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स्मार्ट शहर का खाका बनाने जान बोर्नेट बरेली पहुंचे
बरेली
Updated Thu, 29 Oct 2015 02:17 AM IST
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बरेली। स्मार्ट सिटी मिशन को अमली जामा पहनाने के लिए कंसल्टेंट एजेंसी के प्रमुख जॉन बार्नेटवाशिंगटन डीसी से बरेली आए हैं। उनके साथ कंसल्टेंट एक्सपर्ट भी हैं। जान ने मेयर, नगर आयुक्त, बीडीए सचिव समेत अन्य अफसरों से 30 अक्टूबर को सुबह नौ बजे से होने वाली स्मार्ट सिटी की वर्कशाप की तैयारियों पर चर्चा की। नगर निगम ने इस वर्कशाप में केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, पूर्व मेयर, पार्षद, मेडिकल, इंजीनियरिंग, सिविल सोसायटियों समेत अन्य क्षेत्रों से जुड़े 300 प्रबुद्धजनों को आमंत्रित किया है। ये वर्कशाप में शहर को स्मार्ट बनाने पर अपने सुझाव रखेंगे।
जॉन बोर्नेट अमेरिका के पोर्टलैंड शहर के सिटी मैनेजर रह चुके हैं। अब उनकी कंसल्टेंट एजेंसी इंटरनेशनल सिटी काउंटी मैनेजमेंट बरेली और आगरा को स्मार्ट बनाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर रही है। जॉन बोर्नेट ने मेयर डा. आईएस तोमर से डोर टू डोर कूड़ा योजना, कूड़ा कलेक्शन और निस्तारण, यूजर चार्ज वसूली, नगर निगम की वार्षिक आय, सीवरेज सिस्टम, वाटर ड्रैनेज, पेयजल आपूर्ति, ट्रीटमेंट प्लांट समेत जनता की बुनियादी सुविधाओं की जानकारी की। नगर आयुक्त ने हाउस, वाटर और सीवर टैक्स समेत पेयजल आपूर्ति के बारे में बताया। नगर निगम की आमदनी के स्रोत क्या हैं। नागरिक सुविधाओं के लिए फंडिंग कहां-कहां से होती है आदि पर विचार किया गया। कंसल्टेंट एजेंसी के चीफ टेक्निकल ऑफीसर अनुराग एंथोनी ने बीडीए सचिव गरिमा यादव से 2021 का मास्टर प्लान और जोनल प्लान मांगा। बीडीए सचिव की ओर से कंसल्टेंट को रामगंगा नगर आवासीय योजना की जानकारी दी गई। हजियापुर में 60 हजार वर्ग मीटर सरकारी जमीन को रेट्रोफिटिंग के लिए प्रोजेक्ट में शामिल करने की बात कही गई।
अमृत योजना में 11.30 करोड़ के प्रोजेक्ट भेजे
शहर की 11 लाख की आबादी को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने पर मेयर ने कहा कि सीवर 55 प्रतिशत और पेयजल 80 फीसदी आबादी को उपलब्ध है। वाटर ट्रीटमेंट, नालों को कवर्ड करने समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए केंद्र सरकार की अमृत योजना में 11.30 करोड़ के प्रोजेक्ट भेजे गए हैं। अधिकांश प्रोजेक्ट सरकार से स्वीकृत होने की उम्मीद है।
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तीन चरणों में बनेगा प्रोजेक्ट
एजेंसी के टेक्निकल ऑफीसर अनुराग एंथोनी ने बताया कि स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट के लिए प्रथम चरण में शहर का आकलन, बुनियादी नागरिक सुविधाओं का आकलन और जनता की भागीदारी का मूल्यांकन किया जा रहा है। ये चरण अक्टूबर तक पूरा हो जाएगा। द्वितीय चरण में मास्टर और जोनल प्लान के अलावा जेएनएनयूआरएम योजना, पेयजल, सीवर आदि संसाधनों की आबादी के हिसाब से उपलब्धता और इनफार्मेशन कम्यूनीकेशन टेक्नॉलोजी सिटी (आई सिटी) के आंकड़े शामिल किये जाएंगे। तृतीय चरण में 30 नवंबर तक कंसल्टेंट एजेंसी नगर निगम और प्रशासनिक अफसरों के समक्ष स्मार्ट सिटी का ड्राफ्ट खाका पेश करेगी। 10 दिसंबर तक प्रोजेक्ट को फाइनल रूप देकर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को भेज दिया गया।
