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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   The door will not open without calling Gabbar and the phone will not

गब्बर को फोन किए बगैर दरवाजा खुलेगा नहीं और फोन लगेगा नहीं

Mon, 18 Dec 2017 01:42 AM IST
बरेली
बरेली Updated Mon, 18 Dec 2017 01:42 AM IST
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ठंड लगातार मारक होती जा रही है। दिन तो जैसे-तैसे कट जाता है लेकिन रात में सर्द हवाएं हड्डियों में भी सिहरन पैदा करती महसूस होती हैं। ऐसे में शहर के रैन बसरों का बुरा हाल है। बाकरगंज के रैन बसेरे का गेट तो वहां के चौकीदार गब्बर की इजाजत के बगैर खुलता ही नहीं है। मुसाफिर घंटों दरवाजा पीटते रहें लेकिन अंदर मौजूद लोग तब तक दरवाजा नहीं खोलते जब तक गब्बर उन्हें अनुमति न दे। रात सवा ग्यारह बजे रैन बसेरे का गेट खुलवाने की कोशिश की गई तो अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। बाहर गब्बर का नाम लिखा है, उसके नंबर पर फोन करने पर ही दरवाजा खुलता है। अमर उजाला की टीम ने गब्बर का फोन मिलाने की कोशिश की, लेकिन नंबर ही नहीं लगा। यह समझने के लिए काफी है कि कड़ाके की सर्दी में रैन बसेरे मेें रात गुजारनी है तो शाम होते ही वहां पहुंचना होगा। अगर देर हो गई तो फिर गेट नहीं खुलेगा।
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सड़कों और ठेलों पर काट रहे सर्द रातें
चौपुला पुल और उसके पास ही स्थित यात्री शेड में भी लोग ठंड की रात काटते मिले। जिनके पास बिस्तर थे, वे ठेलों पर लेटे थे और जिनके पास बिस्तर नहीं थे, वे यात्री शेड में दुबके बैठे थे। यहां अलाव का भी इंतजाम नहीं था।
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11:20 बजे- सिटी स्टेशन
यहां रैन बसेरे का कोई इंतजाम नहीं है। यात्री और रिक्शा चालक यहां टिकट काउंटर के बाहर बरामदे को ही रैन बसेरा बनाए हैं। उनके पास अपने रजाई-गद्दे हैं और जिनके पास नहीं हैं, वह सर्दी में ठिठुर रहे हैं। कुछ रजाइयों में दो-दो लोग लेटे हैं। कुछ ऐसे लोग भी नजर आए जिनके पास रात में ठंड से बचने का कोई इंतजाम नहीं है तो मजबूरन कोनों में दुबके बैठे हैं।
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11: 40 बजे -जंक्शन
इस साल यहां भी रैन बसेरे की व्यवस्था नहीं की गई है। हालांकि हर साल सर्दी के मौसम में यहां रैन बसेरा बनाया जाता है। यात्री और आसपास के लोग वेटिंग हाल, पुल और पेड़ों के नीचे पनाह लिए हैं। कहीं कंबल में पूरा परिवार दुबका नजर आया तो कुछ लोग पुल के नीचे ऐसे ही लेटे नजर आए। वेटिंग रूम में एक किशोर को जब कुछ नहीं मिला तो वह ठंडे फर्श पर ही रात गुजारने को लेट गया।

12:00 बजे-अयूब खां चौराहा
यहां रैन बसेरा में व्यवस्थाएं लगभग ठीकठाक हैं, लेकिन लेटने के लिए तख्त की कमी है। इसकी वजह से कुछ लोग जमीन पर ही बिस्तर लगाकर लेटे मिले। 
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