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Bareilly News: पिता-पुत्र के बीच के मौन को नाटक ने दिए शब्द
Sun, 29 Mar 2026 03:06 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sun, 29 Mar 2026 03:06 AM IST
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बरेली। विंडरमेयर थिएटर में शनिवार की शाम भावनाओं के नाम रही, जहां मुंबई की उजागर ड्रामेटिक एसोसिएशन की ओर से प्रस्तुत एकल नाटक पापा पेंटर ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. ब्रजेश्वर सिंह के आमंत्रण पर आयोजित इस नाटक ने 90 के दशक की यादों को ताजा करते हुए पिता और पुत्र के बीच के उस मौन को शब्द दिए, जो अक्सर पीढ़ियों के अंतराल में कहीं खो जाता है।
विजय अशोक शर्मा के लिखित और अभिनीत यह नाटक राजस्थान के एक छोटे से गांव से शुरू होकर गुवाहाटी और बंगलूरू जैसे बड़े शहरों तक के सफर की कहानी है। नाटक में पलायन के दर्द के साथ-साथ परंपराओं से जुड़े पिता और आधुनिकता में पले-बढ़े बेटे के बीच के अनकहे रिश्तों को बेहद संजीदगी से उकेरा गया।
मंच पर शक्तिमान, दूरदर्शन, साइकिल की घंटी और राशन कार्ड जैसे प्रतीकों का प्रयोग कर दर्शकों को उस दौर की याद दिला दी गई, जब जीवन की रफ्तार आज जैसी भागदौड़ भरी नहीं थी। हिंदी और राजस्थानी भाषा के सुंदर मिश्रण वाले इस नाटक का निर्देशन अजीत सिंह पलावत ने किया, जबकि अतिशय अखिल के लाइव म्यूजिक ने प्रस्तुति में प्राण फूंक दिए।
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विजय अशोक शर्मा के लिखित और अभिनीत यह नाटक राजस्थान के एक छोटे से गांव से शुरू होकर गुवाहाटी और बंगलूरू जैसे बड़े शहरों तक के सफर की कहानी है। नाटक में पलायन के दर्द के साथ-साथ परंपराओं से जुड़े पिता और आधुनिकता में पले-बढ़े बेटे के बीच के अनकहे रिश्तों को बेहद संजीदगी से उकेरा गया।
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मंच पर शक्तिमान, दूरदर्शन, साइकिल की घंटी और राशन कार्ड जैसे प्रतीकों का प्रयोग कर दर्शकों को उस दौर की याद दिला दी गई, जब जीवन की रफ्तार आज जैसी भागदौड़ भरी नहीं थी। हिंदी और राजस्थानी भाषा के सुंदर मिश्रण वाले इस नाटक का निर्देशन अजीत सिंह पलावत ने किया, जबकि अतिशय अखिल के लाइव म्यूजिक ने प्रस्तुति में प्राण फूंक दिए।
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