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पंजाब-महाराष्ट्र से सबक लीजिए जहां लॉकडाउन विफल हुआ तो कर्फ्यू लगा

Fri, 27 Mar 2020 11:51 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2020 11:51 PM IST
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Take a lesson from Punjab-Maharashtra where lockdown failed, curfew imposed
श्यामगंज अनाज मंडी में लोगों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

तमाम लोग अभी खतरे से आगाह नहीं, आपस में नहीं रख रहे हैं दूरी
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कर्फ्यू लगा तो अर्द्धसैनिक बलों के हाथों में भी आ सकती है कमान

बरेली। जनता कर्फ्यू और फिर लॉक डाउन के पहले ही दिन ने बता दिया कि कुछ लोग समझकर भी नहीं समझ रहे हैं कि आने वाला खतरा कितना बड़ा है। ये लोग पंजाब और महाराष्ट्र से भी सबक नहीं ले रहे हैं जहां लॉक डाउन विफल होने के बाद ही कर्फ्यू लगाया गया है। यही हालात अब बरेली में दिख रहे हैं। लोग खुद जागरूकता दिखाने को तैयार नहीं हैं और समझाबुझाकर हारा प्रशासन भी आखिरी विकल्प कर्फ्यू को ही मान रहा है।
दुनिया भर में कोरोना के कहर में सबसे महत्वपूर्ण आपस में दूरी बनाए रखना है। लॉक डाउन की घोषणा इसी के मद्देनजर की गई है। सरकार का मानना है कि लॉक डाउन के जरिये सामाजिक दूरी बनाने में मदद मिलेगी। लोग घरों में रहेंगे और वायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जा सकेगा लेकिन लोग लगातार इसका उल्लंघन कर रहे हैं। भविष्य की उन मुश्किलों को भी नजरअंदाज कर रहे हैं जो कर्फ्यू लगने के बाद प्रशासन की सख्ती के तौर पर उनके सामने आएंगी। जाहिर है कि ऐसे में चंद लोगों की बेपरवाही का खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ेगा.
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लॉक डाउन

लॉक डाउन को आमतौर पर महामारी अधिनियम 1897 के तहत लागू किए जाने का इतिहास रहा है। यह अधिनियम पूरे भारत पर लागू होता है और इसका इस्तेमाल विकराल समस्या से निपटने के लिए होता है। केंद्र या राज्य सरकार दोनों में से कोई भी इस अधिनियम को लागू कर सकती है। अधिनियम की धारा दो सरकार को ऐसी शक्तियां भी प्रदान करती है जिसके तहत सरकार बीमारी की रोकथाम के लिए कई अस्थायी नियम बना सकती हैं। इसी नियम के तहत राज्यों में लॉकडाउन का आदेश दिया गया है।
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फिलहाल पाबंदी इतनी सी
1- लॉक डाउन में जरूरी सेवाओं के अलावा सारी सेवाएं बंद कर दी जाती हैं। कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा जाता है।
2- लॉक डाउन को एक तरह से बिना सजा के प्रावधान वाला कर्फ्यू कहा जा सकता है। बाहर निकलने वालों को पुलिस समझाकर वापस भेजती है। हालांकि सरकार सख्ती भी कर सकती है। यूपी सरकार ने साफ किया है कि लॉक डाउन में भी बाहर आने पर छह महीने की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है।
3- लॉक डाउन में पुलिस, अग्निशमन, मेडिकल, पैरामेडिकल, मीडिया, डिलीवरी, पेट्रोल पंप, सुरक्षा सेवाएं, पोस्टल सेवा, टेलिकॉम एवं इंटरनेट, बैंक, एटीएम, पानी-बिजली, नगर निगम, ग्रॉसरी और दूध जैसी सेवाओं को छूट दी गई है।

कर्फ्यू

सीआरपीसी की धारा 144 के तहत कर्फ्यू लगाया जाता है। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट नोटिफिकेशन जारी करता है। जिस जगह भी यह धारा लगाई जाती है, वहां लोग इकट्ठे नहीं हो सकते। आमतौर पर इस कानून का उपयोग विरोध प्रदर्शन और दंगों के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकने के लिए किया जाता है। कर्फ्यू का उल्लंघन करने पर पुलिस जेल भेज सकती है। नागरिक अधिकार काफी हद तक सीमित हो जाते हैं।

फिर इतनी बढ़ सकती है सख्ती

1- कर्फ्यू में जरूरी सेवा जैसे पुलिस, अग्निशमन, मेडिकल, पैरामेडिकल, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल्स, बस स्टैंड, पानी, बिजली, ग्रॉसरी और दूध आदि सेवाओं को छूट दी जाती है। इनसे जुड़े लोग सीमित समय के लिए बाहर निकल सकते हैं।

2- गैरसरकारी सेवाओं से संबद्ध लोगों पर कर्फ्यू के दौरान पास होना जरूरी है। कर्फ्यू पास मजिस्ट्रेट की ओर से जारी होता है। पास की अनुपलब्धता पर बाहर जाने पर सजा हो सकती है।
3- अगर कोई धारा 144 तोड़ता है तो धारा 188 के तहत उसे चार महीने तक की कैद या जुर्माना या दोनों सजा हो सकती हैं।
4- गैरजरूरी काम के लिए गाड़ियां भी बाहर नहीं निकाली जा सकती हैं।
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