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Bareilly News: जिस प्लांट में धमाका, उसके पास पावर ग्रिड लाइन पर पड़ा असर
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बरेली। आग का गोला बनी फोम फैक्टरी नियमों को ताक पर रखकर चलाई जा रही है। फैक्टरी के दोनों प्लांट लोहे के ढांचे से बनाए गए हैं, जो बिजली के सुचालक हैं। वहीं, दोनों प्लांट के बीच से पावर ग्रिड लाइन गुजर रही है। आग का असर लाइन के एक छोर पर पड़ा और इसमें लगी बॉल पीली से काली पड़ गई। हालांकि समय रहते आग बुझने से बड़ी घटना टल गई। माना जा रहा है कि लपटें या ज्यादा तपिश पहुंचने पर लाइन ब्रेक हो सकती थी।
फैक्टरी में अग्नि सुरक्षा मानकों का किस स्तर तक अनुपालन कराया जा रहा था, यह जांच का विषय है। हालांकि फैक्टरी के दो प्लांट के बीच होकर गुजर रही चार सौ केवीए क्षमता की पावर ग्रिड लाइन खुद में सवाल है। लाइन के ठीक नीचे की जगह प्रबंधन ने छोड़ रखी है पर जिस प्लांट में हादसा हुआ, वहां से लाइन की दूरी ज्यादा नहीं है। अग्निकांड के वक्त के वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं, जिनमें आग की ऊंची लपटें उठती दिख रही हैं।
वर्जन
यह चार सौ केवीए क्षमता की ग्रिड लाइन है। कोई भी निर्माण इससे कम से कम साढ़े छह मीटर दूर होना चाहिए। यह औद्योगिक इकाई लाइन बनने से पहले थी या बाद में स्थापित की गई, यह जांच का विषय हो सकता है। लाइन से प्लांट की दूरी व आग से लाइन पर असर की जांच कराई जाएगी। -अनिल कुमार गुप्ता, अधिशासी अभियंता पारेषण
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किसी उद्योग के लिए अलग-अलग विभागों से एनओसी दी जाती है। उद्योग स्थापना, समस्या निस्तारण, प्रोत्साहन, प्रचार-प्रसार आदि कार्य उद्योग केंद्र से होते हैं। हाईटेंशन लाइन के संबंध में फायर विभाग को जांच करनी चाहिए। - ऋषि रंजन गोयल, संयुक्त आयुक्त उद्योग
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फैक्टरी में अग्नि सुरक्षा मानकों का किस स्तर तक अनुपालन कराया जा रहा था, यह जांच का विषय है। हालांकि फैक्टरी के दो प्लांट के बीच होकर गुजर रही चार सौ केवीए क्षमता की पावर ग्रिड लाइन खुद में सवाल है। लाइन के ठीक नीचे की जगह प्रबंधन ने छोड़ रखी है पर जिस प्लांट में हादसा हुआ, वहां से लाइन की दूरी ज्यादा नहीं है। अग्निकांड के वक्त के वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं, जिनमें आग की ऊंची लपटें उठती दिख रही हैं।
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यह चार सौ केवीए क्षमता की ग्रिड लाइन है। कोई भी निर्माण इससे कम से कम साढ़े छह मीटर दूर होना चाहिए। यह औद्योगिक इकाई लाइन बनने से पहले थी या बाद में स्थापित की गई, यह जांच का विषय हो सकता है। लाइन से प्लांट की दूरी व आग से लाइन पर असर की जांच कराई जाएगी। -अनिल कुमार गुप्ता, अधिशासी अभियंता पारेषण
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किसी उद्योग के लिए अलग-अलग विभागों से एनओसी दी जाती है। उद्योग स्थापना, समस्या निस्तारण, प्रोत्साहन, प्रचार-प्रसार आदि कार्य उद्योग केंद्र से होते हैं। हाईटेंशन लाइन के संबंध में फायर विभाग को जांच करनी चाहिए। - ऋषि रंजन गोयल, संयुक्त आयुक्त उद्योग