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Bareilly News: सजा का अपीलीय आदेश दाखिल न करने पर कोर्ट ने भेजा जेल
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नवाबगंज। तहसील की मुंसिफ कोर्ट ने कस्बे के एक व्यक्ति को कोर्ट में अपीलीय आदेश दाखिल न किए जाने पर वारंट जारी कर जेल भेज दिया।
श्रीकृष्ण गुप्ता ने कस्बे की गुलशनगर बस्ती के सत्यवीर से वर्ष 2019 में दुकान खरीदी थी, जिसमें श्रीकृष्ण गुप्ता ने अधिकांश धनराशि नकद दे दी थी और एक लाख 17 हजार का चेक दे दिया था, जो बैंक से बाउंस हो गया था। सत्यवीर ने अपने अधिवक्ता राजीव गंगवार के माध्यम से चेक बाउंस होने का एक मुकदमा मुंसिफ कोर्ट में धारा 138 एनआई एक्ट के तहत दायर किया था, जिसमें दोनों ही पक्षों की ओर से हुई बहस के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट अमरनाथ ने सत्यवीर को एक लाख 57, 401 रुपये अदा करने के आदेश दिए थे। बताया जाता है कि इस आदेश को लेकर आरोपी ने न तो किसी कोर्ट में चुनौती दी और न ही आदेश के अनुसार धनराशि ही अदा की।
कुर्की के बाद आरोपी ने वादी की धनराशि अदा कर दी, लेकिन मुंसिफ कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील किसी कोर्ट में नहीं की। मंगलवार को श्रीकृष्ण गुप्ता मुंसिफ कोर्ट में हाजिर हुए थे, जिस पर उनके अधिवक्ता ने उनकी जमानत दिए जाने की याचना की थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी ने न तो अपीलीय आदेश कोर्ट में दाखिल किया और न ही अपील की अवधि में कोर्ट के समक्ष आत्म समर्पण किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट अमरनाथ ने जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया। साथ ही आरोपी को हिरासत में लेकर 45 दिन के लिए सजायावी वारंट तैयार कर जेल भेज दिया। संवाद
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श्रीकृष्ण गुप्ता ने कस्बे की गुलशनगर बस्ती के सत्यवीर से वर्ष 2019 में दुकान खरीदी थी, जिसमें श्रीकृष्ण गुप्ता ने अधिकांश धनराशि नकद दे दी थी और एक लाख 17 हजार का चेक दे दिया था, जो बैंक से बाउंस हो गया था। सत्यवीर ने अपने अधिवक्ता राजीव गंगवार के माध्यम से चेक बाउंस होने का एक मुकदमा मुंसिफ कोर्ट में धारा 138 एनआई एक्ट के तहत दायर किया था, जिसमें दोनों ही पक्षों की ओर से हुई बहस के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट अमरनाथ ने सत्यवीर को एक लाख 57, 401 रुपये अदा करने के आदेश दिए थे। बताया जाता है कि इस आदेश को लेकर आरोपी ने न तो किसी कोर्ट में चुनौती दी और न ही आदेश के अनुसार धनराशि ही अदा की।
कुर्की के बाद आरोपी ने वादी की धनराशि अदा कर दी, लेकिन मुंसिफ कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील किसी कोर्ट में नहीं की। मंगलवार को श्रीकृष्ण गुप्ता मुंसिफ कोर्ट में हाजिर हुए थे, जिस पर उनके अधिवक्ता ने उनकी जमानत दिए जाने की याचना की थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी ने न तो अपीलीय आदेश कोर्ट में दाखिल किया और न ही अपील की अवधि में कोर्ट के समक्ष आत्म समर्पण किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट अमरनाथ ने जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया। साथ ही आरोपी को हिरासत में लेकर 45 दिन के लिए सजायावी वारंट तैयार कर जेल भेज दिया। संवाद
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