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अफसरों में कशमकश! .. मंत्री के असंतोष पर रद्द वर्टिकल गार्डन पर हाथ डालेें या नहीं
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बरेली। यमुना विकास प्राधिकरण में 126 करोड़ का घोटाला करने के मामले में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के मिशन मैनेजर सतीश कुमार की ग्रेटर नोएडा में गिरफ्तारी के बाद अफसरों में इस कदर घबराहट फैल गई है कि पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की आपत्ति के बाद रद्द किए गए करीब तीन करोड़ के वर्टिकल गार्डन प्रोजेक्ट के लिए दोबारा टेेंडर मांगने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक दो दिन पहले टेंडर मांगने की पूरी तैयारी कर ली गई थी लेकिन सतीश कुमार की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही टेंडर की नई तारीख तय करने का मामला टाल दिया गया।
दरअसल अफसरों की इस घबराहट के पीछे वजह यह है कि सतीश कुमार को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में बतौर मिशन मैनेजर बगैर किसी वैधानिक प्रक्रिया के नियुक्त कर लिया था। सतीश कुमार जून 2018 से 126 करोड़ के घोटाले के आरोपी थे और इस घोटाले के मुख्य आरोपी यीडा के तत्कालीन सीईओ आईएएस पीसी गुप्ता की गिरफ्तारी तक हो चुकी थी। इसे नजरअंदाज कर सतीश कुमार की बगैर किसी विज्ञापन और जांच-पड़ताल के नियुक्ति करने को लेकर स्मार्ट सिटी के जिम्मेदार अफसर सवालों के घेरे में हैं। अब यह तक आरोप लग रहे हैं कि सतीश कुमार की घोटालेबाजी को उसकी क्वालिटी मानकर ही स्मार्ट सिटी में उसकी नियुक्ति की गई थी। स्मार्ट सिटी के मिशन मैनेजर के तौर पर उसने जो प्रोजेक्ट तैयार किए थे, उन पर पहले से ही उंगलियां उठ रही थीं।
इनमें सबसे ज्यादा विवादित प्रोजेक्ट करीब तीन करोड़ रुपये की लागत का श्यामगंज फ्लाईओवर, एसएसपी कार्यालय की दीवार, डीएम कंपाउंड और मानसिक अस्पताल के बाहर वर्टिकल गार्डन बनवाने का था जिसका प्रस्ताव पारित कराकर आननफानन में टेंडर भी मांग लिए गए थे। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने इस पर यह कहकर आपत्ति जताई थी कि चार वर्टिकल गार्डन बनवाने के लिए एक साथ टेंडर मांगना शासन की गाइड लाइन के विरुद्ध है और इससे राजस्व का भारी नुकसान होना तय है। केंद्रीय मंत्री के इस तेवर के बाद इसकी टेंडर प्रक्रिया रद्द कर दी गई। इसके बाद नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार ने भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में घोटालों पर एतराज किया था। सूत्रों के मुताबिक इसके बाद अफसर इसी सप्ताह दोबारा टेंडर मांगने की तैयारी कर रहे थे। दो दिन पहले यह तैयारी पूरी भी कर ली गई थी लेकिन सतीश कुमार की गिरफ्तारी के बाद इससे फिलहाल हाथ खींच लिए गए हैं।
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मीटिंग के एजेंडे पर दस्तखत करें या नहीं
बरेली। स्मार्ट सिटी के मिशन मैनेजर सतीश कुमार की गिरफ्तारी के बाद विभिन्न विभागों के उन अफसरों में दहशत फैल गई है जो 22 सौ करोड़ के इस प्रोजेक्ट से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं। नतीजा यह है कि ये अफसर स्मार्ट सिटी की बैठकों के एजेंडे तक पर हस्ताक्षर करने से पीछे हटने लगे हैं। अफसरों का कहना है कि बैठकों में सबकुछ बड़े अफसरों की मर्जी से तय होता है लेकिन बाद में सभी अधिकारियों से दस्तखत करा लिए जाते हैं। ऐसे में उन्हें बेवजह खुद भी फंसने की आशंका परेशान कर रही है। अपना नाम नहीं छपवाने की गुजारिश करते हुए एक अधिकारी ने बताया कि बैठक मे कई कामों पर उनके मूल तकनीक अनुभव के उलट सहमति बनती रही है। ऐसे में खतरा उनके लिए भी है। मंगलवार को हुई स्मार्ट सिटी की बैठक में इसका असर भी नजर आया। एक बड़े अफसर ने बैठक में खुद जाने के बजाय अपने अधीनस्थ अधिकारी का नाम दर्ज करा दिया। सूत्रों के मुताबिक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की परियोजनाओं की डीपीआर और एजेंडे बगैरह गोपनीय रखे जाते हैं। इस कारण इनकी खामियाें पर कोई चर्चा ही नहीं हो पाती है।
