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Bareilly News: अगले माह 10 और नाइजीरियाई छात्र पढ़ने के लिए आ सकते हैं रुविवि
Mon, 17 Aug 2026 01:47 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Mon, 17 Aug 2026 01:47 AM IST
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय (रुविवि) में इस वर्ष भी करीब 10 नाइजीरियाई छात्र रुविवि में प्रवेश ले सकते हैं। डायरेक्ट्रेट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशन की ओर से नाइजीरियाई छात्रों को प्रवेश देने पर विचार किया जा रहा है। वहीं, पीएचडी में भी भूटान के दो शोधार्थियों ने रुचि दिखाई है।
रुविवि में अब तक सर्वाधिक संख्या में 29 नाइजीरियाई विद्यार्थियों ने इंजीनियरिंग, एमएससी, जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया है। 25 नेपाली छात्रों ने भी पीएचडी में प्रवेश लिया। इस वर्ष नेपाल के चार छात्रों ने अपनी पीएचडी पूरी की। एक नाइजीरियाई छात्र ने अपनी दो वर्षीय परास्नातक डिग्री पूरी की है।
मीडिया सेल के अनुसार, अधिकांश विदेशी छात्रों की रुचि तकनीकी या स्वास्थ्य सेक्टर जैसे बीफार्मा, नर्सिंग, फार्मेसी, मेडिकल व पैरामेडिकल के भी विभिन्न डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में होती है। ये कोर्स यूजीसी से बाहर होने की वजह से इनमें सीधा प्रवेश नहीं मिल पाता। मेडिकल के कई कोर्स विवि में उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, फार्मेसी व एजुकेशन में कैंपस में सीमित सीटें ही उपलब्ध हैं।
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ऐसे में विदेशी छात्रों को प्रवेश देने के लिए डीआईआर नए नियम बना रहा है, ताकि संबद्ध कॉलेजों में भी दाखिला दिया जा सके। मीडिया सेल के मुताबिक, जल्द नए नियमों को कुलपति की ओर से स्वीकृति मिल सकती है।
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रुविवि में अब तक सर्वाधिक संख्या में 29 नाइजीरियाई विद्यार्थियों ने इंजीनियरिंग, एमएससी, जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया है। 25 नेपाली छात्रों ने भी पीएचडी में प्रवेश लिया। इस वर्ष नेपाल के चार छात्रों ने अपनी पीएचडी पूरी की। एक नाइजीरियाई छात्र ने अपनी दो वर्षीय परास्नातक डिग्री पूरी की है।
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मीडिया सेल के अनुसार, अधिकांश विदेशी छात्रों की रुचि तकनीकी या स्वास्थ्य सेक्टर जैसे बीफार्मा, नर्सिंग, फार्मेसी, मेडिकल व पैरामेडिकल के भी विभिन्न डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में होती है। ये कोर्स यूजीसी से बाहर होने की वजह से इनमें सीधा प्रवेश नहीं मिल पाता। मेडिकल के कई कोर्स विवि में उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, फार्मेसी व एजुकेशन में कैंपस में सीमित सीटें ही उपलब्ध हैं।
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ऐसे में विदेशी छात्रों को प्रवेश देने के लिए डीआईआर नए नियम बना रहा है, ताकि संबद्ध कॉलेजों में भी दाखिला दिया जा सके। मीडिया सेल के मुताबिक, जल्द नए नियमों को कुलपति की ओर से स्वीकृति मिल सकती है।