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बड़ा बाईपास में दब गईं 593 किसानों की ‘मुस्कान’

Wed, 26 Jul 2017 12:59 AM IST
बरेली
बरेली Updated Wed, 26 Jul 2017 12:59 AM IST
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बड़ा बाईपास तो बन गया लेकिन उसके नीचे 33 गांवों के 593 किसानों की खुशियां दब गईं। उनकी खेती की जमीन को प्रशासन ने बिना सहमति अधिग्रहण कर लिया और मुआवजा भी नहीं दिया। इन किसानों की गलती बस यह थी कि उन्होंने अपनी जमीन कम मुआवजे पर देने से मना कर दिया था। इनमें तमाम किसान ऐसे थे जिनके पास सिर्फ यही जमीन का टुकड़ा था। इनमें से कई तो मजदूरी करने को मजबूर हुए और कुछ आटो चलाने चलाकर रोजी रोटी का जुगाड़ कर रहे हैं। मुआवजा न मिलने से वह अपनी जमीन दूसरी जगह खरीद नहीं पाए और अब तो जमीन की कीमतें बढ़ने से और मुश्किल में उनकी जिंदगी फंस गई है। पिछले आठ सालों से वह अपने हक के लिए अफसरों के दरवाजे-दरवाजे एड़ियां रगड़ रहे हैं।
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फोटो--
केस- वन
हमारे पास तो सिर्फ 9.14 बीघा जमीन थी। बाईपास में जमीन चली जाने के बाद कुछ नहीं बचा। हमने सहमति दी नहीं थी इसलिए मुआवजा भी नहीं मिल पाया। मुआवजा मिल जाता तो कहीं और जमीन खरीद लेते। खेतीबाड़ी से उनके परिवार की खुशियां जुड़ी थीं। जमीन अधिग्रहण होने के बाद मजदूरी करके परिवार पालना पड़ रहा है।
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वीरेंद्र सिंह -ग्राम मुड़िया अहमद नगर 

केस- दो
बड़ा बाईपास में उनकी नौ बीधा सात वीसा जमीन चली गई। उनकी सहमति भी प्रशासन ने नहीं ली। अब ढाई बीघा जमीन बची है। वह भी बाईपास किनारे हैं। खेती तो वहां हो नहीं सकती है। ग्रीन बेल्ट के नाम पर वहां कुछ कर भी नहीं सकते हैं। प्रशासन समय से मुआवजा दे देता तो उनके परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट नहीं आता
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शिव शंकर यादव -ग्राम खेड़ा( मुड़िया अहमद नगर)

केस-तीन
बड़ा बाईपास में चार बीघा जमीन मेरी भी जबरन ले ली गई। सहमति देने को तैयार थे लेकिन सर्किल रेट में घालमेल कर दिया गया। कुछ वीआईपी इलाकों को अधिकतम सर्किल रेट से बढ़ाकर मुआवजा दे दिया। हमारे इलाके के किसानों का मुआवजा 25 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर फिक्स कर दिया गया। इस दोहरी नीति का हमने विरोध किया था। जिसकी सजा मिली है कि आठ साल बाद भी मुआवजा नहीं मिला है। 
हरिनंदन सिंह -ग्राम कुम्हरा 

केस-चार
हम चार भाईयों की 23 बीघा जमीन प्रशासन ने जबरन अधिग्रहण कर ली है। मुआवजा अभी तक नहीं मिल पाया है। हम भटकते घूम रहे हैं। परिवार के पास जो जमीन बची है, उसमें भी हम खेती नहीं कर सकते हैं। ग्रीन बेल्ट के नाम पर बीडीए ने तमाम पाबंदी लगा रखी हैं। उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट है-राजाराम पटेल
ग्राम कुम्हरा

केस-पांच
छह बीघा जमीन प्रशासन ने बड़ा बाईपास के लिए ले ली। अधिग्रहण करते समय उन्होंने हमारी सहमति लेना भी जरूरी नहीं समझा। अब उनके परिवार के पास तीन बीघा जमीन बची है। खेतीबाड़ी करके तो परिवार पल नहीं सकता है। मजबूरी में मजदूरी करनी पड़ रही है। मुआवजा मिल गया होता तो हम कहीं और जमीन खरीदकर खेती बाड़ी कर लेते-
 ईश्वरी प्रसाद -ग्राम मुड़िया अहमद नगर


- बड़े बाईपास की जमीन का जिन किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। उनमें से 144 किसानों ने कोर्ट में वाद दायर कर रखे हैं। कोर्ट से फैसला आए बिना हम कुछ नहीं कर सकते हैं। एनएचएआई ने भी ऐसे में कोई बात करने से मना कर रखा है। फिर भी मैं डीएम साहब से बात करके किसानों का मसला हल कराने की कोशिश करता हूं- यूपी सिंह, एसएलओ/ मजिस्ट्रेट


-बड़ा बाईपास बनाने के लिए कुल 33 गांव के 2390 किसानों की जमीन प्रशासन ने करीब 260 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की गई थी। इसमें से 593 किसान ऐसे हैं, जिनका मुआवजा अभी तक नहीं मिल पाया है। 


गांव                                किसानों की संख्या
बिबियापुर चौधरी                   48
परधोली, परसाखेड़ा और धंतिया    43
अटा कायस्थान                      65
बिल्वा                               43
भूड़ा, दीदार पटट्ी                   74
मुड़िया अहमदनगर                  30
सैदपुर चुन्नीलाल                    35
कुम्हरा                               14
नवदिया कुर्मियान          05
रुपापुर बढेपुरा         05
 क्लारी      04
लालपुर    05
कचौली     71
आलमपुर, बिथरी चैनपुर    17
उड़ला जागीर    01
टाहताजपुर    03
गोपालपुर नगरिया अनूप    51
रजऊ परसपुर    79                            
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