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Bareilly News: प्रधानी रही न सभासद बनने का ख्वाब हुआ पूरा

Mon, 15 May 2023 02:37 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Mon, 15 May 2023 02:37 AM IST
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The dream of becoming a councilor has been fulfilled
आंवला। निकाय चुनाव से पहले दिसंबर 2022 में नगर पालिका परिषद का सीमा विस्तार किया गया। इसके तहत आसपास की तीन ग्राम पंचायतों के पांच गांवों को पालिका क्षेत्र में शामिल कर लिया गया। जिन ग्राम पंचायतों को पालिका में शामिल किया गया, उनके प्रधानों को दो वर्ष से भी कम पद पर रहने का मौका मिला। प्रधानी चली जाने के बाद इन्होंने निकाय चुनाव में सभासदी के लिए ताल ठोकी, लेकिन ये तीनों को ही हार का सामना करना पड़ा।
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पालिका सीमा विस्तार कराने में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने भी खूब जोर लगाया था। माना जा रहा है कि इसके पीछे भाजपा को सियासी लाभ पहुंचाना था। क्योंकि जिन तीन ग्राम पंचायतों को पालिका क्षेत्र में शामिल किया गया वो हिंदू बहुल हैं। यहां के तत्कालीन ग्राम प्रधानों को भाजपा ने निकाय चुनाव लड़ाने का न सिर्फ आश्वासन दिया था, बल्कि उन्हें सभासदी का टिकट भी दिया गया। लेकिन शनिवार को आए चुनाव परिणाम ने भाजपा की इस युक्ति पर पानी फेर दिया।
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क्षत्रिय बहुत ग्राम पंचायत नगरिया सतन की प्रधान रहीं गुड्डो देवी, मौर्य बहुत बेहटाजुनु की आरती मौर्य और अवादानपुर के लालमन मौर्य भाजपा के टिकट पर भी सभासदी का चुनाव हार गए। हिंदू बहुल इन गांवों में न सिर्फ इनके निर्दलीय प्रतिद्वंद्वियों ने जीत दर्ज की, बल्कि अध्यक्ष पद के सपा प्रत्याशी आबिद अली ने भी खूब वोट बटोरे। नतीजा यह रहा कि भाजपा को इन ग्राम पंचायतों से भी आशातीत लाभ नहीं मिला। अब यहां के लोग यही कह रहे हैं कि न तो इनकी प्रधानी बची और सभासदी भी जीत नहीं पाए।
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वैश्य वर्ग की उपेक्षा भी बनी भाजपा की हार की वजह
आंवला पालिका क्षेत्र में कुल 60 हजार 910 मतदाता हैं। इनमें करीब 32 हजार हिंदू आबादी है और करीब 28 हजार मुस्लिम आबादी। कस्बे में करीब छह हजार वैश्य वर्ग के मतदाता हैं। लेकिन भाजपा ने निवर्तमान पालिकाध्यक्ष संजीव सक्सेना काे मैदान उतारा। कायस्थ समाज के मतदाता तकरीबन आठ सौ ही हैं। प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि यदि भाजपा वैश्य समाज के व्यक्ति को अध्यक्ष पद पर लड़ाती तो बड़ी जीत होती, क्योंकि भाजपा का कैडर वोट वैश्य समाज ही माना जाता है।
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