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सराफा कारोबारियों की हड़ताल ने लगाई एक अरब की चपत
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Wed, 13 Apr 2016 01:00 AM IST
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दो मार्च से आंदोलित सराफा कारोबारियों ने 41 दिन बाद मंगलवार शाम अचानक प्रतिष्ठान खोल दिए। इससे बाजार में असमंजस की स्थिति दूर हो गयी। इसके साथ ही बाजार में चहल पहल लौट आयी। आंदोलन से सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का रिटेल कारोबार प्रभावित हुआ। वहीं बाजार खुलने के कुछ ही घंटों में पांच करोड़ रुपये से ज्यादा कारोबार हुआ।
पिछले कुछ दिनों से आंदोलनकारी बंद और खुलने पर एक मत नहीं हो पा रहे थे। बड़े कारोबारी जमकर काम कर रहे थे, जबकि रिटेलर आंदोलन का झंडा थामे हुए थे। तहसीलों आदि स्थानों पर काम हो रहा था, इससे आंदोलन धीरे धीरे निष्प्रभावी होता जा रहा था। केंद्रीय नेतृत्व से स्पष्ट निर्देश नहीं मिलने से आंदोलन खिंचता रहा। रविवार से कुछ ऐसे संकेत मिलने लगे कि बाजार एक दो दिन में खुल जाएगा। मंगलवार सुबह सकारात्मक संदेश मिलते ही दोपहर बाद सभा हुई और बुधवार से प्रतिष्ठान खोलने पर सहमति बनी। दुकानदार आनन फानन में उसी समय प्रतिष्ठान खोलने में जुट गए। देखते देखते कुछ ही देर में साहूकारा और शिवाजी मार्ग सराफा बाजार गुलजार हो गया। ग्राहकों को इससे राहत मिली और देर शाम तक खरीद फरोख्त होती रही।
देर आए दुरुस्त आए
42 वें दिन टूटे आंदोलन को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया है। ज्यादातर कारोबारी कहते हैं कि नेतागीरी में क्या मिला? जहां से शुरू हुए थे वहीं पर फिर आ गए। उत्पाद शुल्क नहीं लगाने की मांग से आंदोलन शुरू हुआ। रोल बैक तो हुआ नहीं क्या समझौता हुआ नेता बता नहीं पा रहे हैं? अगर यही होना तो वित्त मंत्री ने जब संसद में आश्वासन दिया था तो क्यों नहीं माना गया? वरिष्ठ कारोबारी कौशल अग्रवाल कहते हैं कि उत्पाद शुल्क वापसी मामले में एकजुटता दिखी, लेकिन परिपक्ता की कमी रही। फिर भी देर आए दुरुस्त आए। केंद्रीय नेतृत्व मजबूती से पक्ष नहीं रख पाए। विशाल मेहरोत्रा, अनिल पाटिल, अमित वर्मा, सोनू अग्रवाल, संजय आनंद, आयुष अग्रवाल आदि ने बताया कि यह फैसला पहले भी हो सकता था।
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आभार जताया
तीनों सराफा एसोसियेशन अध्यक्ष संदीप अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल ने व्यापारियों से मिले सहयोग पर आभार जताया है। नेताओं ने कहा कि अगर जरूरत हुई तो फिर आंदोलन होगा।
कारोबारी खुश
आंदोलन को लेकर फैली अफरातफरी खत्म होने पर कारोबारियों ने हर्ष जताया है। हर सहाय मल शोरूम के मोहित और अंकुर आनंद, तनिष्क के विवेक अरोरा, माडर्न ज्वैलर्स के सुबोध अग्रवाल, रामकुमार अग्रवाल ज्वैलर्स के पुनीत अग्रवाल आदि ने कहा कि बाजार में माहौल बनाने को गुरुवार में भी सभी प्रतिष्ठान खुले रहेंगे।
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पिछले कुछ दिनों से आंदोलनकारी बंद और खुलने पर एक मत नहीं हो पा रहे थे। बड़े कारोबारी जमकर काम कर रहे थे, जबकि रिटेलर आंदोलन का झंडा थामे हुए थे। तहसीलों आदि स्थानों पर काम हो रहा था, इससे आंदोलन धीरे धीरे निष्प्रभावी होता जा रहा था। केंद्रीय नेतृत्व से स्पष्ट निर्देश नहीं मिलने से आंदोलन खिंचता रहा। रविवार से कुछ ऐसे संकेत मिलने लगे कि बाजार एक दो दिन में खुल जाएगा। मंगलवार सुबह सकारात्मक संदेश मिलते ही दोपहर बाद सभा हुई और बुधवार से प्रतिष्ठान खोलने पर सहमति बनी। दुकानदार आनन फानन में उसी समय प्रतिष्ठान खोलने में जुट गए। देखते देखते कुछ ही देर में साहूकारा और शिवाजी मार्ग सराफा बाजार गुलजार हो गया। ग्राहकों को इससे राहत मिली और देर शाम तक खरीद फरोख्त होती रही।
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देर आए दुरुस्त आए
42 वें दिन टूटे आंदोलन को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया है। ज्यादातर कारोबारी कहते हैं कि नेतागीरी में क्या मिला? जहां से शुरू हुए थे वहीं पर फिर आ गए। उत्पाद शुल्क नहीं लगाने की मांग से आंदोलन शुरू हुआ। रोल बैक तो हुआ नहीं क्या समझौता हुआ नेता बता नहीं पा रहे हैं? अगर यही होना तो वित्त मंत्री ने जब संसद में आश्वासन दिया था तो क्यों नहीं माना गया? वरिष्ठ कारोबारी कौशल अग्रवाल कहते हैं कि उत्पाद शुल्क वापसी मामले में एकजुटता दिखी, लेकिन परिपक्ता की कमी रही। फिर भी देर आए दुरुस्त आए। केंद्रीय नेतृत्व मजबूती से पक्ष नहीं रख पाए। विशाल मेहरोत्रा, अनिल पाटिल, अमित वर्मा, सोनू अग्रवाल, संजय आनंद, आयुष अग्रवाल आदि ने बताया कि यह फैसला पहले भी हो सकता था।
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आभार जताया
तीनों सराफा एसोसियेशन अध्यक्ष संदीप अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल ने व्यापारियों से मिले सहयोग पर आभार जताया है। नेताओं ने कहा कि अगर जरूरत हुई तो फिर आंदोलन होगा।
कारोबारी खुश
आंदोलन को लेकर फैली अफरातफरी खत्म होने पर कारोबारियों ने हर्ष जताया है। हर सहाय मल शोरूम के मोहित और अंकुर आनंद, तनिष्क के विवेक अरोरा, माडर्न ज्वैलर्स के सुबोध अग्रवाल, रामकुमार अग्रवाल ज्वैलर्स के पुनीत अग्रवाल आदि ने कहा कि बाजार में माहौल बनाने को गुरुवार में भी सभी प्रतिष्ठान खुले रहेंगे।