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रहें सतर्क: बदलते मौसम में जरा सी चूक पड़ सकती है भारी
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मौसम
- फोटो : अमर उजाला
डब्ल्यूएचओ और सरकार ने जताई आशंका, बढ़ सकते हैं संक्रमण के मामले
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गंभीर मरीजों पर आफत बरपा सकता है कोरोना, वायरस से बचाएगी सतर्कता
बरेली। आधे से ज्यादा अक्तूबर बीत चुका है। सुबह और शाम को ठंड की आहट शुरू हो गई है। मौसम का बदलते मिजाज ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और त्योहारों ने सरकार के माथे पर शिकन ला दी है। वजह, शोधकर्ताओं ने सर्दियों में संक्रमण की दूसरी लहर आने की आशंका जताई है। चिकित्सक भी इस पर सहमति जता रहे है। उनके मुताबिक संभले हालात फिर बिगड़े तो काबू करना मुश्किल होगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक ठंड के दिनों में वायरस का खतरा घटने के बजाय और बढ़ सकता है। गर्मी में कोरोना वायरस फैलने का एक बड़ा कारण संक्रमित छोटे आकार के एरोसॉल (हवा में मौजूद ठोस या वाष्प कण) के संपर्क में आना रहा। वहीं, जाड़े में कोरोना संक्रमण फैलने की मुख्य वजह सांस छोड़ने, खांसने या छींकने के दौरान मुंह और नाक से निकली बूंदों के सीधे संपर्क में आने की आशंका है। संक्रामक रोग चैप्टर के अध्यक्ष रहे डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक ठंड में दो गज दूरी के नियमों का पालन संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए काफी नहीं है, क्योंकि तापमान कम होने से ड्रॉपलेट चार से पांच मीटर तक फैल सकते हैं।
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ठंड में काफी देर तक हवा में मौजूद रह सकता है वायरस
माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक, सर्दियों में तापमान कम होगा। इसलिए वायरस 24 घंटे से भी ज्यादा हवा में मौजूद रह सकता है। मुंह या नाक से निकलने वाली बूंदें छोटे वायरस के हिस्से को पीछे छोड़ देती हैं जो अन्य एरोसोलिज्ड वायरस कण से जुड़ते हैं और संपर्क में आने वाले व्यक्ति के शरीर में बोलने, खांसने, छींकने और सांस लेने के दौरान प्रवेश कर संक्रमित कर सकते हैं। सर्दियों में वायरस जमीन पर गिरने से पहले हवा के साथ 19.7 फुट की ऊंचाई तक जा सकता है। बूंदों में मौजूद वायरस दस माइक्रोन से भी छोटे होते हैं, जो घंटों हवा में जीवित रह सकते हैं।
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त्योहार में व्यापारी व्यापार के साथ ही सेहत का रखें ध्यान
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य के मुताबिक, त्योहार की खरीदारी के लिए बाजार में भीड़भाड़ बढ़ेगी। वहीं, सर्दियों का असर होने से हवा में ज्यादा देर वायरस के मौजूद रहने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। एक संक्रमित कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। इसलिए जहां तक संभव हो सर्दियों में घर से कम ही बाहर निकलें। जरूरत पर अगर बाहर निकलें भी तो पूरी एहतियात बरतें। व्यापारी वर्ग अपनी और ग्राहकों की सेहत का ख्याल रखें।
मौसम का परिवर्तन और मानव व्यवहार, वायरस के अनुकूल
फिजीशियन डॉ. अर्जुन गुप्ता के अनुसार किसी भी वायरल इंफेक्शन के फैलने के तीन प्रमुख कारण होते हैं। पहला-मौसमी परिवर्तन, दूसरा- मानव का व्यवहार और तीसरा- वायरस का मौसम के साथ व्यवहार परिवर्तन। वर्तमान में मौसम बदल रहा है और लोग संक्रमण से बेखौफ हो गए हैं। इसलिए संक्रमण की दूसरी लहर आने की आशंका है। लोगों को सतर्क रहने के साथ ही, कोरोना टेस्ट की क्षमता बढ़ानी होगी ताकि संक्रमितों को समय से ट्रेस किया जा सके। साथ ही, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और लक्षण युक्त को तत्काल इलाज मिले। इसी जज्बे के साथ संक्रमण से बचाव के लिए प्रयास से सकारात्मकता दिखेगी।
