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Bareilly News: निशुल्क इंजेक्शन लगवाने के लिए राजी नहीं दिल
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हृदयाघात की चपेट में आए मरीजों को 50 हजार रुपये के इंजेक्शन को मुफ्त में लगवाने के लिए उनके परिवार वाले राजी नहीं हो रहे हैं। जिला अस्पताल में संचालित स्टेमी विंग में चार माह में करीब सौ से अधिक मरीज पहुंचे। 18 मरीजों में हृदयाघात की पुष्टि हुई, पर बिना इंजेक्शन लगवाए परिजन उनको डिस्चार्ज करवाकर ले गए।
सर्दियों में हृदयाघात की आशंका बढ़ती है। लिहाजा, शुरुआती इलाज के लिए जिला अस्पताल में स्टेमी विंग बनाई गई। स्टाफ को ईसीजी जांच, पल्स काउंट समेत इंजेक्शन लगाने का प्रशिक्षण दिया गया। शासन से इंजेक्शन मिलने पर 25 दिसंबर से इसका संचालन शुरू किया गया। शुरुआत के दस दिनों में ही ईसीजी कराने वाले मरीजों की संख्या तीन सौ के पार पहुंच गई। इसमें आठ रोगियों में हृदयाघात की पुष्टि हुई, लेकिन उनके परिजनों ने स्टेमी विंग में इलाज से इन्कार कर दिया। मरीज को डिस्चार्ज कराकर निजी अस्पताल में ले गए।
प्रभारी एडीएसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित के मुताबिक, विंग सक्रिय है। जो मरीज पहुंच रहे हैं, उनकी जरूरी जांचें हो रही हैं लेकिन मरीज को टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन लगवाने के लिए परिजन तैयार नहीं हो रहे। बाजार में इसकी कीमत करीब 50 हजार रुपये है। यह धमनियों बने खून के थक्के को गला देता है।
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कॉर्डियोलॉजिस्ट और वेंटिलेटर का अभाव बड़ी वजह
अस्पताल में विंग बनी है, लेकिन कॉर्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है और वेंटिलेटर भी सक्रिय नहीं है। ईसीजी जांच होती है, लेकिन हृदयाघात की पुष्टि के लिए रिपोर्ट स्टेमी केयर नेटवर्क यानी व्हाट्सएप ग्रुप पर अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ को भेजी जाती है। पुष्टि पर परामर्श के तहत इंजेक्शन लगाए जाने की व्यवस्था है। एडी एसआईसी ने बताया कि प्रक्रिया की जानकारी देने पर मरीज के परिजन विशेषज्ञ को ही दिखाने की बात करते हैं। लिखित अनुरोध पत्र लेकर मरीज को डिस्चार्ज करना पड़ता है।
सीने का हर दर्द हृदयाघात नहीं, जांच जरूरी
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आशीष के मुताबिक, सीने में दर्द, चुभन को भी हृदयाघात से जोड़ा जाता है। एसिडिटी, गैस्ट्रिक रिफ्लेक्स, पित्ताशय की पथरी, फेफड़ों की बीमारी, सांस की समस्या, मांसपेशियों, पसलियों में खिंचाव से भी सीने में दर्द हो सकता है। सिर्फ जांच से ही रोग का पता चलता है। हृदयाघात में सीने में दर्द के साथ दबाव, जकड़न, भारीपन, दर्द छाती के साथ कंधे, गर्दन, जबड़े, पीठ या पेट तक फैलता है। सांस भारी होती है और पसीना निकलता है। पेट में ऐंठन, उल्टी, चक्कर, थकान का अहसास होता है। ऐसे लक्षण उभरे तो विशेषज्ञ को दिखाना जरूरी है।
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सर्दियों में हृदयाघात की आशंका बढ़ती है। लिहाजा, शुरुआती इलाज के लिए जिला अस्पताल में स्टेमी विंग बनाई गई। स्टाफ को ईसीजी जांच, पल्स काउंट समेत इंजेक्शन लगाने का प्रशिक्षण दिया गया। शासन से इंजेक्शन मिलने पर 25 दिसंबर से इसका संचालन शुरू किया गया। शुरुआत के दस दिनों में ही ईसीजी कराने वाले मरीजों की संख्या तीन सौ के पार पहुंच गई। इसमें आठ रोगियों में हृदयाघात की पुष्टि हुई, लेकिन उनके परिजनों ने स्टेमी विंग में इलाज से इन्कार कर दिया। मरीज को डिस्चार्ज कराकर निजी अस्पताल में ले गए।
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प्रभारी एडीएसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित के मुताबिक, विंग सक्रिय है। जो मरीज पहुंच रहे हैं, उनकी जरूरी जांचें हो रही हैं लेकिन मरीज को टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन लगवाने के लिए परिजन तैयार नहीं हो रहे। बाजार में इसकी कीमत करीब 50 हजार रुपये है। यह धमनियों बने खून के थक्के को गला देता है।
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कॉर्डियोलॉजिस्ट और वेंटिलेटर का अभाव बड़ी वजह
अस्पताल में विंग बनी है, लेकिन कॉर्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है और वेंटिलेटर भी सक्रिय नहीं है। ईसीजी जांच होती है, लेकिन हृदयाघात की पुष्टि के लिए रिपोर्ट स्टेमी केयर नेटवर्क यानी व्हाट्सएप ग्रुप पर अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ को भेजी जाती है। पुष्टि पर परामर्श के तहत इंजेक्शन लगाए जाने की व्यवस्था है। एडी एसआईसी ने बताया कि प्रक्रिया की जानकारी देने पर मरीज के परिजन विशेषज्ञ को ही दिखाने की बात करते हैं। लिखित अनुरोध पत्र लेकर मरीज को डिस्चार्ज करना पड़ता है।
सीने का हर दर्द हृदयाघात नहीं, जांच जरूरी
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आशीष के मुताबिक, सीने में दर्द, चुभन को भी हृदयाघात से जोड़ा जाता है। एसिडिटी, गैस्ट्रिक रिफ्लेक्स, पित्ताशय की पथरी, फेफड़ों की बीमारी, सांस की समस्या, मांसपेशियों, पसलियों में खिंचाव से भी सीने में दर्द हो सकता है। सिर्फ जांच से ही रोग का पता चलता है। हृदयाघात में सीने में दर्द के साथ दबाव, जकड़न, भारीपन, दर्द छाती के साथ कंधे, गर्दन, जबड़े, पीठ या पेट तक फैलता है। सांस भारी होती है और पसीना निकलता है। पेट में ऐंठन, उल्टी, चक्कर, थकान का अहसास होता है। ऐसे लक्षण उभरे तो विशेषज्ञ को दिखाना जरूरी है।