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बाजार में फड़ लगाकर जो बेचता था आलू, वह स्मैक बेचकर बना करोड़पति
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चोर
बरेली। फतेहगंज पश्चिमी और मीरगंज में रातोंरात अमीर बने स्मैक के धंधेबाजों की लंबी फेहरिस्त है। इसमें ऐसे शख्स भी शामिल हैं बिना किसी प्रापर्टी या रोजगार के करोड़पति बन गए हैं। स्मैक के धंधेबाजों में कोई आलूवाला तो कोई जेनरेटर वाला है। उपनामों के पीछे की सच्चाई टटोलने पर पता लगता है कि स्मैक के काले धंधे से यह लोग वर्षों में अर्श से फर्श पर पहुंचे हैं।
पुलिस का मुखबिर रहा एक नामी तस्कर उपनाम आलूवाला से मशहूर है। यह शख्स 10 साल पहले तक साप्ताहिक बाजारों में फड़ लगाकर आलू बेचता था, आज वह करोड़ों में खेल रहा है। दूसरे शख्स की आज भी मंडी में आलू की थोक दुकान है। उसके नाम के आगे भी आलूवाला लगा है। वह छोटा तस्कर है और दुकान पर ही पैकेट में फुटकर में स्मैक बेचता है। दुकान बंद होने पर यही डिलीवरी लोगों को वह अपने घर से देता है। कभी जेनरेटर की रिपेयरिंग और किराये पर संचालन करने वाला शख्स अब नामी तस्कर है। उसके नाम के आगे आज भी जेनरेटर लगा है। लंगड़ा उपनाम वाला तस्कर दो साल तक पैदल था। काले धंधे से आज वह भी कोठियां बनाए बैठा है। ताज्जुब की बात यह है कि पुलिस इन धंधेबाजों पर हाथ नहीं डालती। इसके पीछे तर्क होता है कि स्थानीय स्तर पर यह अपराध नहीं कर रहे।
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पुलिस का मुखबिर रहा एक नामी तस्कर उपनाम आलूवाला से मशहूर है। यह शख्स 10 साल पहले तक साप्ताहिक बाजारों में फड़ लगाकर आलू बेचता था, आज वह करोड़ों में खेल रहा है। दूसरे शख्स की आज भी मंडी में आलू की थोक दुकान है। उसके नाम के आगे भी आलूवाला लगा है। वह छोटा तस्कर है और दुकान पर ही पैकेट में फुटकर में स्मैक बेचता है। दुकान बंद होने पर यही डिलीवरी लोगों को वह अपने घर से देता है। कभी जेनरेटर की रिपेयरिंग और किराये पर संचालन करने वाला शख्स अब नामी तस्कर है। उसके नाम के आगे आज भी जेनरेटर लगा है। लंगड़ा उपनाम वाला तस्कर दो साल तक पैदल था। काले धंधे से आज वह भी कोठियां बनाए बैठा है। ताज्जुब की बात यह है कि पुलिस इन धंधेबाजों पर हाथ नहीं डालती। इसके पीछे तर्क होता है कि स्थानीय स्तर पर यह अपराध नहीं कर रहे।
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नेता के हाथ जाता है थाने का महीना
फतेहगंज पश्चिमी में हाल ही में हुए एक घटनाक्रम में फंसे एक छुटभैय्ये नेता को पुलिस ने साफ बचा दिया। बताते हैं कि नेता ही काफी समय से स्मैक के धंधेबाजों की डीलिंग करता है। थाना पुलिस तस्करों से सीधी डील नहीं करती। नेता के जरिये पुलिस को बैठे बिठाए तगड़ा हिस्सा हर महीने मिल जाता है। जो तस्कर आनाकानी या गड़बड़ी करता है, उसके खिलाफ पुलिस हल्की कार्रवाई करके अपना रिकार्ड मेंटेंन कर लेती है।
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