एंटीजन के बजाय हो आरटीपीसीआर जांच
चिकित्सकों के मुताबिक, एंटीजन जांच में निगेटिव मिले लोगों को नियमानुसार आरटीपीसीआर जांच जरूर करानी चाहिए। मगर, जिले में निगेटिव मिलने पर लोग संक्रमित नहीं होने का दावा करते हैं। जो हालात को बिगाड़ सकता है। चिकित्सकों ने आरटीपीसीआर जांच बढ़ाने का सरकार को सुझाव दिया है। बता दें कि बीते दिनों शासन ने भी अस्पताल में पहुंच रहे मरीजों की एंटीजन जांच निगेटिव होने पर आरटीपीसीआर कराने के निर्देश दिए थे। मगर, कुछ ही मरीजों की एंटीजन निगेटिव होने के बाद आरटीपीसीआर जांच कराई गई। ज्यादातर ने खुद को स्वस्थ मानकर दवा ली और घर चले गए।
सर्दियों में इन बातों का रखें ध्यान
- - बेहद जरूरी कार्य होने पर ही घर से निकलें।
- - परिवार का एक ही सदस्य खरीदारी के लिए निकले।
- - एक बार में ही कुछ दिन का सामान खरीद लें।
- - घर से बाहर जाने-आने के अलग कपड़े रखें।
- - सैनिटाइजर और मास्क का जरूर प्रयोग करें।
- - भीड़ न लगाएं, उसका हिस्सा बनने से बचें।
- - तबियत खराब लगने पर तत्काल जांच कराएं।
- - बुजुर्ग और बच्चों को घर से बाहर न जाने दें।
- - सुबह शाम टहलने वाले भी सतर्कता बरतें।
- - लॉकडाउन के सुझाए नियमों का पालन करें।
संक्रमण के मामले कम हुए हैं, मगर अभी यह स्थिति राहत देने वाली नहीं है। प्रतिदिन 40 से 50 संक्रमित मिल रहे हैं। इधर, ठंड और त्योहार शुरू हो रहे हैं। इस दौरान संक्रमण बढ़ने की आशंका है। हमारी टीमें लगातार ट्रेसिंग कर रही हैं। आरटीपीसीआर जांच बढ़ाई जा रही है। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ
बढ़ता प्रदूषण संक्रमितों के लिए बन सकता है जानलेवा
बरेली। रेमडेसिविर, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन समेत अन्य दवा या इंजेेक्शन जो अब तक कोरोना के इलाज में कारगर माने जा रहे थे, वे डब्न्ल्यूएचओ की रिसर्च में बेअसर साबित हुए हैं। शोध के बाद रोग प्रतिरोधक क्षमता से ही संक्रमित स्वस्थ हुए होंगे, इस उम्मीद को बल मिला है। अब तेजी से बढ़ रहा प्रदूषण रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर रहा है। चिकित्सकों ने इस स्थिति को संक्रमितों के लिए जानलेवा होने की आशंका जताई है।
लॉकडाउन यानी नीले आसमान और स्वच्छ हवा वाले कुछ महीनों के बाद बरेली को डराने के लिए धुएं से भरे धुंधले आकाश के दिन लौट आए हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को सर्दी के मौसम में बेहद सतर्क रहने के लिए आगाह किया है। उनका कहना है कि हवा में प्रदूषण का ज्यादा स्तर संक्रमण के प्रभाव को जानलेवा बना सकता है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण के इस माहौल में उन लोगों को खासतौर से सावधान रहने की जरूरत है जो कोरोना के आसान शिकार माने जाते हैं। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सुदीप सरन के मुताबिक पहले से बीमार लोग प्रदूषण के कारण फेफड़ों में सिकुड़न महसूस कर सकते हैं, जो कोरोना की चपेट में आने पर न्यूमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों में बदल सकता है। बताया कि वायु प्रदूषण बढ़ने पर श्वसन तंत्र से जुड़े संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
वायु प्रदूषण संक्रमण को बना देगा घातक
