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कल से खरमास, नहीं होंगे मांगलिक कार्य
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शादी
- फोटो : अमर उजाला
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इसके बाद डूबेंगे सूप, 25 अप्रैल से शुरू होंगे विवाह
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बरेली। 16 दिसंबर से खरमास प्रारंभ हो रहे हैं। 13 जनवरी 2021 तक खरमास रहेगा। सूर्य जब गुरु ग्रह की राशि में आता है और जिस अवधि तक रहता है उसको खरमास कहते हैं। गुरु ग्रह की 2 राशियां हैं प्रथम धनु और द्वितीय मीन राशि अभी 16 दिसंबर सन 2020 से 13 जनवरी 2021 तक सूर्य धनु राशि में रहेगा। यह अवधि खरमास कही जाती है।
विश्व पंचांग काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अनुसार गुरु क्षेत्र में भानु अर्थात सूर्य का आना अथवा सूर्य और गुरु का एक राशि में स्थित होना गुरु आदित्य नाम दोष कहा जाता है। इस अवधि में व्रतबंध विवाह आदि कर्मों को त्याग दिया जाता है। शौनक ऋषि का मानना था कि इसी अवधि में यदि कोई कार्य किया जाता है तो उसको दोबारा करना पड़ता है। यदि दोबारा विवाह करना पड़े तो यह एक दोष की उत्पत्ति होती है। पंडित अनुपम कौशिक इंदीवर ने बताया कि विवाह के समय सूर्य धनु राशि में होगा जो कि गुरु की राशि है तो दूल्हा धर्म कर्म में इतना व्यस्त हो जाएगा कि वह सांसारिक वैवाहिक संबंधों में रुचि नहीं लेगा।
14 फरवरी 2021 से शुक्र ग्रह अस्त है; जो ग्रह सूर्य के साथ आ जाता है उसे अस्त माना जाता है। वैवाहिक गतिविधियों के लिए शुक्र का होना जरूरी होता है। पुरुष में शुक्र की कमी होगी तो संतान उत्पत्ति में बाधा होगी। 14 मार्च 2021 से 13 अप्रैल तक सूर्य मीन राशि में रहेगा यह खरमास का द्वितीय चरण होता है अत: यहां भी विवाह आदि नहीं होते हैं। 18 अप्रैल 2021 शुक्र उदय होने से शुभ कार्य प्रारंभ होंगे, लेकिन विवाह की लगन चैत्र शुक्ल त्रयोदशी 25 अप्रैल 2021 शुरू होगी। पंडित अनुपम कौशिक इंदीवर ने बताया कि विवाह के संबंध में जल्दबाजी में कोई कार्य नहीं करना चाहिए क्योंकि यह उम्र भर का बंधन होता है।
विश्व पंचांग काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अनुसार गुरु क्षेत्र में भानु अर्थात सूर्य का आना अथवा सूर्य और गुरु का एक राशि में स्थित होना गुरु आदित्य नाम दोष कहा जाता है। इस अवधि में व्रतबंध विवाह आदि कर्मों को त्याग दिया जाता है। शौनक ऋषि का मानना था कि इसी अवधि में यदि कोई कार्य किया जाता है तो उसको दोबारा करना पड़ता है। यदि दोबारा विवाह करना पड़े तो यह एक दोष की उत्पत्ति होती है। पंडित अनुपम कौशिक इंदीवर ने बताया कि विवाह के समय सूर्य धनु राशि में होगा जो कि गुरु की राशि है तो दूल्हा धर्म कर्म में इतना व्यस्त हो जाएगा कि वह सांसारिक वैवाहिक संबंधों में रुचि नहीं लेगा।
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14 फरवरी 2021 से शुक्र ग्रह अस्त है; जो ग्रह सूर्य के साथ आ जाता है उसे अस्त माना जाता है। वैवाहिक गतिविधियों के लिए शुक्र का होना जरूरी होता है। पुरुष में शुक्र की कमी होगी तो संतान उत्पत्ति में बाधा होगी। 14 मार्च 2021 से 13 अप्रैल तक सूर्य मीन राशि में रहेगा यह खरमास का द्वितीय चरण होता है अत: यहां भी विवाह आदि नहीं होते हैं। 18 अप्रैल 2021 शुक्र उदय होने से शुभ कार्य प्रारंभ होंगे, लेकिन विवाह की लगन चैत्र शुक्ल त्रयोदशी 25 अप्रैल 2021 शुरू होगी। पंडित अनुपम कौशिक इंदीवर ने बताया कि विवाह के संबंध में जल्दबाजी में कोई कार्य नहीं करना चाहिए क्योंकि यह उम्र भर का बंधन होता है।
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