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Bareilly News: शिक्षण संस्थानों के नाम की फर्जी आई चला रहे छात्र संगठनों के पदाधिकारी

Sat, 29 Nov 2025 02:51 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 29 Nov 2025 02:51 AM IST
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Student union officials are running fake IDs in the name of educational institutions.
बरेली। वर्ष 2012 के बाद भले ही छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए, लेकिन छात्र संगठनों के पदाधिकारी सोशल मीडिया पर शिक्षण संस्थानों के नाम की फर्जी आईडी संचालित कर अपनी लोकप्रियता बनाए हुए हैं। सोशल मीडिया पर बरेली कॉलेज और रुहेलखंड विवि के नाम से कई फर्जी अकाउंट संचालित हो रहे हैं। कई बार इनको बंद भी कराया गया, लेकिन पदाधिकारी दोबारा उसी नाम से आईडी बना लेते हैं।
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सोशल मीडिया पर बरेली कॉलेज, रुहेलखंड विवि के अलग-अलग नामों से इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स पर दो-तीन अकाउंट बने हैं। कई पर तो फर्जी वेबसाइट के लिंक भी डाले हुए हैं। छात्र संगठनों के पदाधिकारी इन अकाउंट पर कॉलेज व रुविवि की जानकारी के साथ अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरह के वीडियो भी अपलोड कर रहे हैं। रुविवि की मीडिया सेल ने पिछले वर्ष एक लिंक्डइन व ट्विटर अकाउंट बंद कराया था। बरेली कॉलेज प्रशासन ने भी एक व्हाट्सएप ग्रुप को बंद कराया था, लेकिन अब भी कई फेक अकाउंट संचालित हो रहे हैं। संवाद
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फॉलोवर्स में लोकप्रियता का खेल
बरेली कॉलेज के नाम से बने इंस्टाग्राम पर बने पेजों पर 40 हजार, तीन हजार, दो हजार और नौ हजार फॉलोवर्स हैं। फेसबुक पर भी ऐसा ही हाल है। यूट्यूब पर भी बरेली काॅलेज के नाम से चैनल बनाकर वीडियो अपलोड किए जा रहे हैं। रुविवि के नाम से बने फर्जी अकाउंट पर भी बड़ी संख्या में फॉलोवर्स हैं।
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रुविवि के मीडिया प्रभारी डॉ. अमित सिंह ने बताया कई फर्जी अकाउंट गलत जानकारी देकर कई बार छात्रों को गुमराह भी कर देते हैं। कई बार 1400-1500 के शुल्क के साथ फर्जी वेबसाइट भी बना चुके हैं। बरेली कॉलेज की प्रवेश नियंत्रक प्रो. वंदना शर्मा ने बताया कि कॉलेज के व्हाट्सएप ग्रुप पर आपत्तिजनक सामग्री डाले जाने के बाद उसे बंद कराया गया था। कॉलेज की वेबसाइट पर दी गईं जानकारियां ही पुष्ट होती हैं।



कार्रवाई के अभाव में कर रहे फर्जीवाड़ाऐसे फर्जी अकाउंट का इस्तेमाल विद्यार्थियों से रुपयों के लेन-देन के लिए भी हुआ था। कड़ी कार्रवाई नहीं होने से ऐसा हो रहा है। - श्रेयांश बाजपेई, विभाग सह संयोजक, एबीवीपी


लोकप्रियता अलग बात है, लेकिन छात्रों तक गलत जानकारियां पहुंचाना अपराध है। हमारे संगठन का कोई पदाधिकारी ऐसा नहीं कर रहा है। - गजेंद्र कुर्मी, पूर्व जिलाध्यक्ष, समाजवादी छात्र सभा
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