रामलीला मंचन: बरेली में बेटियां ही सीता और राम, त्रेता के आदर्श को मंच पर करेंगी जीवंत
बरेली में उत्तराखंड समाज और सदर बाजार की रामलीला में बेटियों के हाथ में बागडोर होगी। बेटियां रामलीला में विभिन्न किरदार निभाएंगी। इसे लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं।
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मर्यादा और शौर्य के प्रतीकों को पुरुषों की छवि में ढला माना जाता था, मगर अब बरेली की बेटियां अपने अभिनय से इतिहास रच रही हैं। दशकों का इतिहास समेटे शहर की रामलीला समितियां त्रेतायुग की गाथा के मंचन के जरिये बेटियों के सामर्थ्य, संस्कार और पंखों को मिल रही उड़ान का उत्सव भी मना रही हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का तेज, लक्ष्मण का स्वाभिमान, भरत का निश्छल प्रेम और सीता के त्याग के जरिये बेटियां मंच से अधर्म के खिलाफ हुंकार भरेंगी।
गोस्वामी तुलसीदास ने भी रामचरित मानस के बालकांड के मंगलाचरण में देवी सीता (नारी शक्ति) की महिमा का वर्णन करते हुए लिखा है-
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम।
सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम॥
अर्थात, जो उत्पत्ति, पालन और संहार करने वाली, दुखों को हरने वाली और संपूर्ण कल्याण करने वाली हैं, उन श्रीरामचंद्रजी की प्रियतमा देवी सीता को मैं नमन करता हूं।
प्रज्ञा कांडपाल निभाएंगी राम का किरदार
चार दशक से धर्म पताका उठाए उत्तराखंड सांस्कृतिक समाज और दशकों पुरानी सदर बाजार के रामलीला नाटक समाज की रामलीलाओं में बेटियां मंच संभालकर धर्म और समाज को नई दिशा देंगी। राजेंद्रनगर में होने वाली उत्तराखंड समाज की रामलीला में छात्रा प्रज्ञा कांडपाल इस बार मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का किरदार निभाकर समाज को पौरुष और कर्तव्यपरायणता की नई परिभाषा सिखाएंगी। सीता के रूप में दिव्यांशी जोशी और बरेली कॉलेज की छात्रा वसुंधरा सागर बेटियों के स्वाभिमान और त्याग को मंच पर जीवंत करेंगी।
सदर बाजार की रामलीला में कौशल्या, सुमित्रा और उर्मिला के ममतामयी किरदारों से लेकर कैकई और तारा की जटिल भूमिकाओं तक हर रूप में छात्राएं ही अपनी अभिनय कला का जौहर दिखाएंगी। अनुष्का, इच्छा ठाकुर, शिवन्या ठाकुर और कुमकुम जैसी बेटियां मंच पर उतरकर यह संदेश देंगी कि जब बात संस्कृति और धर्म की रक्षा की आती है, तो वह किसी भी मायने में पीछे नहीं हैं।
इस पहल के पीछे आयोजकों की सोच बेहद गहरी और दूरगामी है। उनका मानना है कि बेटियां सिर्फ कोमलता की प्रतीक नहीं हैं। जब वे राम के पौरुष, सत्य के मार्ग पर चलने के साहस और मर्यादा को अपने भीतर उतरते हुए महसूस करेंगी तो यह केवल एक रात का अभिनय नहीं होगा। यह सीख उनके जीवन में रचेगी-बसेगी।
अभ्यास में भी गुनगुना रहीं हैं मानस की चौपाइयां
रामलीलाओं का मंचन चार-पांच अक्तूबर से शुरू होगा। इससे पहले बेटियों ने राम, भरत और सीता के किरदार निभाने के लिए अभिनय का अभ्यास शुरू कर दिया है। अभ्यास में जब बेटियां इन महान पात्रों का मुकुट धारण कर मंच पर उतर रही हैं तो हर संवाद में नारी शक्ति का गौरव गुंजायमान हो रहा है।
उत्तराखंड सांस्कृतिक समाज की रामलीला में भगवान राम के किरदार को जीवंत करने का अभ्यास कर रहीं प्रज्ञा कांडपाल का कहना है कि दिन में पढ़ाई के बाद शाम को पूर्वाभ्यास में जुट जाती हूं। रामलीला में मंचन के लिए भगवान राम का चरित्र भी पढ़ रही हूं। अब परिवार में रामचरित मानस पर चर्चा भी होती है।
परिवार को संस्कार से सींचती हैं बेटियां
उत्तराखंड सांस्कृतिक समाज के अध्यक्ष गणेश दत्त अमोला का कहना है कि एक बेटी जब राम का आदर्श सीखती है तो वह केवल स्वयं को सशक्त नहीं बनाती, बल्कि एक बेटी, बहन और आगे चलकर मां के रूप में अपने पूरे परिवार को मर्यादा और संस्कारों से सींचती है। जब बेटियां राम के पौरुष और सामर्थ्य का पाठ पढ़ेंगी तो पूरा समाज अपने आप चरित्रवान बनेगा।
हर क्षेत्र में पा रहीं बराबरी का हक
सदर बाजार के रामलीला नाटक समाज के प्रमुख सतीश मेहता कहते हैं कि आज के दौर में बेटियां हर क्षेत्र में बराबरी का हक पा रही हैं। दर्शक बालिकाओं को श्रीराम की वेशभूषा में अधर्म पर विजय पाते देखेंगे तो यह दृश्य हर माता-पिता को अपनी बेटियों पर गर्व करने का हौसला देगा।