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घरों में मजलिसें करने के बजाय टीवी पर सुनें उलमा की तकरीर
सार
मोहर्रम पर शिया उलमा का बड़ा फैसला
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- फोटो : demo photo
विस्तार
जुलूसों की ऑनलाइन करें जियारत, बूढ़े, बच्चे और महिलाएं न हों शामिल
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बरेली। कोविड-19 के चलते मोहर्रम के लिए इस बार उलमा ने कई अहम और बड़े फैसले लिए हैं। इस बात की भी इजाजत दी गई है कि लोग जहां तक मुमकिन हो, घरों में मजलिसें करने से बचें। टीवी पर प्रसारित होने वाली उलमा या जाकिरोें की मजलिसी तकरीरों को सुनें। हालात के मद्देनजर भीड़भाड़ से बचना बेहद जरूरी है।
शिया आसिफी जामा मस्जिद के इमामे जुमा मौलाना शमशुल हसन खां ने बताया कि मोहर्रम को लेकर पिछले दिनों लखनऊ में एक बैठक हुई, इसमें तमाम शहरों के शिया उलमा ऑनलाइन शामिल हुए। इसमें कोरोना संक्रमण को देखते हुए मोहर्रम के कार्यक्रमों को किस तरह से संपन्न कराया जाए, इस पर तमाम उलमा और दानिशवरों की राय ली गई। अंत में सभी के मशविरों पर गौर-ओ-फिक्त्रस् करने के बाद कई अहम फैसले लिए गए। मौलाना शमसुल हसन ने बताया कि इस बार कोशिश की जा रही है की मोहर्रम पर निकलने वाले जुलूस में उतने ही लोग शामिल हों, जितनों की प्रशासन परमीशन दे। जुलूस की जियारत लोग ऑनलाइन कर सकते हैं। जुलूस को ऑनलाइन प्रसारित करने की व्यवस्था रहेगी। जुलूस खासतौर से बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को शामिल न होने की हिदायत दी गई है।
दूसरा मामला मजलिसों का है। मजलिस तो इमामबाड़ों में आयोजित की जाएंगी, लेकिन इनमें चंद लोग ही शामिल होंगे। जो लोग शामिल होंगे उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखना होगा। इमामबाड़ों में हाथ धोने के लिए साबुन और मास्क की व्यवस्था करने को कहा गया है। जहां तक घरों की मजलिस का सवाल है तो लोग घरों पर भीड़ इकट्ठी न करें। चंद लोगों के साथ ही मजलिस करें। बेहतर तो यह होगा लोग टीवी पर दिखाई जाने वाली मजलिस को घरों में बैठकर देखें और सुनें।
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शिया आसिफी जामा मस्जिद के इमामे जुमा मौलाना शमशुल हसन खां ने बताया कि मोहर्रम को लेकर पिछले दिनों लखनऊ में एक बैठक हुई, इसमें तमाम शहरों के शिया उलमा ऑनलाइन शामिल हुए। इसमें कोरोना संक्रमण को देखते हुए मोहर्रम के कार्यक्रमों को किस तरह से संपन्न कराया जाए, इस पर तमाम उलमा और दानिशवरों की राय ली गई। अंत में सभी के मशविरों पर गौर-ओ-फिक्त्रस् करने के बाद कई अहम फैसले लिए गए। मौलाना शमसुल हसन ने बताया कि इस बार कोशिश की जा रही है की मोहर्रम पर निकलने वाले जुलूस में उतने ही लोग शामिल हों, जितनों की प्रशासन परमीशन दे। जुलूस की जियारत लोग ऑनलाइन कर सकते हैं। जुलूस को ऑनलाइन प्रसारित करने की व्यवस्था रहेगी। जुलूस खासतौर से बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को शामिल न होने की हिदायत दी गई है।
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दूसरा मामला मजलिसों का है। मजलिस तो इमामबाड़ों में आयोजित की जाएंगी, लेकिन इनमें चंद लोग ही शामिल होंगे। जो लोग शामिल होंगे उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखना होगा। इमामबाड़ों में हाथ धोने के लिए साबुन और मास्क की व्यवस्था करने को कहा गया है। जहां तक घरों की मजलिस का सवाल है तो लोग घरों पर भीड़ इकट्ठी न करें। चंद लोगों के साथ ही मजलिस करें। बेहतर तो यह होगा लोग टीवी पर दिखाई जाने वाली मजलिस को घरों में बैठकर देखें और सुनें।
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