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पांच जोन में बनेगी सेपक टाकरा की नेशनल एकेडमी
बरेली।
Updated Fri, 10 Feb 2017 01:01 AM IST
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The five zones will form in Sepak National Academy of Takra
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
मलेशिया, थाइलैंड, सिंगापुर में सेपक टाकरा का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलता है। अब भारत में भी यह खेल लोगों के सिर चढ़कर बोलेगा, क्योंकि विश्वविद्यालयों के साथ इसके राष्ट्रीय स्कूल प्रतियोगिताओं में शामिल होने के बाद देश में सेपक टाकरा की पांच नेशनल एकेडमी खोलने की तैयारी है। भारतीय सेपक टाकरा संघ ने देश को पांच जोन में बांटकर प्रत्येक में एक नेशनल एकेडमी खोलने का प्रस्ताव तैयार किया है। इन एकेडमी में स्कूल कॉलेजों से सेपक टाकरा के हुनरमंद खिलाड़ी छांटकर लिए जाएंगे और एशियन और वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स के लिए खिलाड़ी तैयार किए जाएंगे।
भारतीय सेपक टाकरा संघ के महासचिव योगेंद्र सिंह दहिया ने बताया कि एकेडमी का प्रस्ताव तैयार कर राज्यों को जमीन उपलब्ध कराने के लिए भेजा गया है। उन्होंने बताया कि सेपक टाकरा को बढ़ावा देने के लिए ही राष्ट्रीय स्कूल प्रतियोगिताओं में इस बार अंडर-19 के साथ अंडर-14 व 17 को भी शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि सभी विश्वविद्यालयों में सेपक टाकरा के लिए इंडोर स्टेडियम की व्यवस्था कराई जाएगी। प्रत्येक जोन में बीस-बीस यूनिवर्सिटीज के बीच जोनल प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी।
कबड्डी के चक्कर में सेपक टाकरा को दिलाई पहचान
संघ के महासचिव योगेंद्र सिंह दहिया ने बताया कि 1982 के एशियन गेम्स में भारत कबड्डी को शामिल कराना चाहता था। वहीं चीन वुशू को और सिंगापुर, थाईलैंड व सिंगापुर मिलकर सेपक टाकरा को शामिल कराना चाहता था। तीनों देश ने मिलकर संयुक्त रूप से एक दूसरे के गेम्स को शामिल कराने की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैरवी की और 1982 में पहली बार इन गेम्स को एशियन गेम्स में शामिल किया गया। भारतीय टीमों ने भी सेपक टाकरा में हाथ आजमाए और मेडल हासिल किए। बरेली में साई सेंटर में सेपक टाकरा का प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां 2001-2002 में सेंटर मिला था।
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भारतीय सेपक टाकरा संघ के महासचिव योगेंद्र सिंह दहिया ने बताया कि एकेडमी का प्रस्ताव तैयार कर राज्यों को जमीन उपलब्ध कराने के लिए भेजा गया है। उन्होंने बताया कि सेपक टाकरा को बढ़ावा देने के लिए ही राष्ट्रीय स्कूल प्रतियोगिताओं में इस बार अंडर-19 के साथ अंडर-14 व 17 को भी शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि सभी विश्वविद्यालयों में सेपक टाकरा के लिए इंडोर स्टेडियम की व्यवस्था कराई जाएगी। प्रत्येक जोन में बीस-बीस यूनिवर्सिटीज के बीच जोनल प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी।
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कबड्डी के चक्कर में सेपक टाकरा को दिलाई पहचान
संघ के महासचिव योगेंद्र सिंह दहिया ने बताया कि 1982 के एशियन गेम्स में भारत कबड्डी को शामिल कराना चाहता था। वहीं चीन वुशू को और सिंगापुर, थाईलैंड व सिंगापुर मिलकर सेपक टाकरा को शामिल कराना चाहता था। तीनों देश ने मिलकर संयुक्त रूप से एक दूसरे के गेम्स को शामिल कराने की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैरवी की और 1982 में पहली बार इन गेम्स को एशियन गेम्स में शामिल किया गया। भारतीय टीमों ने भी सेपक टाकरा में हाथ आजमाए और मेडल हासिल किए। बरेली में साई सेंटर में सेपक टाकरा का प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां 2001-2002 में सेंटर मिला था।
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