School Vehicles: इस जिले में लिया गया बड़ा फैसला, अब ऑटो व ई-रिक्शा से स्कूल नहीं जाएंगे बच्चे
बरेली में स्कूल संचालकों और अधिकारियों की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। बच्चे अब ऑटो और ई-रिक्शा से स्कूल नहीं जा सकेंगे। इसे लेकर एआरटीओ प्रशासन ने दिशा-निर्देश भी दिए हैं।
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बरेली में बच्चे अब सिर्फ स्कूल वाहन या अनुबंधित वाहन से ही विद्यालय आ-जा सकेंगे। ऑटो या ई-रिक्शा से उन्हें लाने-ले जाने पर रोक रहेगी। यह फैसला दिल्ली पब्लिक स्कूल में बुधवार को हुई स्कूल संचालकों और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में लिया गया।
बैठक में एआरटीओ प्रशासन मनोज कुमार ने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को ऐसे ही वाहनों से ही स्कूल भेजें, जिनका रंग पीला हो या उनमें पीली पट्टी लगी हो।
अभिभावक यह भी जानकारी कर लें कि जिस वाहन में उनका बच्चा स्कूल जाता है, वह आरटीओ दफ्तर में पंजीकृत है या नहीं। अनुबंधित या स्कूल वाहन से बच्चों को भेजने के निर्णय से असहमत अभिभावक अपनी जिम्मेदारी पर उन्हें खुद स्कूल लाने-ले जाने का जिम्मा उठाएंगे।
समिति होगी गठित
उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल संचालक किसी निजी वाहन का व्यावसायिक इस्तेमाल कर सकेंगे। डीआईओएस देवकी सिंह ने कहा कि स्कूलों में परिवहन सुरक्षा के लिए समिति गठित की जाएगी। यह स्कूली वाहनों से जुड़े हर पहलू पर निगरानी रखेगी।
निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने भी अपना पक्ष रखा। इससे पूर्व दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। प्रधानाचार्य वीके मिश्रा ने संचालन किया। इस दौरान एआरटीओ प्रवर्तन जेपी गुप्ता, पीयूष कुमार आदि मौजूद रहे।
स्कूल वाहनों की होगी चेकिंग
अनधिकृत स्कूल वाहनों की धरपकड़ के लिए बृहस्पतिवार से चार दिन तक मंडल के चारों जिलों में विशेष अभियान चलाया जाएगा। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल के आदेश पर बुधवार को आरटीओ प्रवर्तन दिनेश कुमार ने 14 अधिकारियों की चार टीमें गठित की हैं।
पिछले दिनों बदायूं में स्कूल बस और वैन की भिड़ंत में चार बच्चों समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी। स्कूल वाहनों से हादसे न हों, इसके लिए अनधिकृत वाहनों पर अंकुश लगाने की तैयारी है। बृहस्पतिवार को बरेली में एआरटीओ जेपी गुप्ता के नेतृत्व में यात्रीकर अधिकारी मुन्ना लाल, बदायूं के रमेश चंद्र प्रजापति, शाहजहांपुर के होरीलाल वर्मा अभियान चलाएंगे।