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Bareilly News: भ्रष्ट तंत्र की नींव पर टिका भूमाफिया गिरोह का किला

Mon, 06 Jan 2025 02:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jan 2025 02:28 AM IST
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The fort of land mafia gang rests on the foundation of corrupt system.
बरेली। निलंबित चकबंदी लेखपाल सावन कुमार जायसवाल के भूमाफिया गिरोह का किला भ्रष्ट तंत्र की नींव पर बनाया गया। पुलिस, तहसील प्रशासन, नगर निगम, बिजली निगम, रजिस्ट्री दफ्तर से लेकर कई और विभागों में जबर्दस्त सेटिंग के बूते गिरोह बेशकीमती कब्जाता रहा। अब गुर्गों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
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निलंबित लेखपाल के खिलाफ रिपोर्ट कराने वाली नुसरत ने बताया कि इस गिरोह ने उनकी पुश्तैनी जमीन हथियाने की कोशिश की। वर्ष 1992 में उनके जेठ मुनव्वर हुसैन ने तत्कालीन विधायक मास्टर छोटेलाल गंगवार से 300 वर्गगज का भूखंड खरीदा था। छोटेलाल गंगवार ने इतवारी लाल व हीरालाल की पॉवर ऑफ अटार्नी के जरिये भूखंड बेचा। वर्ष 2012 में जेठ ने इस भूखंड का बैनामा उनके नाम कर दिया।
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नुसरत के मुताबिक आनंद विहार कॉलोनी निवासी पड़ोसी सावन कुमार ने उनका भूखंड कब्जाने की कोशिश की। खुद को इस प्लॉट का मालिक बताते हुए रामपुर निवासी दीपक कुमार 17 अगस्त को वहां निर्माण कराने लगा। सूचना पर उनके पति आसिम हुसैन मौके पर पहुंचे तो वहां मौजूद अनुसूचित जाति की महिलाओं ने उनकी पिटाई कर दी। उन्होंने बारादरी पुलिस से शिकायत की तो पुलिस ने उन्हीं को कब्जेदार बताकर थाने में बैठा लिया। मुचलका पाबंद भी कर दिया। दीवारें बनवाकर आरोपियों ने सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए। काफी भटकने के बाद वह एसपी सिटी और एसडीएम सदर से मिले तो जांच और कार्रवाई शुरू की गई।
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ऐसे कब्जाते थे जमीन
दीपक कुमार ने दावा किया कि जमीन के पूर्व मालिक इतवारी लाल उसके पिता के घनिष्ठ मित्र थे। मौत से पहले वह उनके पिता के नाम इस जमीन की वसीयत कर गए थे। अब ये जमीन उसके नाम आ गई। उसने नौ अगस्त को इस जमीन की रजिस्ट्री नुसरत के पड़ोसी सुनील कुमार को कर दी। सुनील ने कोर्ट में केस डाला कि नुसरत के पति व भाइयों ने प्लॉट पर कब्जा कर लिया है। कोर्ट ने 16 अगस्त को स्टे दे दिया और 17 की सुबह इन्होंने प्लॉट कब्जाना शुरू कर दिया। आरोपियों ने इतवारी लाल का फर्जी प्रमाणपत्र भी बनवा लिया, इसमें मौत 1991 में दिखाई गई, जबकि हकीकत में वर्ष 2010 में उनकी मौत हुई थी।
ऐसे करते हैं खेल
दूसरे मामले की रिपोर्ट कराने वाले इलयास का प्लॉट हथियाने के लिए भी इसी गिरोह ने कोशिश की। इस मामले में एसपी सिटी की जांच में कई फर्जीवाड़े सामने आए हैं। इससे संबंधित सभी मामलों में एक ही वकील के वकालतनामा लगे हैं। क्रेता, विक्रेता व गवाह भी सभी मामलों में लगभग चुनिंदा लोग ही हैं। ये लोग बिजली कनेक्शन व नगर निगम का जलकल कनेक्शन भी जुगाड़ से करा लेते थे। बैंक में खाते भी आनन-फानन खोले जा रहे थे। ये कब्जे का प्रयास माह के दूसरे शनिवार को करते थे, ताकि दो दिन कोई कार्रवाई न हो सके।वर्जन

लेखपाल के गिरोह में कई विभागों के लोगों की संलिप्तता के साक्ष्य मिले हैं। किस बेशकीमती जमीन को हथियाना है, उसके लिए पूरी रूपरेखा बनाई जाती थी। प्रॉपर्टी के धंधे से जुड़े लोग भी अंदरखाने निवेश कर रहे थे। पूछताछ में ऐसी चीजें सामने आ रही हैं। - मानुष पारीक, एसपी सिटी
अमर उजाला ब्यूरो
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