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Bareilly News: सुस्त जांच बनी ढाल... अफसर खुश, आरोपी भी निहाल

Wed, 21 Jun 2023 02:55 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jun 2023 02:55 AM IST
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Sluggish investigation became shield... officer happy, accused also happy
बरेली। स्वास्थ्य विभाग में खामियां उजागर होने पर उससे निबटने का नायाब तरीका खोज निकाला है। गर्दन बचाने के लिए अफसर जांच तो शुरू कराते हैं पर वह पूरी ही नहीं होती। पांच माह से कई मामलों की जांच लंबित है। जांच ही यह सुस्त चाल आरोपियों की ढाल बन रही है। जांच अधिकारी भी तेजी नहीं दिखाते, न ही उच्चाधिकारी तेजी के लिए उन पर दबाव बनाते हैं।
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बताया जाता है कि कुछ मामलों में अधिकारियों ने जांच कराने की बात तो कही पर लिखित आदेश नहीं होने से जांच शुरू ही नहीं हुई। मामला महज सुर्खियां बनकर रह गया। पिछले दिनों स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात डॉक्टरों के एक ग्रुप में जांच के नाम पर उच्चाधिकारियों की ओर से वसूली के आरोप भी लगे थे।
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मामला शासन स्तर तक पहुंचा। उच्चाधिकारियों के बयान दर्ज हों, उससे पहले ही गोपनीय बैठक हुई। चर्चा है कि बैठक में उच्चाधिकारियों ने चिकित्साधिकारियों को बुलाकर उनसे लिखवा लिया कि कोई अधिकारी वसूली नहीं करता। जबकि डॉक्टरों ने ट्रांसफर-पोस्टिंग और जांच दबाने के बदले वसूली किए जाने की बात ग्रुप में कही थी।
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नाले में फेंकी गई थीं फाइलेरिया की दवा
जनवरी में स्वास्थ्य विभाग ने फाइलेरिया अभियान चलाया था। जिले के 43 लाख लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाई जानी थी। दावा था कि 90 फीसदी लक्ष्य पूरा हो गया, लेकिन फरवरी में सुभाषनगर गन्ना मिल के नाले में हजारों की तादाद में फाइलेरिया की दवाएं मिलीं। दावों पर सवाल उठा तो अधिकारियों ने जांच शुरू कराई। दवा के बैच नंबर से पता चला कि इसकी आपूर्ति बरेली में ही की गई थी। आगे की जांच एसीएमओ डॉ. भानु प्रकाश को सौंपी गई। सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह का कहना है कि जांच पूरी हो गई है। रिपोर्ट में एक स्वास्थ्यकर्मी द्वारा रिकॉर्ड में गलत डाटा दर्ज करने का पता चला था। हालांकि, दवा किस स्वास्थ्य केंद्र की थी, क्यों फेंकी गई, क्या कार्रवाई हुई, इस पर वह जवाब नहीं दे सके।

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कोविड किट फेंकने की जांच भी अधूरी
तीन सौ बेड अस्पताल में पांच माह पहले बड़ी तादाद में कोविड जांच की सैकड़ों एंटीजन किट डस्टबिन में फेंक दी गई थीं। मामले का वीडियो वायरल होने पर सीएमओ ने जांच के निर्देश दिए। प्रकरण में स्वास्थ्यकर्मियों के बयान दर्ज हुए पर सभी ने इससे इन्कार कर दिया। मामला बढ़ता देख दो संविदा कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताई गई पर अब तक प्रकरण में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी अस्पताल में नलों की टोंटियां, ऑक्सीजन कन्संट्रेटर, डस्टबिन, पंखे और कई महंगे उपकरण भी चोरी हो गए थे। मामले की जांच शुरू हुई पर चोर का पता अब तक नहीं चल सका है। सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह का कहना है कि मामले की जांच चल रही है। स्टाफ की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
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