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Bareilly News: छह बार उजड़ी कोख...सातवीं बार में मिली मातृत्व की अनमोल खुशी
Wed, 30 Sep 2026 01:29 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Wed, 30 Sep 2026 01:29 AM IST
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बरेली। संजय नगर की अच्छू ने छह बार गर्भस्थ शिशुओं को खोने के बाद आखिरकार एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया है। एक साल तक चले विशेष चिकित्सकीय इलाज और निगरानी के बाद यह संभव हो पाया। इस सफलता ने परिवार में छह बार के मातम के बाद खुशियां लौटाई हैं।
20 वर्षीय अच्छू की शादी कृष्णा से हुई थी। पहली गर्भावस्था में उन्हें तीन शिशुओं को खोना पड़ा। दूसरी बार जुड़वां बच्चों की भी मौत हो गई। इसके बाद भी कई बार गर्भधारण हुआ, लेकिन हर बार गर्भस्थ शिशुओं की मौत का सामना करना पड़ा। छह बार मां बनने का सपना टूटने से परिवार के लिए यह एक कठिन समय था। दिसंबर 2025 में अच्छू ने जिला महिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ फरहाना से इलाज शुरू कराया। गर्भधारण के पहले ही माह से यह उपचार शुरू हुआ। करीब एक साल तक नियमित उपचार और कड़ी निगरानी में गर्भावस्था को आगे बढ़ाया गया। इस वर्ष 20 नवंबर को अच्छू ने निजी अस्पताल में सिजेरियन प्रसव से बच्ची को जन्म दिया।
चिकित्सकीय सलाह और उपचार
जिला महिला अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ फरहाना ने बताया कि बार-बार गर्भपात होने पर महिला को घबराने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे मामलों में समय पर जांच और उचित इलाज महत्वपूर्ण है। आयरन कैल्शियम की दवा के साथ खून को पतला करने वाली दवाएं भी दी जाती हैं। दरअसल, खून गाढ़ा होने से गर्भधारण के दौरान थक्का बनने से गर्भपात की अधिक आशंका होती है।
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फरहाना के अनुसार, अच्छू ने समय पर उनसे संपर्क किया। उनकी खून की जरूरी जांचें कराई गईं और आवश्यक इलाज दिया गया। इसी उपचार के कारण अच्छू एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दे पाईं। उन्होंने यह भी बताया कि देर से शादी होने पर भी ऐसे मामले सामने आते हैं। यह मामला समय पर सही चिकित्सकीय हस्तक्षेप के महत्व को दर्शाता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
पहली बार गर्भपात होने के बाद अगर दोबारा से गर्भधारण का प्लान है तो दंपती आनुवंशिक परीक्षण करवाएं।
डॉक्टर की सलाह पर हार्मोनल असंतुलन, गर्भाशय की बनावट, थायरॉयड, मधुमेह समेत अन्य जांचें जरूर करवाएं।
डॉक्टर की सलाह से गर्भधारण से कुछ महीने पहले ही फॉलिक एसिड लेना शुरू कर दें।
महिला अपने खानपान में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, दालें और प्रोटीन युक्त आहार को शामिल करें।
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें।
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20 वर्षीय अच्छू की शादी कृष्णा से हुई थी। पहली गर्भावस्था में उन्हें तीन शिशुओं को खोना पड़ा। दूसरी बार जुड़वां बच्चों की भी मौत हो गई। इसके बाद भी कई बार गर्भधारण हुआ, लेकिन हर बार गर्भस्थ शिशुओं की मौत का सामना करना पड़ा। छह बार मां बनने का सपना टूटने से परिवार के लिए यह एक कठिन समय था। दिसंबर 2025 में अच्छू ने जिला महिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ फरहाना से इलाज शुरू कराया। गर्भधारण के पहले ही माह से यह उपचार शुरू हुआ। करीब एक साल तक नियमित उपचार और कड़ी निगरानी में गर्भावस्था को आगे बढ़ाया गया। इस वर्ष 20 नवंबर को अच्छू ने निजी अस्पताल में सिजेरियन प्रसव से बच्ची को जन्म दिया।
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चिकित्सकीय सलाह और उपचार
जिला महिला अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ फरहाना ने बताया कि बार-बार गर्भपात होने पर महिला को घबराने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे मामलों में समय पर जांच और उचित इलाज महत्वपूर्ण है। आयरन कैल्शियम की दवा के साथ खून को पतला करने वाली दवाएं भी दी जाती हैं। दरअसल, खून गाढ़ा होने से गर्भधारण के दौरान थक्का बनने से गर्भपात की अधिक आशंका होती है।
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फरहाना के अनुसार, अच्छू ने समय पर उनसे संपर्क किया। उनकी खून की जरूरी जांचें कराई गईं और आवश्यक इलाज दिया गया। इसी उपचार के कारण अच्छू एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दे पाईं। उन्होंने यह भी बताया कि देर से शादी होने पर भी ऐसे मामले सामने आते हैं। यह मामला समय पर सही चिकित्सकीय हस्तक्षेप के महत्व को दर्शाता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
पहली बार गर्भपात होने के बाद अगर दोबारा से गर्भधारण का प्लान है तो दंपती आनुवंशिक परीक्षण करवाएं।
डॉक्टर की सलाह पर हार्मोनल असंतुलन, गर्भाशय की बनावट, थायरॉयड, मधुमेह समेत अन्य जांचें जरूर करवाएं।
डॉक्टर की सलाह से गर्भधारण से कुछ महीने पहले ही फॉलिक एसिड लेना शुरू कर दें।
महिला अपने खानपान में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, दालें और प्रोटीन युक्त आहार को शामिल करें।
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें।