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Bareilly News: कृषि और भूमि संरक्षण विभाग में वित्तीय अनियमितता की जांच करेगी एसआईटी
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बरेली। कृषि और भूमि संरक्षण विभाग की योजनाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। प्राथमिक जांच में गड़बड़ियां सामने आने पर मंडलायुक्त ने एसआईटी से विस्तृत जांच कराने के लिए कृषि विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। शासन स्तर पर कमेटी गठित की जा रही है।
सत्र 2021-22 में पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती (25 सितंबर) पर प्रत्येक विकास खंड में एक दिवसीय किसान कल्याण मेला लगाने के लिए कृषि विभाग को 21.56 लाख रुपये दिए गए थे। उस तिथि पर मेला तो लगाया गया, लेकिन अधिकतर धनराशि का बंदरबांट कर लिया गया। शिकायत के बाद हुई जांच में पता चला कि तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र कुमार ने 14,500 रुपये अपने खाते में लिए थे।
इसी तरह, दो अन्य अधिकारियों और 49 कर्मचारियों ने मेले की धनराशि अपने खाते में ली थी। सीडीओ की निगरानी में दो वर्ष तक चली जांच में स्पष्ट हुआ कि 5,57,663 रुपये का गबन हुआ है। अधिकारियों और कर्मचारियों के निलंबन और उनसे रकम की रिकवरी की संस्तुति होने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।
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भूमि संरक्षण अधिकारी ने नहीं दिए अभिलेख
इसी बीच भूमि संरक्षण विभाग को वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी) योजना के लिए दी गई 22 करोड़ की धनराशि में बंदरबांट का मामला सामने आया। 104 गांवों की ऊसर और बाढ़ ग्रस्त भूमि को मेड़बंदी, समतलीकरण आदि कार्यों के जरिये कृषि योग्य बनाना था। संयुक्त विकास आयुक्त प्रदीप कुमार ने टेक्निकल कमेटी से इसकी जांच कराई तो कई गड़बड़ियां सामने आईं। जांच टीम ने अभिलेख मांगे तो भूमि संरक्षण अधिकारी संजय कुमार ने उसे उपलब्ध नहीं कराया। यह दोनों मामले मंडलायुक्त के सामने पहुंचे। उन्होंने 96 पेज की कमेटी की रिपोर्ट, 259 पेज की संयुक्त कृषि निदेशक की जांच रिपोर्ट और भूमि संरक्षण अधिकारी से अभिलेख लेने के लिए छह बार किए गए पत्राचार का विवरण कृषि विभाग के प्रमुख सचिव को भेजा है। दोनों मामलों की जांच एसआईटी से कराने की संस्तुति की है। ब्यूरो
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कृषि और भूमि संरक्षण विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायत पूर्व विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल ने की थी। इसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की आशंका है। इसलिए एसआईटी से जांच कराने के लिए प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। - सौम्या अग्रवाल, मंडलायुक्त
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सत्र 2021-22 में पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती (25 सितंबर) पर प्रत्येक विकास खंड में एक दिवसीय किसान कल्याण मेला लगाने के लिए कृषि विभाग को 21.56 लाख रुपये दिए गए थे। उस तिथि पर मेला तो लगाया गया, लेकिन अधिकतर धनराशि का बंदरबांट कर लिया गया। शिकायत के बाद हुई जांच में पता चला कि तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र कुमार ने 14,500 रुपये अपने खाते में लिए थे।
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इसी तरह, दो अन्य अधिकारियों और 49 कर्मचारियों ने मेले की धनराशि अपने खाते में ली थी। सीडीओ की निगरानी में दो वर्ष तक चली जांच में स्पष्ट हुआ कि 5,57,663 रुपये का गबन हुआ है। अधिकारियों और कर्मचारियों के निलंबन और उनसे रकम की रिकवरी की संस्तुति होने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।
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भूमि संरक्षण अधिकारी ने नहीं दिए अभिलेख
इसी बीच भूमि संरक्षण विभाग को वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी) योजना के लिए दी गई 22 करोड़ की धनराशि में बंदरबांट का मामला सामने आया। 104 गांवों की ऊसर और बाढ़ ग्रस्त भूमि को मेड़बंदी, समतलीकरण आदि कार्यों के जरिये कृषि योग्य बनाना था। संयुक्त विकास आयुक्त प्रदीप कुमार ने टेक्निकल कमेटी से इसकी जांच कराई तो कई गड़बड़ियां सामने आईं। जांच टीम ने अभिलेख मांगे तो भूमि संरक्षण अधिकारी संजय कुमार ने उसे उपलब्ध नहीं कराया। यह दोनों मामले मंडलायुक्त के सामने पहुंचे। उन्होंने 96 पेज की कमेटी की रिपोर्ट, 259 पेज की संयुक्त कृषि निदेशक की जांच रिपोर्ट और भूमि संरक्षण अधिकारी से अभिलेख लेने के लिए छह बार किए गए पत्राचार का विवरण कृषि विभाग के प्रमुख सचिव को भेजा है। दोनों मामलों की जांच एसआईटी से कराने की संस्तुति की है। ब्यूरो
कृषि और भूमि संरक्षण विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायत पूर्व विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल ने की थी। इसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की आशंका है। इसलिए एसआईटी से जांच कराने के लिए प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। - सौम्या अग्रवाल, मंडलायुक्त