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Bareilly News: प्रदेश का बजट बढ़ा... पर सरकार का राजकोषीय घाटे से नहीं छूटा पीछा
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बरेली। प्रदेश के विकास के लिए आय बढ़ाना जितना जरूरी है, खर्च को नियंत्रित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद राजकोषीय घाटे से सरकार का पीछा नहीं छूट रहा। पांच दशक में जहां बजट करीब 1617 गुना तक बढ़ गया। वहीं, राजकोषीय घाटे में भी 1523 गुना इजाफा हुआ है। हालांकि, यह राजकोषीय घाटा मानक से कम होने की वजह से विशेषज्ञ इसे प्रदेश की आर्थिक सेहत के लिए खतरा नहीं मानते हैं।
अमर उजाला में 21 मार्च 1972 को प्रकाशित खबर के मुताबिक तत्कालीन सरकार ने 60.68 करोड़ रुपये के घाटे का बजट पेश किया था। करीब 528 करोड़ रुपये खर्च वाले इस बजट में घाटे को पूरा करने के लिए नए कर भी लगाए गए थे। आबकारी में वसूली बढ़ाने जैसे उपाय भी किए गए थे। वर्ष 1989 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार ने करमुक्त बजट पेश किया था, लेकिन इससे घाटा बढ़कर 157 करोड़ रुपये हो गया था। विपक्ष ने महंगाई बढ़ने और सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई थी।
प्रदेश के बजट में घाटे का सिलसिला कभी थमा ही नहीं। वर्ष 1991 में आए बजट को देखें तो अमर उजाला में 23 फरवरी 1991 को प्रकाशित खबर के मुताबिक कोई नया कर नहीं लगाया गया। हालांकि, घाटा बढ़कर 234 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह बजट 14384 करोड़ रुपये का पेश किया गया था। वर्ष 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने बजट पेश किया था। ग्रामीण विकास पर केंद्रित इस बजट में 215.65 करोड़ रुपये का घाटा दर्शाया गया था। यह बजट करीब 19,592 करोड़ रुपये का था। वर्ष 2025 में अब जहां बजट 8.08 लाख करोड़ रुपये का हो चुका है। वहीं, राजकोषीय घाटा भी 91,399 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
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राजकोषीय घाटे पर होती थी चर्चा
एक समय था जब विपक्ष भी राजकोषीय घाटे पर चर्चा किया करता था। समय के साथ बजट के विकास केंद्रित होने के अलावा अलग-अलग वर्ग को हुए आवंटन को महत्व दिया जाने लगा है। अब विपक्ष के नेता भी इसी आधार पर बजट का आकलन करते हैं। अतुल भारद्वाज
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अमर उजाला में 21 मार्च 1972 को प्रकाशित खबर के मुताबिक तत्कालीन सरकार ने 60.68 करोड़ रुपये के घाटे का बजट पेश किया था। करीब 528 करोड़ रुपये खर्च वाले इस बजट में घाटे को पूरा करने के लिए नए कर भी लगाए गए थे। आबकारी में वसूली बढ़ाने जैसे उपाय भी किए गए थे। वर्ष 1989 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार ने करमुक्त बजट पेश किया था, लेकिन इससे घाटा बढ़कर 157 करोड़ रुपये हो गया था। विपक्ष ने महंगाई बढ़ने और सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई थी।
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प्रदेश के बजट में घाटे का सिलसिला कभी थमा ही नहीं। वर्ष 1991 में आए बजट को देखें तो अमर उजाला में 23 फरवरी 1991 को प्रकाशित खबर के मुताबिक कोई नया कर नहीं लगाया गया। हालांकि, घाटा बढ़कर 234 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह बजट 14384 करोड़ रुपये का पेश किया गया था। वर्ष 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने बजट पेश किया था। ग्रामीण विकास पर केंद्रित इस बजट में 215.65 करोड़ रुपये का घाटा दर्शाया गया था। यह बजट करीब 19,592 करोड़ रुपये का था। वर्ष 2025 में अब जहां बजट 8.08 लाख करोड़ रुपये का हो चुका है। वहीं, राजकोषीय घाटा भी 91,399 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
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राजकोषीय घाटे पर होती थी चर्चा
एक समय था जब विपक्ष भी राजकोषीय घाटे पर चर्चा किया करता था। समय के साथ बजट के विकास केंद्रित होने के अलावा अलग-अलग वर्ग को हुए आवंटन को महत्व दिया जाने लगा है। अब विपक्ष के नेता भी इसी आधार पर बजट का आकलन करते हैं। अतुल भारद्वाज