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दरअसल अफसरों की इस घबराहट के पीछे वजह यह है कि सतीश कुमार को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में बतौर मिशन मैनेजर बगैर किसी वैधानिक प्रक्रिया के नियुक्त कर लिया था। सतीश कुमार जून 2018 से 126 करोड़ के घोटाले के आरोपी थे और इस घोटाले के मुख्य आरोपी यीडा के तत्कालीन सीईओ आईएएस पीसी गुप्ता की गिरफ्तारी तक हो चुकी थी। इसे नजरअंदाज कर सतीश कुमार की बगैर किसी विज्ञापन और जांच-पड़ताल के नियुक्ति करने को लेकर स्मार्ट सिटी के जिम्मेदार अफसर सवालों के घेरे में हैं। अब यह तक आरोप लग रहे हैं कि सतीश कुमार की घोटालेबाजी को उसकी क्वालिटी मानकर ही स्मार्ट सिटी में उसकी नियुक्ति की गई थी। स्मार्ट सिटी के मिशन मैनेजर के तौर पर उसने जो प्रोजेक्ट तैयार किए थे, उन पर पहले से ही उंगलियां उठ रही थीं।
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इनमें सबसे ज्यादा विवादित प्रोजेक्ट करीब तीन करोड़ रुपये की लागत का श्यामगंज फ्लाईओवर, एसएसपी कार्यालय की दीवार, डीएम कंपाउंड और मानसिक अस्पताल के बाहर वर्टिकल गार्डन बनवाने का था जिसका प्रस्ताव पारित कराकर आननफानन में टेंडर भी मांग लिए गए थे। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने इस पर यह कहकर आपत्ति जताई थी कि चार वर्टिकल गार्डन बनवाने के लिए एक साथ टेंडर मांगना शासन की गाइड लाइन के विरुद्ध है और इससे राजस्व का भारी नुकसान होना तय है। केंद्रीय मंत्री के इस तेवर के बाद इसकी टेंडर प्रक्रिया रद्द कर दी गई। इसके बाद नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार ने भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में घोटालों पर एतराज किया था। सूत्रों के मुताबिक इसके बाद अफसर इसी सप्ताह दोबारा टेंडर मांगने की तैयारी कर रहे थे। दो दिन पहले यह तैयारी पूरी भी कर ली गई थी लेकिन सतीश कुमार की गिरफ्तारी के बाद इससे फिलहाल हाथ खींच लिए गए हैं।
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मीटिंग के एजेंडे पर दस्तखत करें या नहीं
बरेली। स्मार्ट सिटी के मिशन मैनेजर सतीश कुमार की गिरफ्तारी के बाद विभिन्न विभागों के उन अफसरों में दहशत फैल गई है जो 22 सौ करोड़ के इस प्रोजेक्ट से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं। नतीजा यह है कि ये अफसर स्मार्ट सिटी की बैठकों के एजेंडे तक पर हस्ताक्षर करने से पीछे हटने लगे हैं। अफसरों का कहना है कि बैठकों में सबकुछ बड़े अफसरों की मर्जी से तय होता है लेकिन बाद में सभी अधिकारियों से दस्तखत करा लिए जाते हैं। ऐसे में उन्हें बेवजह खुद भी फंसने की आशंका परेशान कर रही है। अपना नाम नहीं छपवाने की गुजारिश करते हुए एक अधिकारी ने बताया कि बैठक मे कई कामों पर उनके मूल तकनीक अनुभव के उलट सहमति बनती रही है। ऐसे में खतरा उनके लिए भी है। मंगलवार को हुई स्मार्ट सिटी की बैठक में इसका असर भी नजर आया। एक बड़े अफसर ने बैठक में खुद जाने के बजाय अपने अधीनस्थ अधिकारी का नाम दर्ज करा दिया। सूत्रों के मुताबिक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की परियोजनाओं की डीपीआर और एजेंडे बगैरह गोपनीय रखे जाते हैं। इस कारण इनकी खामियाें पर कोई चर्चा ही नहीं हो पाती है।