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Bareilly News: अदालतों के अहम फैसले तोड़ते रहे अपराधियों के हौसले

Wed, 01 Jan 2025 02:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jan 2025 02:24 AM IST
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The courage of criminals kept breaking important decisions of the courts.
बरेली। इस साल स्थानीय अदालतों के कई फैसले नजीर बने। इससे जहां अपराधियों के हौसले पस्त हुए, वहीं जेल में बंद निर्दोष लोगों को न्याय भी मिला। कई मामलों में कोर्ट की टिप्पणियों ने देश-विदेश में सुर्खियां बटोरीं। लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा और मजबूत हुआ। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम रवि कुमार दिवाकर अपने फैसलों को लेकर सालभर सुर्खियों में रहे। इस दौरान उनको धमकियां भी मिलीं। अन्य न्यायालयों ने भी कई महत्वपूर्ण मामलों में अहम फैसले दिए।
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सितंबर : लव जिहाद पर टिप्पणी, पाकिस्तान और बांग्लादेश का जिक्र
अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने धार्मिक पहचान छिपाकर शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म और धर्मांतरण का दबाव बनाने के मामले में आलिम को उम्रकैद और उसके पिता को दो साल कैद की सजा सुनाते हुए तल्ख टिप्पणी की। लव जिहाद पर कानून बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ भी की। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि धर्मांतरण का उद्देश्य भारत में पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी स्थितियां पैदा करना है। अवैध धर्मांतरण देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा है। इसमें विदेशी फंडिंग की आशंका जताते हुए अदालत ने कहा कि अगर इस मुद्दे को समय रहते हल नहीं किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। इसे देश के खिलाफ जनसांख्यिकीय युद्ध छेड़ने की अंतरराष्ट्रीय साजिश बताया।
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दिसंबर : पिता-पुत्र को फांसी, राम-भरत प्रसंग का जिक्र
अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने नवंबर 2014 में संपत्ति विवाद को लेकर की गई चरन सिंह की हत्या के मामले में उसके भाई रघुवीर सिंह और रघुवीर के बेटे तेजपाल सिंह को फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने इस प्रकरण में रामायण के प्रसंग का जिक्र किया। कहा कि भगवान श्री राम के वनगमन के बाद उनके भाई भरत ने सिंहासन लेने से मना कर दिया था। तुमने तो संपत्ति के लिए अपने भाई को मार डाला। ऐसे लोगों को कोर्ट से कोई राहत नहीं दी जा सकती।
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मार्च : वर्ष 2010 के दंगों में तौकीर को माना मास्टरमाइंड, अफसरों की भूमिका पर सवाल
वर्ष 2010 में बरेली में हुए दंगों के मामले में सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा को दंगों का मास्टरमाइंड माना। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि तत्कालीन एसएसपी, डीआईजी, आईजी, कमिश्नर और डीएम ने सत्ता के इशारे पर काम किया। मार्च 2010 में बरेली में दंगा भड़काने के मामले में मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद उनका नाम चार्जशीट में शामिल नहीं किया गया। अधिकारियों ने दंगे के आरोपी और मुख्य सरगना मौलाना तौकीर रजा खां का सहयोग किया। कोर्ट का फैसला आने के बाद कई दिनों तक शहर का माहौल गरम रहा। मार्च 2024 में कोर्ट का यह आदेश आने के बाद तौकीर को हाईकोर्ट की शरण में जाना पड़ा था। बाद में मामले की सुनवाई जिला जज अदालत में स्थानांतरित कर दी गई।



बच्ची से दुष्कर्म में पहली बार आरोपी का लिंग निर्धारण, किन्नर को सजा
आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में स्पेशल जज पाॅक्सो एक्ट न्यायालय संख्या तीन उमाशंकर कहार ने एसजीपीजीआई की लिंग निर्धारण रिपोर्ट के आधार पर फरीद किन्नर को 20 साल कैद और जुर्माने की सजा सुनाई। नौ दिसंबर को आए कोर्ट के इस फैसले पर तमाम लोगों को हैरानी हुई। पहली बार कोर्ट ने दुष्कर्म में किसी किन्नर को सजा सुनाई। मार्च 2022 को फरीद नाम के युवक ने आठ साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। वह खुद को जन्मजात महिला किन्नर बताते हुए सभी को गुमराह करता रहा। कोर्ट ने एसजीपीजीआई में लिंग परीक्षण कराया तो पता चला कि वह पुरुष है।



