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घर की आर्थिक स्थिति सुधरे, इसलिए भेजा था पुरोहिती सीखने...डूब गईं उम्मीदें

Sun, 12 Dec 2021 01:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 12 Dec 2021 01:33 AM IST
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The financial condition of the hous improved, so the priest was sent to learn
शुभम त्रिवेदी - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। आंध्र प्रदेश के गुंटूर में शुक्रवार की शाम कृष्णा नदी में नहाने गए वैदिक स्कूल के पांच छात्र डूब गए। इनमें से तीन खीरी के थे। एक छात्र फरधान और दो ईसानगर क्षेत्र के थे। एक परिवार के रिश्तेदार का कहना है कि कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण इन बच्चों के पिता ने इनका जीवन संवारने के लिये कलेजे पर पत्थर रखकर इतनी दूर भेजा था। लेकिन शनिवार का दिन उनके लिये मनहूस बनकर आया, जब उन्हें सूचना मिली कि उनके लाडले अब इस दुनिया में नहीं रहे।
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शनिवार को तीनों के परिवारों में मातम पसरा है। उनके घरों पर गांव वालों की भीड़ जुटी है। परिजन अपने जिगर के टुकड़ों का शव लेने के लिये रवाना हो चुके हैं। वहीं घर पर जुटे नाते-रिश्तेदार अन्य परिजन को सांत्वना दे रहे हैं। तीनों छात्र नितीश कुमार दीक्षित (15), हर्षित शुक्ला (15) और शुभम त्रिवेदी (17) अचमपेट मंडल के मडिपाडु में स्थित श्वेता श्रींगाचलम वैदिक स्कूल के विद्यार्थी थे। यहां देश के विभिन्न राज्यों से छात्र वैदिक शिक्षा के लिए आते हैं। वे नियमित रूप से वहां नदी में डुबकी लगाने जाते थे। लेकिन शुक्रवार को नदी में नहाते समय उनकी डूबने से मौत हो गई।
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पांच साल पहले हर्षित को पढ़ने भेजा था
फरधान। दस साल की उम्र में आंध्र प्रदेश में गुरुकुल में शिक्षा लेने गए मृतक हर्षित शुक्ल दो भाइयों में छोटा था। बड़े भाई का नाम रचित शुक्ल है। जबकि पिता राम नरेश छोटे किसान है और मध्यम वर्गीय परिवार में जीवन यापन करते है। ज्यादा खेती न होने के कारण राम शंकर शुक्ल अपने एक बेटे को यहीं पढ़ाकर घर का काम कराते थे। जबकि अपने छोटे पुत्र हर्षित शुक्ल को शास्त्र का ज्ञान दिलाने के लिए उसे आंध्र प्रदेश के गुरुकुल में शिक्षा लेने के लिये पांच साल पहले भेजा था। ख़बर मिलने पर परिवार हर्षित का शव लेने के लिये रवाना हो गया है। जबकि उसके घर में रात के अंधेरे में मातम पसरा है।
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फीस न लगने के कारण भेजा था गुरुकुल
नदी में डूबे ईसानगर थाना क्षेत्र के दो छात्र नितीश और शुभम आपस में ममेरे-फुफेरे भाई थे। थाना ईसानगर के ग्राम ढखिनिया निवासी नितीश तीन भाईयों में दूसरे नंबर पर था। पिता वींरेद्र दीक्षित छोटे किसान हैं। थोड़ी जोत से परिवार का गुजारा चलता है। परिवार के ही अनुपम दीक्षित बताते हैं कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण ही नितीश को इतनी दूर शास्र शिक्षा के लिये आंध्र प्रदेश भेजा गया था। वहां पर फीस नहीं पड़ती है, इसलिये नितीश को वहां भेजा गया था।

यही हाल मृतक शुभम त्रिवेदी के परिवार का है। ईसानगर थाना क्षेत्र के चकमूसेपुर निवासी अनिल त्रिवेदी के दो लड़कों में शुभम छोटा था। परिवार वाले बताते हैं कि खेती और मजदूरी ही सहारा है। शुभम और नितीश ममेरे-फुफेरे भाई थे। वीरेंद्र दीक्षित के अनिल त्रिवेदी साले हैं।

नितीश दीक्षित

नितीश दीक्षित- फोटो : LAKHIMPUR

गुरु के साथ हर्षित शुक्ला।

गुरु के साथ हर्षित शुक्ला।

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