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Bareilly News: रुविवि में विद्यार्थियों को नहीं लोकपाल की जानकारी
Sat, 22 Jun 2024 05:52 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sat, 22 Jun 2024 05:52 AM IST
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में एक साल से लोकपाल तैनात हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में उनके पास अब तक कोई शिकायतकर्ता नहीं पहुंच सका है। विवि परिसर के विद्यार्थियों को ही लोकपाल के कार्य के बारे में जानकारी नहीं है।
विश्वविद्यालय में प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में छात्र अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। इसके साथ ही परिसर में भी मारपीट व अन्य मामले सामने आते हैं। ऐसे में विद्यार्थी सिर्फ मुख्य नियंता तक ही पहुंचा पाता है। समाधान से संतुष्ट नहीं होने पर भी जानकारी के अभाव में वह लोकपाल से संपर्क नहीं कर पाता। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने छात्रों की शिकायतों का निपटारा करने के लिए लोकपाल की नियुक्ति नहीं करने पर इस वर्ष जनवरी माह में विवि को डिफॉल्टर की सूची में डाला था। हालांकि विवि का कहना था कि उन्होंने लोकपाल की नियुक्ति मई 2023 में ही कर दी थी। इसकी सूचना विवि ने यूजीसी को भेजी। ऐसे में विगत दिनों जारी हुई डिफॉल्टरों की सूची में विवि का नाम नहीं आया। वनस्पति विज्ञान विभाग से सेवानिवृत्त प्रो. वीपी सिंह को लोकपाल बनाया गया था।
लोकपाल प्रो. वीपी सिंह के अनुसार जो लोग अनुशासनात्मक समिति के निर्णय से असंतुष्ट होते हैं। वो लोकपाल के पास आ सकते हैं। उनके पास दो-तीन मामले आए थे। वे समिति के पास नहीं पहुंचे। ऐसे में उनका समाधान उनके स्तर से नहीं किया गया। एक वर्ष में उनका पास कोई भी प्रकरण नहीं आया है। विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें लोकपाल क्या है और क्या काम करता है? इसकी जानकारी नहीं है। दरअसल, पादप विज्ञान विभाग में जहां लोकपाल बैठते हैं। उस कार्यालय के बाहर उनका नाम तक नहीं लिखा गया है।
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विश्वविद्यालय में प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में छात्र अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। इसके साथ ही परिसर में भी मारपीट व अन्य मामले सामने आते हैं। ऐसे में विद्यार्थी सिर्फ मुख्य नियंता तक ही पहुंचा पाता है। समाधान से संतुष्ट नहीं होने पर भी जानकारी के अभाव में वह लोकपाल से संपर्क नहीं कर पाता। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने छात्रों की शिकायतों का निपटारा करने के लिए लोकपाल की नियुक्ति नहीं करने पर इस वर्ष जनवरी माह में विवि को डिफॉल्टर की सूची में डाला था। हालांकि विवि का कहना था कि उन्होंने लोकपाल की नियुक्ति मई 2023 में ही कर दी थी। इसकी सूचना विवि ने यूजीसी को भेजी। ऐसे में विगत दिनों जारी हुई डिफॉल्टरों की सूची में विवि का नाम नहीं आया। वनस्पति विज्ञान विभाग से सेवानिवृत्त प्रो. वीपी सिंह को लोकपाल बनाया गया था।
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लोकपाल प्रो. वीपी सिंह के अनुसार जो लोग अनुशासनात्मक समिति के निर्णय से असंतुष्ट होते हैं। वो लोकपाल के पास आ सकते हैं। उनके पास दो-तीन मामले आए थे। वे समिति के पास नहीं पहुंचे। ऐसे में उनका समाधान उनके स्तर से नहीं किया गया। एक वर्ष में उनका पास कोई भी प्रकरण नहीं आया है। विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें लोकपाल क्या है और क्या काम करता है? इसकी जानकारी नहीं है। दरअसल, पादप विज्ञान विभाग में जहां लोकपाल बैठते हैं। उस कार्यालय के बाहर उनका नाम तक नहीं लिखा गया है।
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