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सुपर स्मार्टफोन का सपना हो सकता है सच!
बरेली।
Updated Fri, 14 Apr 2017 01:30 AM IST
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The dream of a super smartphone can be true!
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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अगर आपका स्मार्टफोन सुपर कंप्यूटर की तरह काम करने लगे, उसकी स्पीड कई सौ गुना बढ़ जाए, मोबाइल में हैवी सॉफ्टवेयर इंस्टाल कर आप सेकेंडों में हजारों की संख्या में डाटा एनालिसिस कर सकें, आप एक समय में कई काम कर सकें, सुनकर थोड़ी हैरानी जरूर होगी पर भविष्य में यह संभव हो सकता है क्योंकि वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक खोज ली हैै जिससे हाईस्पीड इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस तैयार किए जा सकते हैं। इसका नाम है टोपोलोजिकल इंसूलेटर। इस मैटेरियल से वैज्ञानिक हाईस्पीड इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जैसे कंप्यूटर और स्मार्टफोन तैयार करने की जुगत में लगे हैं। इससे डिवाइस की स्पीड एक हजार गुना तक बढ़ाई जा सकती है। जर्मनी की वुर्जबर्ग यूनिवर्सिटी बाबेरियरा के फिजिक्स विभाग के वैज्ञानिक इस रिसर्च में जुटे हैं और डाटा एनालिसिसि का जिम्मा रुहेलखंड विश्वविद्यालय के फिजिक्स के हेड डॉ. सुधीर को मिला है। डॉ. सुधीर पिछले छह माह से हाई परफार्मेंस कंप्यूटिंग मशीन (एचपीसी) की मदद मैटेरियल एनर्जी फंक्शन पर काम कर हैं। वह इलेक्ट्रान एनर्जी लॉस स्पेक्ट्रोस्कोपी यानी मैटेरियल कितनी एजर्नी अपने अंदर रोक सकता है उसपर रिसर्च कर रहे हैं। अबतक उन्होंने ऑप्टीकल प्रापर्टीज और डाइलेटिक फंक्शन पर काम किया है। रिजल्ट काफी अच्छे आए हैं।
इंटरनेशनल प्रोजेक्ट के लिए हो सकता है कोलाब्रेशन
डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि टोपोलोजिकल इंसूलेटर मैटेरियल की खोज हाल ही में हुई। अमेरिका के तीन वैज्ञानिकों को इसकी खोज के लिए नोबल पुरस्कार भी मिल चुका है। अब दुनिया भर के वैज्ञानिक इस मैटेरियल से हाईस्पीड इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस तैयार करने पर रिसर्च कर रहे हैं। वुर्जबर्ग यूनिवर्सिटी के साथ इस मैटेरियल पर इंटरनेशनल प्रोजेक्ट को लेकर कोलाब्रेशन की तैयारी है। ऐसा होता है तो रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
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इंटरनेशनल प्रोजेक्ट के लिए हो सकता है कोलाब्रेशन
डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि टोपोलोजिकल इंसूलेटर मैटेरियल की खोज हाल ही में हुई। अमेरिका के तीन वैज्ञानिकों को इसकी खोज के लिए नोबल पुरस्कार भी मिल चुका है। अब दुनिया भर के वैज्ञानिक इस मैटेरियल से हाईस्पीड इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस तैयार करने पर रिसर्च कर रहे हैं। वुर्जबर्ग यूनिवर्सिटी के साथ इस मैटेरियल पर इंटरनेशनल प्रोजेक्ट को लेकर कोलाब्रेशन की तैयारी है। ऐसा होता है तो रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
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