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Bareilly News: कारसेवा से बना कच्चा बांध नदी में बहा, फिर भी डटे किसान

Sun, 10 Nov 2024 03:04 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 10 Nov 2024 03:04 AM IST
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The raw dam built by Karseva washed away in the river, still farmers stood firm
खमरिया के पास बना बांध बहा। स्रोत: ग्रामीण
शीशगढ़। पश्चिमी बहगुल नदी पर खमरिया गांव के पास पिछले 25 दिनों की कड़ी मेहनत से किसानों ने कच्चा बांध बनाया, जो नदी में दबाव के कारण बह गया। इससे लाखों रुपये के नुकसान के बाद किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। सरकारी मदद के बिना अब किसान दोबारा बांध बनाने की रणनीति बना रहे हैं।
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पश्चिमी बहगुल नदी पर अंग्रेजी शासन काल में बना पक्का रेगुलेटर बांध सन् 1925 में आई भीषण बाढ़ के कारण टूट गया था। इसके अवशेष आज भी मौजूद हैं। पक्का बांध टूटने के बाद से क्षेत्रीय किसानों ने शासन व प्रशासन से बांध निर्माण की वर्षों गुहार लगाने के साथ ही पैदल मार्च करके तहसील मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन भी किया। जिलाधिकारी से लेकर नगर विभाग के अधिकारियों ने टूटे बांध का निरीक्षण कर शासन को रिपोर्ट भी भेजी थी, मगर पक्का बांध नहीं बन सका। इसके बाद किसानों ने पूर्व विधायक जयदीप सिंह बरार के संरक्षण में किसान कल्याण समिति का गठन किया।
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दो जिलों के किसान करते हैं सिंचाई
किसान कल्याण समिति के द्वारा पिछले 16 वर्षों से किसान कारसेवा करके कच्चे बांध का निर्माण करते आ रहे हैं। कच्चे बांध से रामपुर जिले की तहसील बिलासपुर, तहसील बहेड़ी और मीरगंज में आने वाले 165 गांवों के किसान अपनी फसल की सिंचाई करते हैं।
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पक्के बांध के निर्माण के लिए 57 करोड़ रुपये की राशि हुई थी स्वीकृत

पक्के बांध के निर्माण के लिए पूर्व सांसद वरुण गांधी ने अपने संसदीय कार्यकाल में शासन से 57 करोड़ रुपये की स्वीकृति कराई थी। स्वीकृति होने के बाद कुछ खामियों के कारण स्वीकृत पैसा शासन को वापस हो गया था। पैसा शासन को वापस होने से आज तक पक्के बांध का निर्माण नहीं हो सका।



वर्षा ऋतु में काटना पड़ता है कच्चा बांध

किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष पूर्व विधायक जयदीप सिंह बरार ने बताया कि यदि कच्चे बांध को वर्षा ऋतु में नहीं काटेंगे तो आसपास के गांव नदी में बह जाएंगे। इसलिए प्रतिवर्ष कच्चे बांध का निर्माण करते हैं। वर्षा ऋतु के समय बांध को काट देते हैं। संवाद
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बांध बनवाने के लिए प्रस्ताव बनाकर डीएम को भेजा रहा है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद दोबारा बांध बनाने का कार्य करवाया जाएगा।
- रत्निका श्रीवास्तव, एसडीएम
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