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‘वन हेल्थ वन मिशन’ पर काम करेें वैज्ञानिक
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वैज्ञानिकों से बातचीत करते केंद्रीय मंत्री।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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केंद्रीय मंत्री गिरिराज ने मानव के साथ ही पशु पक्षियों को स्वस्थ बनाकर समग्र विकास पर दिया जोर
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कहा, देश की 70 फीसदी ग्रामीण आबादी में रह रहीं महिलाओं को भी पशुपालन से जोड़ें
बरेली। तीन दिवसीय दौरे पर बरेली आए केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री गिरिराज सिंह ने शनिवार को आईवीआरआई के वैज्ञानिकों को ‘वन हेल्थ वन मिशन’ पर शोध करने का सुझाव दिया। उन्होंने कोरोना काल में कोविड सैंपल की जांच के साथ मानवों का सहयोग और पशु पक्षियों को भी रोग मुक्त करने के प्रयासों की सराहना की। कहा, देश के समग्र विकास के लिए मानव के साथ पशुओं को भी स्वस्थ बनाना जरूरी है।
भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के विभागों और अनुभागों का निरीक्षण करने के बाद केंद्रीय मंत्री ने वैज्ञानिकों को वर्चुअल संबोधित किया। संग्रहालय परिसर में पौधरोपण किया। वर्ष 2050 तक जनसंख्या विस्फोट होने की आशंका जताते हुए वैज्ञानिकों को चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहने का सुझाव दिया।
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उन्होंने कहा कि पशुपालन से देश के 20 करोड़ लोग जुड़े हैं। देश की 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को पशुपालन से जोड़ना जरूरी है। ग्रामीण महिलाओं से भी पशुपालन की अपील की। आईवीआरआई और सीएआरआई को पशु-पक्षियों का ‘एम्स’ बताते हुए देश के सभी पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान प्रयोगशालाओं को इंटरनेट से जोड़ने पर जोर दिया। ताकि देश में कहीं के भी किसी पशु रोग के निदान या जांचों की क्रॉस चेकिंग हो सके।
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संस्थान के इतिहास, कार्यों की दी जानकारी
इससे पहले भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. बीएन त्रिपाठी ने संस्थान के टीका विकास, नैदानिकों के विकास, बीमारियों के नियंत्रण आदि का परिचय दिया। संस्थान निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने संस्थान द्वारा विकसित पशु रोगों के टीके शीप पॉक्स, आईबीडी, रूसेला, क्लासिकल स्वाइन फीवर आदि की जानकारी दी। कोरोना काल में दो लाख दस हजार आरटीपीसीआर जांच किए जाने की जानकारी दी। बताया, पशुचिकित्सा विज्ञान को लोगों तक पहुंचाने के लिए एजुकेशनल वीडियो और मोबाइल एप बनाया है। राष्ट्रीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम को वर्चुअल शुरू करने का प्रयास है।
स्मृति उपवन का आज करेंगे उद्घाटन
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह रविवार को दिल्ली जाने से पहले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के स्मृति उपवन का उद्घाटन सुबह 9:40 बजे करेंगे। इसके बाद कोविड से दिवंगत लोगों के परिजनों से मुलाकात करेंगे। साढ़े दस बजे फैकल्टी मेंबर से संवाद, कुलपति से विश्वविद्यालय की गतिविधियों की जानकारी लेकर आगे रवाना होंगे। मंत्री के विश्वविद्यालय में स्वागत की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
यह रहे मौजूद
कार्यक्रम में वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. सत्यवीर सिंह मलिक, पशुपालन आयुक्त भारत सरकार डॉ. प्रवीण मलिक, संयुक्त सचिव डॉ. ओपी चौधरी, आईसीएआर के सहायक महानिदेशक डॉ. विशेष सक्सेना, सीएआरआई के निदेशक डॉ. एके तिवारी, रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह, यूनिट प्रभारी बृजेंद्र कुमार पंवार समेत संस्थान के सभी संयुक्त निदेशक मौजूद रहे।
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कहा, देश की 70 फीसदी ग्रामीण आबादी में रह रहीं महिलाओं को भी पशुपालन से जोड़ें बरेली। तीन दिवसीय दौरे पर बरेली आए केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री गिरिराज सिंह ने शनिवार को आईवीआरआई के वैज्ञानिकों को ‘वन हेल्थ वन मिशन’ पर शोध करने का सुझाव दिया। उन्होंने कोरोना काल में कोविड सैंपल की जांच के साथ मानवों का सहयोग और पशु पक्षियों को भी रोग मुक्त करने के प्रयासों की सराहना की। कहा, देश के समग्र विकास के लिए मानव के साथ पशुओं को भी स्वस्थ बनाना जरूरी है।
भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के विभागों और अनुभागों का निरीक्षण करने के बाद केंद्रीय मंत्री ने वैज्ञानिकों को वर्चुअल संबोधित किया। संग्रहालय परिसर में पौधरोपण किया। वर्ष 2050 तक जनसंख्या विस्फोट होने की आशंका जताते हुए वैज्ञानिकों को चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहने का सुझाव दिया।
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उन्होंने कहा कि पशुपालन से देश के 20 करोड़ लोग जुड़े हैं। देश की 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को पशुपालन से जोड़ना जरूरी है। ग्रामीण महिलाओं से भी पशुपालन की अपील की। आईवीआरआई और सीएआरआई को पशु-पक्षियों का ‘एम्स’ बताते हुए देश के सभी पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान प्रयोगशालाओं को इंटरनेट से जोड़ने पर जोर दिया। ताकि देश में कहीं के भी किसी पशु रोग के निदान या जांचों की क्रॉस चेकिंग हो सके।
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