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बारिश में भी नहीं रुके शराफत मियां के दीवानों के कदम
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उर्स में उमड़ी भीड़।
बरेली। चार दिनों से चल रहे उर्स-ए-शराफती कुल की रस्म के साथ मुकम्मल हो गया। बारिश के बावजूद हजरत शाह शराफत अली मियां के दीवानों के कदम नहीं रुके और भीगते हुए कुल शरीफ की रस्म में शामिल हुए।
उर्स के आखिरी रोज सोमवार को दस्तूर के मुताबिक, तकरीब की शुरुआत सुबह कुराना ख्वानी की रस्म से हुई। इसके बाद खानकाही मेहमानखाने में अल्होज मुंतखब मियां की सदारत में तकरीरी जलसा आयोजित किया गया। इसमें खास तौर आलिम अजीज मुजदिद्दी ने मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि वो शरीयत पर पाबंदी के साथ अमल करें। अपने बुजुर्ग-ए-कामिल से सच्ची पक्की मोहब्बत के साथ उनके बताए रास्ते पर चलें। उनकी तालीम पर अमल करें।
इस दौरान हसीब रौनक, आमिल ककरालवी, मौलाना अनवर, आकिब सकसैनी, फैजान सकलैनी ने नातो मनकबत के कलाम पेश कर समां बांध दिया। इसके बाद सज्जादानशीन पीरो मुर्शिद शाह मोहम्मद सकलैन मियां मंच पर आए और ठीक 11 बजे 54वें कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। फातिहा पढ़ने के बाद मियां हुजूर ने मुल्क की खुशहाली, सलामती, अमन और कौम की इज्जत-ओ-हिफाजत के लिए दुआ की। साथ ही मुरीदीन को तौर तरीकों और शरियत के मुताबिक जिंदगी गुजारने की हिदायत की।
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इस मौके पर साहबजादे गाजी मियां, हाफिज गुलाम गौस, सादकैन सकलैनी, सलमान सकलैनी, इंतिखाब सकलैनी, गुलाम मुर्तुजा, मुंतसिब सकलैनी, मुस्लितजाब सकलैनी आदि मौजूद रहे। जलसे का संचालन मुख्तार तिलहरी ने किया। कुल के दौरान भारी भीड़ जुटी। दरगाह के आस पास की गलिया भरी रहीं। दीवानखाने में बड़ी तादाद में लोग मौजूद रहे।
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उर्स के आखिरी रोज सोमवार को दस्तूर के मुताबिक, तकरीब की शुरुआत सुबह कुराना ख्वानी की रस्म से हुई। इसके बाद खानकाही मेहमानखाने में अल्होज मुंतखब मियां की सदारत में तकरीरी जलसा आयोजित किया गया। इसमें खास तौर आलिम अजीज मुजदिद्दी ने मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि वो शरीयत पर पाबंदी के साथ अमल करें। अपने बुजुर्ग-ए-कामिल से सच्ची पक्की मोहब्बत के साथ उनके बताए रास्ते पर चलें। उनकी तालीम पर अमल करें।
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इस दौरान हसीब रौनक, आमिल ककरालवी, मौलाना अनवर, आकिब सकसैनी, फैजान सकलैनी ने नातो मनकबत के कलाम पेश कर समां बांध दिया। इसके बाद सज्जादानशीन पीरो मुर्शिद शाह मोहम्मद सकलैन मियां मंच पर आए और ठीक 11 बजे 54वें कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। फातिहा पढ़ने के बाद मियां हुजूर ने मुल्क की खुशहाली, सलामती, अमन और कौम की इज्जत-ओ-हिफाजत के लिए दुआ की। साथ ही मुरीदीन को तौर तरीकों और शरियत के मुताबिक जिंदगी गुजारने की हिदायत की।
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इस मौके पर साहबजादे गाजी मियां, हाफिज गुलाम गौस, सादकैन सकलैनी, सलमान सकलैनी, इंतिखाब सकलैनी, गुलाम मुर्तुजा, मुंतसिब सकलैनी, मुस्लितजाब सकलैनी आदि मौजूद रहे। जलसे का संचालन मुख्तार तिलहरी ने किया। कुल के दौरान भारी भीड़ जुटी। दरगाह के आस पास की गलिया भरी रहीं। दीवानखाने में बड़ी तादाद में लोग मौजूद रहे।