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रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल हुआ तीन तलाक कानून

Fri, 20 Sep 2019 01:53 AM IST
बरेली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Fri, 20 Sep 2019 01:53 AM IST
सार

  • एलएलबी और एलएलएम में इसी सत्र से शुरू होगी पढ़ाई
  •  रिसर्च कराकर सरकार को भेजे जाएंगे परिणाम
  • आला हजरत खानदान की बहू रहीं निदा खान का प्रकरण भी केस स्टडी के लिए पाठ्यक्रम में शामिल

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triple talaq will be included in course curriculum of Rohilkhand University
रुहेलखंड विश्वविद्यालय - फोटो : सोशल नेटवर्क

विस्तार

तीन तलाक कानून बनने के बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने इसे अपने विधि के छात्रों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है। विश्वविद्यालय ने इसी सत्र से तीन तलाक कानून पर पढ़ाई के साथ इस पर रिसर्च कराने के बाद उसके परिणाम सरकार को भेजने का भी फैसला लिया है, ताकि इस कानून में जरूरी संशोधन कर उसे और ज्यादा बेहतर बनाया जा सके।

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एजुकेशन काउंसिल की बैठक में मंजूरी मिलने के बाद तीन तलाक कानून को रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय में विधि विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित सिंह के मुताबिक एलएलबी, एलएलएम और पीएचडी के छात्र-छात्राएं अब तीन तलाक पर सिर्फ पढ़ाई नहीं रिसर्च भी करेंगे।
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पढ़ाई के लिए 1986 में हुए शाहबानो केस से लेकर 2018 में हुए नूर सबा खातून तक देश भर के 16 चर्चित मामले इसमें शामिल किए गए हैं जिन पर कोर्ट का निर्णय आ चुका है। केस स्टडी के लिए बरेली में आला हजरत खानदान की बहू रहीं निदा खान का प्रकरण भी शामिल किया गया है। साथ ही तीन तलाक कानून लागू होने के बाद बरेली में दर्ज हुए तीन और ऐसे मुकदमे भी केस स्टडी में शामिल किए गए हैं जिनमें अभी पुलिस विवेचना चल रही है।
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कानून के बाद कितने बदले हालात.. होगा शोध

तीन तलाक कानून आने से पहले देश में मुस्लिम महिलाओं की क्या स्थिति थी और इस कानून के बाद उनकी दशा में क्या बदलाव आया है, पीएचडी और एलएलएम में इस विषय पर शोध किए जाएंगे। इस शोध के परिणाम मई 2020 तक सरकार को भेजे जाएंगे ताकि इस कानून और मजबूत बनाया जा सके। डॉ. अमित सिंह का कहना है कि तीन तलाक कानून लागू होने के बावजूद लगातार इसके मामले सामने आ रहे हैं इसलिए अभी इस कानून पर काम होना जरूरी है।

निदा प्रकरण

शाहदाना में रहने वाली निदा खान का निकाह 18 फरवरी 2015 को दरगाह आला हजरत खानदान के शीरान रजा खां से हुआ था। मुकदमे के मुताबिक ससुराल वालों ने दहेज के लिए उनका उत्पीड़न किया और 16 जुलाई 2015 को गर्भवती होने के बावजूद मारपीट कर बाहर निकाल दिया। इस मारपीट में उनका गर्भपात तक हो गया।


इस मामले में कोर्ट ने निदा को दिए गए तीन तलाक को अमान्य ठहराते हुए शीरान रजा के खिलाफ चल रहे घरेलू हिंसा के मामले को जारी रखने के आदेश दिए थे। इसके साथ आला हजरत खानदान की बहू होने के नाते निदा खान के तीन तलाक प्रकरण को पाठ्यक्रम में केस स्टडी के तौर पर शामिल किया जाएगा।

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