रुपये में मिल जाती हैं, स्कूल वाले उसी पर अपना नाम और लोगो छापकर 70 से 120 रुपये में बेच रहे हैं। अधिकारियों को स्कूलों व दुकानदारों की मिलीभगत की पूरी जानकारी है, पर इसके रोकथाम की कोई कवायद नहीं की जा रही है। संवाद
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बच्चों को पढ़ाना हो जाएगा मुश्किल
स्कूलों की ओर से हर साल फीस व कॉपी-किताबों का मूल्य बढ़ा दिया जाता है। इससे मध्यम वर्ग के अभिभावकों को बच्चों को पढ़ाने में कॉफी मुश्किलें हो रहीं है। आने वाले समय में बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो जाएंगा। - प्रियंका राजपूत, अभिभावक
किताबों और यूनिफॉर्म की वजह से हर साल बजट बिगड़ जाता है। दुकानदार पहले से ही कक्षा के हिसाब से सेट तैयार किए हुए हैं। यहां मनमानी की जा रही है। स्कूलों के संरक्षण में ये दुकानदार अभिभावकों को लूट रहे हैं। - चारू त्रिपाठी, अभिभावक
निजी स्कूलों की किताबों का रेट
कक्षा किताबों की कीमत
एक 2,000 से 3,500
दो से पांच 4,000 से 6,300
छह से आठ 6,500 से 7,200
नौ व 10 7,000 से 8,250
11 व 12 8,000 से 10,500
नोट : आंकड़े रुपये में, किताबों की कीमत में बदलाव भी हो सकता है।
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दरअसल, पहले स्कूलों की ओर से अभिभावकों को रिजल्ट के साथ बुक स्टाल का पर्चा थमा दिया जाता था। इस बार तरीका थोड़ा बदल गया है। स्कूल संचालकों ने कोर्स में मामूली बदलाव कर दिया है। ये किताबें केवल स्कूल की ओर से निर्धारित दुकान पर ही मिल रहीं हैं। वहां जाने पर अभिभावकों को किताबों के साथ ही कॉपियां और पूरी स्टेशनरी खरीदनी पड़ती है। सभी पब्लिक और कॉन्वेंट स्कूलों ने निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगाकर अभिभावकों का बजट बिगाड़ दिया है। केंद्रीय विद्यालय में कक्षा नौ का कोर्स 1200 से 1500 रुपये में मिल रहा है, जबकि, निजी स्कूलों में उसी कक्षा की किताबें 5,000 से 7,000 रुपये की मिल रहीं हैं। केवी की 12वीं कक्षा का सेट 2200 से 2300 रुपये में है। निजी स्कूलों में इसी कक्षा का सेट स्टेशनरी के साथ आठ से नौ हजार रुपये में मिल रहा है।
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कई स्कूलों ने परिसर में ही खोल रखी है दुकान
कई स्कूलों ने मानकों के खिलाफ परिसर में ही किताबों की दुकान खोल रखी है। वहां की किताब-कॉपियां स्कूल के अलावा कहीं बाहर नहीं मिल रहीं हैं। अभिभावकों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए मनमानी कीमत वसूली जा रही है। बड़ा बाजार स्थित बुक स्टालों पर मौजूद अभिभावकों ने बताया कि जो कॉपियां बाहर 40 से 50 रुपये में मिल जाती हैं, स्कूल वाले उसी पर अपना नाम और लोगो छापकर 70 से 120 रुपये में बेच रहे हैं। अधिकारियों को स्कूलों व दुकानदारों की मिलीभगत की पूरी जानकारी है, पर इसके रोकथाम की कोई कवायद नहीं की जा रही है। संवाद
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बच्चों को पढ़ाना हो जाएगा मुश्किल
स्कूलों की ओर से हर साल फीस व कॉपी-किताबों का मूल्य बढ़ा दिया जाता है। इससे मध्यम वर्ग के अभिभावकों को बच्चों को पढ़ाने में कॉफी मुश्किलें हो रहीं है। आने वाले समय में बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो जाएंगा। - प्रियंका राजपूत, अभिभावक
किताबों और यूनिफॉर्म की वजह से हर साल बजट बिगड़ जाता है। दुकानदार पहले से ही कक्षा के हिसाब से सेट तैयार किए हुए हैं। यहां मनमानी की जा रही है। स्कूलों के संरक्षण में ये दुकानदार अभिभावकों को लूट रहे हैं। - चारू त्रिपाठी, अभिभावक
निजी स्कूलों की किताबों का रेट
कक्षा किताबों की कीमत
एक 2,000 से 3,500
दो से पांच 4,000 से 6,300
छह से आठ 6,500 से 7,200
नौ व 10 7,000 से 8,250
11 व 12 8,000 से 10,500
नोट : आंकड़े रुपये में, किताबों की कीमत में बदलाव भी हो सकता है।