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दावेदार अड़े, अब प्रदेश अध्यक्ष के सामने होगी पंचायत

Thu, 11 Mar 2021 11:59 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 11 Mar 2021 11:59 PM IST
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The claimant adamant, now the Panchayat will be in front of the state president
amar ujala news - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

उपनिवेशन संघ के अध्यक्ष के दावेदार एक-दूसरे पर लगा रहे आरोप
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आज प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के सामने रखा जाएगा मामला
समझौता न हुआ तो तीसरा उम्मीदवार आएगा सामने

लखीमपुर खीरी। खीरी-पीलीभीत उपनिवेशन संघ चुनाव में अध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर हुए बवाल से सियासत का गलियारा अभी गरम है। दावेदार एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप मढ़ रहे हैं। आम कार्यकर्ताओं की निगाह आज प्रदेश की पंचायत पर लगी हुई। प्रदेश अध्यक्ष घोषित तौर पर चौपाल कार्यक्रम में आ रहे हैं।
संपूर्णानगर में नौ मार्च को हुए बवाल के बाद जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह ने उपनिवेशन संघ के चुनाव को
निरस्त कर दिया था। इसके बाद अब कार्यकर्ताओं में बेचैनी है कि आगे क्या होगा। भाजपा के जिला प्रवक्ता रमेश चंद्र मिश्र बताते हैं कि आगे का हाल जानने के लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं के इस कदर फोन आ रहे हैं कि उनको खुद अब जवाब देना मुश्किल हो गया है कि चुनाव कब होगा। इधर दोनो दावेदार उमाशंकर मिश्रा और धीरेंद्र शुक्ला पक्ष एक-दूसरे की दावेदारी को खारिज करने में जुटा है।
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उपनिवेशन संघ के संचालक व अध्यक्ष पद की दावेदारी करने वाले धीरेंद्र शुक्ला के चाचा और तीन टर्म उपनिवेशन संघ के अध्यक्ष रह चुके वीरेंद्र शुक्ला बताते हैं कि संचालक पद के नामांकन से पहले वह जिलाध्यक्ष सुनील सिंह से मिलने गए थे। उनके कहने पर ही धीरेंद्र, सुखविंदर और खुद अपने को संचालक पद के लिये नामांकित किया था। एकल नामांकन से वह तीनों संचालक हो गए। लेकिन इसके बाद जिलाध्यक्ष ने उन्हें विश्वास में नहीं लिया। आगे चुनाव पर कोई चर्चा ही नहीं की। उन्होंने दावा किया कि उमाशंकर मिश्रा का नाम प्रस्तावित नहीं था। अवध क्षेत्र के भाजपा अध्यक्ष ने भी कहा कि जिला स्तर से यह तय होता है। वह आज आ रहे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मिलकर पूरा मामला उनके सामने रखेंगे।
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उधर, जिलाध्यक्ष सुनील सिंह का दावा है कि प्रदेश स्तर से उमाशंकर मिश्रा का नाम प्रस्तावित था। उमाशंकर मिश्रा ने आरोप लगाया कि विपक्षी पक्ष भाजपा में ही नहीं है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश अध्यक्ष जी जो कहेंगे वह मानेंगे, वो कहेंगे समझौता तो समझौता होगा, वो कहेंगे मुकदमा होगा तो मुकदमा लड़ेंगे।

विवादों में मंत्री के दामाद भी, गोला से विधायकी के इच्छुक

जानकार बताते हैं कि पूरे विवाद की शुरुआत उसी वक्त हो गई थी, जब भाजपा के एक पूर्व जिला महामंत्री को संचालक मंडल में भी जगह नही मिली। वह उत्तर प्रदेश सरकार में एक मंत्री के दामाद हैं। उनकी जगह जिलाध्यक्ष गुट की तरफ से उमाशंकर मिश्रा का नाम प्रस्तावित किया गया। जिस पर वीरेंद्र शुक्ला गुट जो कि खीरी सांसद अजय मिश्र टेनी के साले हैं, वह सहमत नहीं थे। इसलिये उन्होंने अपने भतीजे धीरेंद्र शुक्ला को अध्यक्ष पद की दावेदारी के लिये आगे किया। हालांकि पूरे विवाद के दौरान हरिद्वार में रहे पूर्व पदाधिकारी का कहना है कि उन्हें छोटे चुनावों में कोई दिलचस्पी नहीं। वह हरिद्वार से एक दिन पहले ही लौटे हैं। गोला से विधायकी लड़ने की इच्छा रखते हैं।
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