आठ डकैतों को फांसी, सराफा व्यापारी को उम्रकैद
स्पेशल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट रवि कुमार दिवाकर ने सात मार्च को तीन लोगों की हत्या और डकैती के मामले में आठ दोषियों को फांसी और एक सराफा व्यापारी को उम्रकैद की सजा सुनाई। यह मामला भी सुर्खियों में रहा। दोषियों में छैमार गिरोह की दो महिलाएं भी शामिल हैं। डकैतों ने 10 साल पहले आयकर निरीक्षक के भाई-भाभी और मां की हत्या कर डाका डाला था। शाहजहांपुर का सराफा व्यापारी छैमार गिरोह से लूट का माल खरीदता था। सराफा व्यापारी से मिली डायरी ने ही इस कांड से पर्दा उठाया था।
नवविवाहिता की हत्या, पिता और दो बहनोइयों समेत पांच को उम्रकैद
बेटी की जबरन शादी कराने के बाद पिता 24 अप्रैल 2023 को अपने पांच रिश्तेदारों के साथ उसे ससुराल से विदा करा लाया। रास्ते में उसको मारकर शव झाड़ियों में फेंक दिया, लेकिन उसमें जान बाकी थी। दो दिन अस्पताल में रहने के बाद उसने दम तोड़ दिया। विवेचना के दौरान सर्विलांस, सीसीटीवी कैमरों की मदद से पता चला कि तोताराम ने अपने दामाद दिनेश, छेदालाल और रिश्तेदार पप्पू व खूबकरन के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया था। तमंचे के बल पर पिता ने शादी कराई थी। शादी के दो दिन बाद ही ससुराल से विदा करा लाया और घर जाते समय रास्ते में मरणासन्न कर छोड़ दिया। स्पेशल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

सितंबर : दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और अश्लील वीडियो, आरोपी दोष मुक्त
अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने सितंबर में दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और अश्लील वीडियो वायरल करने के मामले में दो आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। आरोप लगाने वाली महिला पर एक हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। असत्य तथ्यों पर चार्जशीट दाखिल करने पर कोर्ट ने कहा कि विवेचक लिपिक की तरह काम न करें। सीओ की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। शीशगढ़ थाना क्षेत्र की महिला ने 26 अक्तूबर 2023 को परिचित श्रवण और गुड्डू पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि 15 अगस्त 2022 को श्रवण ने उसे सूचना दी कि उसके पति का एक्सीडेंट हो गया है। वह गांव के बाहर रोड पर पहुंची तो वहां श्रवण और गुड्डू मिले। गुड्डू ने उसके हाथ से मोबाइल फोन ले लिया और कहा कि वह उसके पति को ढूंढ रहे हैं। इसके बाद दोनों उसको खेत में ले गए और बारी-बारी से दुष्कर्म किया। उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।

मई : दुष्कर्म के आरोप में जितने दिन जेल में रहा युवक, बयान से मुकरने वाली युवती उतने दिन की सजा
अपर सेशन जज 14 ज्ञानेंद्र त्रिपाठी का दुष्कर्म का आरोप लगाकर बाद में बयान से मुकरने वाली युवती को 1653 दिनों की जेल और 5.88 लाख रुपये जुर्माने संबंधी फैसला भी सुर्खियों में रहा। कोर्ट ने मई में यह फैसला सुनाया। यह फैसला दुष्कर्म के झूठे मामलों में फंसाने वाली युवतियों-महिलाओं के लिए सबक तो ऐसे मामलों में जेल में बंद निर्दोषों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया। कोर्ट ने आरोपी युवक अजय उर्फ राघव को बाइज्जत बरी कर दिया। अजय 1653 दिल में रहा था। कोर्ट ने फैसले में कहा कि अगर अजय जेल से बाहर रहता और मजदूरी भी करता तो इतने समय में 5.88 लाख रुपये से ज्यादा कमा लेता। इतने रुपये का ही जुर्माना युवती पर लगाया गया। संवाद न्यूज एजेंसी

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शाहजहांपुर : डीएनए ने दी गवाही, दुष्कर्म से जन्मा बेटा, दोषियों को 30 साल बाद सजा

शाहजहांपुर में 12 वर्ष की उम्र में दो सगे भाइयों की दरिंदगी का शिकार हुई किशोरी ने 27 साल बाद इंसाफ की गुहार लगाई। अदालत ने दोनों भाइयों को दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। वर्ष 1994 में सदर बाजार क्षेत्र के मोहल्ला महमंद जलालनगर निवासी नकी हसन और उसके भाई गुड्डू ने घर में घुसकर किशोरी से दुष्कर्म किया था। इससे वह गर्भवती हो गई थी, पर परिवार वाले दरिंदों के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा सके थे। दुष्कर्म के बाद जन्मे बेटे को भी एक रिश्तेदार को सौंप दिया। बड़े होकर उसी बेटे ने मां की तलाश की। उसने हौसला दिया तो पीड़िता ने पांच मार्च 2021 को सदर बाजार थाने में दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज करवाई। बेटे का डीएनए एक आरोपी से मिला तो दुष्कर्म की पुष्टि हुई। 22 मई 2024 को अदालत ने दोनों दोषियों को दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।



शाहजहांपुर : पुलिस चौकी में रिक्शा चालक को पीटकर मार डाला था...तीन सिपाहियों को उम्रकैद

शाहजहांपुर। 24-25 अगस्त 1999 की रात चोरी के शक में सदर बाजार थाना क्षेत्र की कैंट चौकी के अंदर पुलिसकर्मियों ने रिक्शा चालक की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। 27 जनवरी 2024 को अदालत ने दोषी तीन सिपाहियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीन पुलिसकर्मियों में सैय्यद अली, शिव कुमार शुक्ला सेवानिवृत्त हो चुके थे। सिपाही अरविंद कुमार शुक्ला उन्नाव में तैनात था। मोहल्ला एमनजई जलालनगर निवासी लियाकत ने अपने ममेरे भाई मंगल शाह की कैंट चौकी में हत्या किए जाने की रिपोर्ट सदर बाजार थाने में दर्ज कराई थी। संवाद
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