{"_id":"672be1c4b0c6b0f9040ae287","slug":"six-murders-in-two-and-a-half-decades-in-mustache-fight-bareilly-news-c-4-bly1015-516103-2024-11-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: मूंछ की लड़ाई में ढाई दशक में छह हत्याएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: मूंछ की लड़ाई में ढाई दशक में छह हत्याएं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भुता (बरेली)। खरदाह गांव कुर्मी बिरादरी के क्षत्रपों की मूंछ की लड़ाई में बर्बाद होता रहा है। यहां ढाई दशक में छह लोगों की हत्या हो चुकी है। प्रभुत्व बनाने के लिए मारपीट और झगड़ा यहां आम बात है।
जेल में बंद हिस्ट्रीशीटर पूरनलाल का परिवार शुरू से दबंगई व आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहा है। पूरनलाल के दादा रोशन लाल सिंह व दूसरे पक्ष के मास्टर रामभरोसे लाल के बीच वर्चस्व की लड़ाई 25 वर्षों से चल रही थी। सबसे पहले 1992 में रामभरोसे लाल के भतीजे सुरेश की हत्या की गई। इसमें पूरनलाल के दादा रोशन लाल गंगवार व पिता हरदयाल गंगवार का नाम आया था। इसी वर्चस्व की लड़ाई में वर्ष 1993 में पूरनलाल के दादा रोशनलाल की बीसलपुर के गांव हेतमनगरा में हत्या कर दी गई। इसके प्रतिशोध में दूसरे पक्ष के रामभरोसे लाल की 1994 में गांव के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। बाद में पूरनलाल के पिता हरदयाल की हत्या मास्टर रामभरोसे पक्ष के लोगों ने बीसलपुर में 1995 में गोली मारकर कर दी। यह सिलसिला एक दूसरे पर वर्चस्व कायम करने के लिए चलता आ रहा है। संवाद
-- -- -
सियासी आकाओं की मदद से मजबूत हुआ पूरनलाल
- दादा व पिता की हत्या के बाद पूरनलाल ने दबंगई शुरू की। गांव में दूसरा पक्ष कमजोर पड़ गया। पूरनलाल ने गांव की प्रधानी जीत ली और बड़े नेताओं के संपर्क में आ गया। उसने जुगाड़ भिड़ाकर अपनी पत्नी को जिला पंचायत का टिकट दिलवा दिया। पत्नी चुनाव जीत गई तो पूरनलाल का कद और बढ़ गया। उसकी परिवार के ही विनोद गंगवार से प्रधानी चुनाव की रंजिश थी। इसमें भी एक बेशकीमती प्लॉट को लेकर विनोद ने पूरनलाल को चुनौती दे दी। वर्चस्व की विरासत संभालते हुए पूरनलाल के इशारे पर उसके चचेरे भाई पवन ने 2021 में विनोद की गोली मारकर हत्या कर दी। इसमें पवन अभी जेल में है। मुकदमे में पूरनलाल व उसके भाई अर्जुन भी नामजद थे जो नेताओं की शरण लेकर साफ बच गए। विनोद की हत्या का मुकदमा अंतिम चरण में है। वादी के तौर पर विनोद के भाई पुष्पेंद्र पैरवी कर रहे थे। इसी रंजिश में अब पुष्पेंद्र की हत्या कर दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
जेल में बंद हिस्ट्रीशीटर पूरनलाल का परिवार शुरू से दबंगई व आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहा है। पूरनलाल के दादा रोशन लाल सिंह व दूसरे पक्ष के मास्टर रामभरोसे लाल के बीच वर्चस्व की लड़ाई 25 वर्षों से चल रही थी। सबसे पहले 1992 में रामभरोसे लाल के भतीजे सुरेश की हत्या की गई। इसमें पूरनलाल के दादा रोशन लाल गंगवार व पिता हरदयाल गंगवार का नाम आया था। इसी वर्चस्व की लड़ाई में वर्ष 1993 में पूरनलाल के दादा रोशनलाल की बीसलपुर के गांव हेतमनगरा में हत्या कर दी गई। इसके प्रतिशोध में दूसरे पक्ष के रामभरोसे लाल की 1994 में गांव के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। बाद में पूरनलाल के पिता हरदयाल की हत्या मास्टर रामभरोसे पक्ष के लोगों ने बीसलपुर में 1995 में गोली मारकर कर दी। यह सिलसिला एक दूसरे पर वर्चस्व कायम करने के लिए चलता आ रहा है। संवाद
विज्ञापन
सियासी आकाओं की मदद से मजबूत हुआ पूरनलाल
- दादा व पिता की हत्या के बाद पूरनलाल ने दबंगई शुरू की। गांव में दूसरा पक्ष कमजोर पड़ गया। पूरनलाल ने गांव की प्रधानी जीत ली और बड़े नेताओं के संपर्क में आ गया। उसने जुगाड़ भिड़ाकर अपनी पत्नी को जिला पंचायत का टिकट दिलवा दिया। पत्नी चुनाव जीत गई तो पूरनलाल का कद और बढ़ गया। उसकी परिवार के ही विनोद गंगवार से प्रधानी चुनाव की रंजिश थी। इसमें भी एक बेशकीमती प्लॉट को लेकर विनोद ने पूरनलाल को चुनौती दे दी। वर्चस्व की विरासत संभालते हुए पूरनलाल के इशारे पर उसके चचेरे भाई पवन ने 2021 में विनोद की गोली मारकर हत्या कर दी। इसमें पवन अभी जेल में है। मुकदमे में पूरनलाल व उसके भाई अर्जुन भी नामजद थे जो नेताओं की शरण लेकर साफ बच गए। विनोद की हत्या का मुकदमा अंतिम चरण में है। वादी के तौर पर विनोद के भाई पुष्पेंद्र पैरवी कर रहे थे। इसी रंजिश में अब पुष्पेंद्र की हत्या कर दी गई।
विज्ञापन