फिजीशियन के मुताबिक वायु प्रदूषण फेफड़ों पर असर कर शरीर के उस मैकेनिज्म को बेहद तेजी से घटाता है, जो रोग प्रतिरक्षक क्षमता बढ़ाते हैं। क्योंकि वायु प्रदूषण से श्वसन मार्ग, पलकों और त्वचा की रक्षक परत को नुकसान पहुंचता है। वे संक्रमित जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम थी, उन्हें अब और ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। इसमें 60 साल के बुजुर्ग और दस वर्ष से कम आयु के बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा हार्ट, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, चेस्ट रोग से ग्रसित लोगों को खतरा ज्यादा है।
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गंभीर मरीजों पर आफत बरपा सकता है कोरोना, वायरस से बचाएगी सतर्कता बरेली। आधे से ज्यादा अक्तूबर बीत चुका है। सुबह और शाम को ठंड की आहट शुरू हो गई है। मौसम का बदलते मिजाज ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और त्योहारों ने सरकार के माथे पर शिकन ला दी है। वजह, शोधकर्ताओं ने सर्दियों में संक्रमण की दूसरी लहर आने की आशंका जताई है। चिकित्सक भी इस पर सहमति जता रहे है। उनके मुताबिक संभले हालात फिर बिगड़े तो काबू करना मुश्किल होगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक ठंड के दिनों में वायरस का खतरा घटने के बजाय और बढ़ सकता है। गर्मी में कोरोना वायरस फैलने का एक बड़ा कारण संक्रमित छोटे आकार के एरोसॉल (हवा में मौजूद ठोस या वाष्प कण) के संपर्क में आना रहा। वहीं, जाड़े में कोरोना संक्रमण फैलने की मुख्य वजह सांस छोड़ने, खांसने या छींकने के दौरान मुंह और नाक से निकली बूंदों के सीधे संपर्क में आने की आशंका है। संक्रामक रोग चैप्टर के अध्यक्ष रहे डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक ठंड में दो गज दूरी के नियमों का पालन संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए काफी नहीं है, क्योंकि तापमान कम होने से ड्रॉपलेट चार से पांच मीटर तक फैल सकते हैं।
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ठंड में काफी देर तक हवा में मौजूद रह सकता है वायरस
माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक, सर्दियों में तापमान कम होगा। इसलिए वायरस 24 घंटे से भी ज्यादा हवा में मौजूद रह सकता है। मुंह या नाक से निकलने वाली बूंदें छोटे वायरस के हिस्से को पीछे छोड़ देती हैं जो अन्य एरोसोलिज्ड वायरस कण से जुड़ते हैं और संपर्क में आने वाले व्यक्ति के शरीर में बोलने, खांसने, छींकने और सांस लेने के दौरान प्रवेश कर संक्रमित कर सकते हैं। सर्दियों में वायरस जमीन पर गिरने से पहले हवा के साथ 19.7 फुट की ऊंचाई तक जा सकता है। बूंदों में मौजूद वायरस दस माइक्रोन से भी छोटे होते हैं, जो घंटों हवा में जीवित रह सकते हैं।
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त्योहार में व्यापारी व्यापार के साथ ही सेहत का रखें ध्यान
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य के मुताबिक, त्योहार की खरीदारी के लिए बाजार में भीड़भाड़ बढ़ेगी। वहीं, सर्दियों का असर होने से हवा में ज्यादा देर वायरस के मौजूद रहने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। एक संक्रमित कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। इसलिए जहां तक संभव हो सर्दियों में घर से कम ही बाहर निकलें। जरूरत पर अगर बाहर निकलें भी तो पूरी एहतियात बरतें। व्यापारी वर्ग अपनी और ग्राहकों की सेहत का ख्याल रखें।मौसम का परिवर्तन और मानव व्यवहार, वायरस के अनुकूल
फिजीशियन डॉ. अर्जुन गुप्ता के अनुसार किसी भी वायरल इंफेक्शन के फैलने के तीन प्रमुख कारण होते हैं। पहला-मौसमी परिवर्तन, दूसरा- मानव का व्यवहार और तीसरा- वायरस का मौसम के साथ व्यवहार परिवर्तन। वर्तमान में मौसम बदल रहा है और लोग संक्रमण से बेखौफ हो गए हैं। इसलिए संक्रमण की दूसरी लहर आने की आशंका है। लोगों को सतर्क रहने के साथ ही, कोरोना टेस्ट की क्षमता बढ़ानी होगी ताकि संक्रमितों को समय से ट्रेस किया जा सके। साथ ही, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और लक्षण युक्त को तत्काल इलाज मिले। इसी जज्बे के साथ संक्रमण से बचाव के लिए प्रयास से सकारात्मकता दिखेगी।एंटीजन के बजाय हो आरटीपीसीआर जांच
चिकित्सकों के मुताबिक, एंटीजन जांच में निगेटिव मिले लोगों को नियमानुसार आरटीपीसीआर जांच जरूर करानी चाहिए। मगर, जिले में निगेटिव मिलने पर लोग संक्रमित नहीं होने का दावा करते हैं। जो हालात को बिगाड़ सकता है। चिकित्सकों ने आरटीपीसीआर जांच बढ़ाने का सरकार को सुझाव दिया है। बता दें कि बीते दिनों शासन ने भी अस्पताल में पहुंच रहे मरीजों की एंटीजन जांच निगेटिव होने पर आरटीपीसीआर कराने के निर्देश दिए थे। मगर, कुछ ही मरीजों की एंटीजन निगेटिव होने के बाद आरटीपीसीआर जांच कराई गई। ज्यादातर ने खुद को स्वस्थ मानकर दवा ली और घर चले गए।सर्दियों में इन बातों का रखें ध्यान
- - बेहद जरूरी कार्य होने पर ही घर से निकलें।
- - परिवार का एक ही सदस्य खरीदारी के लिए निकले।
- - एक बार में ही कुछ दिन का सामान खरीद लें।
- - घर से बाहर जाने-आने के अलग कपड़े रखें।
- - सैनिटाइजर और मास्क का जरूर प्रयोग करें।
- - भीड़ न लगाएं, उसका हिस्सा बनने से बचें।
- - तबियत खराब लगने पर तत्काल जांच कराएं।
- - बुजुर्ग और बच्चों को घर से बाहर न जाने दें।
- - सुबह शाम टहलने वाले भी सतर्कता बरतें।
- - लॉकडाउन के सुझाए नियमों का पालन करें।
संक्रमण के मामले कम हुए हैं, मगर अभी यह स्थिति राहत देने वाली नहीं है। प्रतिदिन 40 से 50 संक्रमित मिल रहे हैं। इधर, ठंड और त्योहार शुरू हो रहे हैं। इस दौरान संक्रमण बढ़ने की आशंका है। हमारी टीमें लगातार ट्रेसिंग कर रही हैं। आरटीपीसीआर जांच बढ़ाई जा रही है। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ
बढ़ता प्रदूषण संक्रमितों के लिए बन सकता है जानलेवा
बरेली। रेमडेसिविर, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन समेत अन्य दवा या इंजेेक्शन जो अब तक कोरोना के इलाज में कारगर माने जा रहे थे, वे डब्न्ल्यूएचओ की रिसर्च में बेअसर साबित हुए हैं। शोध के बाद रोग प्रतिरोधक क्षमता से ही संक्रमित स्वस्थ हुए होंगे, इस उम्मीद को बल मिला है। अब तेजी से बढ़ रहा प्रदूषण रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर रहा है। चिकित्सकों ने इस स्थिति को संक्रमितों के लिए जानलेवा होने की आशंका जताई है।लॉकडाउन यानी नीले आसमान और स्वच्छ हवा वाले कुछ महीनों के बाद बरेली को डराने के लिए धुएं से भरे धुंधले आकाश के दिन लौट आए हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को सर्दी के मौसम में बेहद सतर्क रहने के लिए आगाह किया है। उनका कहना है कि हवा में प्रदूषण का ज्यादा स्तर संक्रमण के प्रभाव को जानलेवा बना सकता है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण के इस माहौल में उन लोगों को खासतौर से सावधान रहने की जरूरत है जो कोरोना के आसान शिकार माने जाते हैं। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सुदीप सरन के मुताबिक पहले से बीमार लोग प्रदूषण के कारण फेफड़ों में सिकुड़न महसूस कर सकते हैं, जो कोरोना की चपेट में आने पर न्यूमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों में बदल सकता है। बताया कि वायु प्रदूषण बढ़ने पर श्वसन तंत्र से जुड़े संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।