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Bareilly News: ठंड में फिर गरमाया अलाव की लकड़ियों के भुगतान का मामला
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बरेली। ठंड मेंं अलाव की लकड़ियों का भुगतान नहीं होने का मामला फिर गरमाया है। कोटेशन से संबंधित 28 फाइलों के गायब होने की शिकायत पर मंडलायुक्त ने 26 नवंबर तक रिपोर्ट तलब की है। इस मामले में तत्कालीन एक्सईएन को बचाने की कोशिश करने वाले अधिकारियों की भी जांच शुरू हो सकती है।
वर्ष 2023-24 में नगर निगम ने अलाव की लकड़ियों के लिए टेंडर नहीं किया था। ठंड बढ़ने पर महावीर कंस्ट्रक्शन एंड जनरल ऑर्डर सप्लायर्स से लकड़ियां खरीदी गईं। इसके बाद अतिरिक्त लकड़ियां लेने पर तत्कालीन एक्सईएन दिलीप कुमार शुक्ला ने ठेकेदार से कहा था कि भुगतान न रोकें। कोटेशन से भुगतान कर दिया जाएगा। पूर्व में हुई शिकायतों के मुताबिक तीन फरवरी 2024 तक आपूर्ति की गई थी। इसके बाद कोटेशन की 28 फाइलें तैयार कर तत्कालीन एक्सईएन दिलीप कुमार शुक्ला को सौंपा गया, लेकिन वे आगे नहीं बढ़ सकीं।
अमर उजाला ने मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो दिलीप कुमार शुक्ला को रातों-रात लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। ठेकेदार को लकड़ियों का भुगतान नहीं मिला। अभियंता इस मामले को दबाने में लगे हैं।
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नहीं हुई एफआईआर, जांच भी अधूरीतत्कालीन नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने पार्षदों के सामने ही कहा था कि या तो शाम तक फाइलें उनकी टेबल पर पहुंच जाएं या सुबह तक संबंधित बाबुओं पर एफआईआर की कॉपी उनके सामने हो। मामले की जांच भी मुख्य अभियंता को सौंपी गई तो प्रकाश में आया कि कई फाइलें मिल गईं हैं। उसमें आगे की कार्रवाई की जा रही है। अब पोर्टल पर शिकायत के बाद मामला फिर सुर्खियों में है। संवाद
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वर्ष 2023-24 में नगर निगम ने अलाव की लकड़ियों के लिए टेंडर नहीं किया था। ठंड बढ़ने पर महावीर कंस्ट्रक्शन एंड जनरल ऑर्डर सप्लायर्स से लकड़ियां खरीदी गईं। इसके बाद अतिरिक्त लकड़ियां लेने पर तत्कालीन एक्सईएन दिलीप कुमार शुक्ला ने ठेकेदार से कहा था कि भुगतान न रोकें। कोटेशन से भुगतान कर दिया जाएगा। पूर्व में हुई शिकायतों के मुताबिक तीन फरवरी 2024 तक आपूर्ति की गई थी। इसके बाद कोटेशन की 28 फाइलें तैयार कर तत्कालीन एक्सईएन दिलीप कुमार शुक्ला को सौंपा गया, लेकिन वे आगे नहीं बढ़ सकीं।
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अमर उजाला ने मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो दिलीप कुमार शुक्ला को रातों-रात लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। ठेकेदार को लकड़ियों का भुगतान नहीं मिला। अभियंता इस मामले को दबाने में लगे हैं।
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नहीं हुई एफआईआर, जांच भी अधूरीतत्कालीन नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने पार्षदों के सामने ही कहा था कि या तो शाम तक फाइलें उनकी टेबल पर पहुंच जाएं या सुबह तक संबंधित बाबुओं पर एफआईआर की कॉपी उनके सामने हो। मामले की जांच भी मुख्य अभियंता को सौंपी गई तो प्रकाश में आया कि कई फाइलें मिल गईं हैं। उसमें आगे की कार्रवाई की जा रही है। अब पोर्टल पर शिकायत के बाद मामला फिर सुर्खियों में है। संवाद