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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Sugarcane cultivation is no longer profitable

गन्ना अब मुनाफे की खेती नहीं रहा

Mon, 01 Feb 2016 01:24 AM IST
बरेली
बरेली Updated Mon, 01 Feb 2016 01:24 AM IST
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बरेली। गन्ने के घोषित रेट के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन के संघर्ष की घोषणा दो फरवरी को फरीदपुर (बरेली) से होगी। इस दिन भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी राकेश टिकैत और महामंत्री राज पाल शर्मा शामिल होंगे। इसी के साथ प्रदेश के सभी जिलों में आंदोलन की तारीखें घोषित हो जाएंगी।
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प्रदेश सरकार ने गन्ने का समर्थन मूल्य पिछली साल के बराबर रखा है। जिसे भाकियू ने सिरे से नकारते हुए इलाहाबाद में फरवरी के पहले सप्ताह से आंदोलन का फैसला लिया है। यह इत्तफाक रहा है कि इस आंदोलन की शुरूआत बरेली से हो रही है। भाकियू के मंडल अध्यक्ष हरवीर सिंह ने बताया कि दो साल से सरकार ने गन्ने के रेट में इजाफा नहीं किया है, जबकि महंगाई बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को घाटा हो रहा है। सरकार को इस बार कम से कम 350 रुपये क्विंटल के हिसाब से मूल्य तय करना चाहिए था।
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किसानों को नहीं पढ़ रहा परता
भाकियू के जिलाध्यक्ष चौधरी जगत सिंह के अनुसार एक बीघा खेत में किसान के खाद, बीज, सिंचाई और छिलाई से लेकर ढुलाई तक छह हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके अलावा एक बीघा जमीन की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये मानते हुए उस पर एक साल का ब्याज 18 हजार रुपये बनता है। सब मिलाकर 24 हजार रुपये का खर्चा बनता है। वहीं दूसरी ओर एक बीघा में 40 क्विंटल गन्ने का उत्पादन होता है, जो कि 270 रुपये क्विंटल की दर से 10,800 रुपये में बिकता है। इस तरह तो किसान को जमीन की कीमत शामिल करने पर घाटा हो रहा है। जमीन को अलग कर दें तो एक बीघा में मात्र चार हजा रुपये की बचत होती है, जिसमें किसान की मेहनत भी शामिल है।
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