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जॉन बोर्नेट अमेरिका के पोर्टलैंड शहर के सिटी मैनेजर रह चुके हैं। अब उनकी कंसल्टेंट एजेंसी इंटरनेशनल सिटी काउंटी मैनेजमेंट बरेली और आगरा को स्मार्ट बनाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर रही है। जॉन बोर्नेट ने मेयर डा. आईएस तोमर से डोर टू डोर कूड़ा योजना, कूड़ा कलेक्शन और निस्तारण, यूजर चार्ज वसूली, नगर निगम की वार्षिक आय, सीवरेज सिस्टम, वाटर ड्रैनेज, पेयजल आपूर्ति, ट्रीटमेंट प्लांट समेत जनता की बुनियादी सुविधाओं की जानकारी की। नगर आयुक्त ने हाउस, वाटर और सीवर टैक्स समेत पेयजल आपूर्ति के बारे में बताया। नगर निगम की आमदनी के स्रोत क्या हैं। नागरिक सुविधाओं के लिए फंडिंग कहां-कहां से होती है आदि पर विचार किया गया। कंसल्टेंट एजेंसी के चीफ टेक्निकल ऑफीसर अनुराग एंथोनी ने बीडीए सचिव गरिमा यादव से 2021 का मास्टर प्लान और जोनल प्लान मांगा। बीडीए सचिव की ओर से कंसल्टेंट को रामगंगा नगर आवासीय योजना की जानकारी दी गई। हजियापुर में 60 हजार वर्ग मीटर सरकारी जमीन को रेट्रोफिटिंग के लिए प्रोजेक्ट में शामिल करने की बात कही गई।
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अमृत योजना में 11.30 करोड़ के प्रोजेक्ट भेजे
शहर की 11 लाख की आबादी को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने पर मेयर ने कहा कि सीवर 55 प्रतिशत और पेयजल 80 फीसदी आबादी को उपलब्ध है। वाटर ट्रीटमेंट, नालों को कवर्ड करने समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए केंद्र सरकार की अमृत योजना में 11.30 करोड़ के प्रोजेक्ट भेजे गए हैं। अधिकांश प्रोजेक्ट सरकार से स्वीकृत होने की उम्मीद है।
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तीन चरणों में बनेगा प्रोजेक्ट
एजेंसी के टेक्निकल ऑफीसर अनुराग एंथोनी ने बताया कि स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट के लिए प्रथम चरण में शहर का आकलन, बुनियादी नागरिक सुविधाओं का आकलन और जनता की भागीदारी का मूल्यांकन किया जा रहा है। ये चरण अक्टूबर तक पूरा हो जाएगा। द्वितीय चरण में मास्टर और जोनल प्लान के अलावा जेएनएनयूआरएम योजना, पेयजल, सीवर आदि संसाधनों की आबादी के हिसाब से उपलब्धता और इनफार्मेशन कम्यूनीकेशन टेक्नॉलोजी सिटी (आई सिटी) के आंकड़े शामिल किये जाएंगे। तृतीय चरण में 30 नवंबर तक कंसल्टेंट एजेंसी नगर निगम और प्रशासनिक अफसरों के समक्ष स्मार्ट सिटी का ड्राफ्ट खाका पेश करेगी। 10 दिसंबर तक प्रोजेक्ट को फाइनल रूप देकर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को भेज दिया गया।