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हंसते-खिलखिलाते देखा तो गोद ले लिया
बरेली
Updated Mon, 05 Jan 2015 01:42 AM IST
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एडी बेसिक
एडी बेसिक शशि देवी शर्मा ने क्यारा ब्लाक के कांधरपुर का प्राइमरी स्कूल इसलिए पसंद किया है क्योंकि यह शहर से बेहद सटा हुआ है। लाल फाटक पार करते ही यह स्कूल है इसलिए उन्होंने इसे गोद लेकर मॉडल बनाना ज्यादा बेहतर समझा। इस स्कूल में पांच शिक्षक हैं। खास बात यह है कि यह विद्यालय क्यारा ब्लाक के खंड शिक्षाधिकारी का कार्यालय भी है।
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बीएसए
बीएसए देवेंद्र स्वरूप सचान ने जो दो स्कूल गोद लिए हैं उनमें एक तो उनके दफ्तर से सटा सुभाषनगर का प्राइमरी स्कूल है। दूसरा बिथरी चैनपुर ब्लाक के डोहरा गांव का प्राइमरी स्कूल है। यह स्कूल भी शहर में पीलीभीत बाईपास से बेहद सटा हुआ है। डोहरा के स्कूल में छह शिक्षक कार्यरत हैं। यह ऐसा स्कूल हैं जहां तैनाती पाने के लिए शिक्षकों को जोड़तोड़ करनी पड़ी है।
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। शहर से सटे हुए ब्लाक क्यारा और बिथरी चैनपुर के बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में एचआरए लागू होता है। इसलिए इन स्कूलों में तैनाती के लिए शिक्षक लालायित रहते हैं। शिक्षकों की तरह बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने भी इन्हीं स्कूलों को ही मॉडल बनाने के लिए चुना है ताकि दौड़भाग की जहमत से बच सकें। एडी बेसिक और बीएसए के अलावा खंड शिक्षाधिकारियों ने भी जिन स्कूलों को शासन के आदेश पर गोद लिया है, वे शहर से सटे हुए हैं। दूर ग्रामीण अंचल के जिन स्कूलों को वाकई मॉडल बनाने की जरूरत थी, अफसरों ने उन्हें गोद लेना अपने लिए बेहतर नहीं समझा। बिथरीचैनपुर ब्लाक की खंड शिक्षाधिकारी अकीला आदिल ने अपने लिए दो स्कूल चुने हैं। ठिरिया और सुंदरपुर के प्राथमिक विद्यालय। दोनों गांव तक पहुंचने के लिए मुख्य मार्ग से ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ा। यही स्थिति अन्य ब्लाकों के खंड शिक्षाधिकारियों की है।
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इंसेट...
दो सौ से ज्यादा स्कूलों में शिक्षक नहीं
शिक्षाधिकारी अच्छे स्कूलों को ही झूठमूठ अच्छा बनाकर दिखाने के लिए गोद लेने में लगे हैं और जिले में दो सौ से ज्यादा परिषदीय स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। दूरदराज ग्रामीण अंचल के यह स्कूल या तो शिक्षामित्र खोल रहे हैं और दूसरे स्कूलों के शिक्षक को अटैच करके इन्हें चलवाया भर जा रहा है। जबकि हालात यह हैं कि शहर से सटे ब्लाकों के तमाम स्कूलों में मानक से भी अधिक शिक्षकों की भरमार है।
वर्जन...
पास के स्कूलों में ज्यादा दौरे कर सकेंगे इस लिहाज से इन्हें गोद लिया है और वैसे भी शासन से ऐसे कोई निर्देश नहीं थे कि दूर के स्कूल ही गोद लेने हैं।
-देवेंद्र स्वरूप सचान, बीएसए
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एडी बेसिक शशि देवी शर्मा ने क्यारा ब्लाक के कांधरपुर का प्राइमरी स्कूल इसलिए पसंद किया है क्योंकि यह शहर से बेहद सटा हुआ है। लाल फाटक पार करते ही यह स्कूल है इसलिए उन्होंने इसे गोद लेकर मॉडल बनाना ज्यादा बेहतर समझा। इस स्कूल में पांच शिक्षक हैं। खास बात यह है कि यह विद्यालय क्यारा ब्लाक के खंड शिक्षाधिकारी का कार्यालय भी है।
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बीएसए
बीएसए देवेंद्र स्वरूप सचान ने जो दो स्कूल गोद लिए हैं उनमें एक तो उनके दफ्तर से सटा सुभाषनगर का प्राइमरी स्कूल है। दूसरा बिथरी चैनपुर ब्लाक के डोहरा गांव का प्राइमरी स्कूल है। यह स्कूल भी शहर में पीलीभीत बाईपास से बेहद सटा हुआ है। डोहरा के स्कूल में छह शिक्षक कार्यरत हैं। यह ऐसा स्कूल हैं जहां तैनाती पाने के लिए शिक्षकों को जोड़तोड़ करनी पड़ी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। शहर से सटे हुए ब्लाक क्यारा और बिथरी चैनपुर के बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में एचआरए लागू होता है। इसलिए इन स्कूलों में तैनाती के लिए शिक्षक लालायित रहते हैं। शिक्षकों की तरह बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने भी इन्हीं स्कूलों को ही मॉडल बनाने के लिए चुना है ताकि दौड़भाग की जहमत से बच सकें। एडी बेसिक और बीएसए के अलावा खंड शिक्षाधिकारियों ने भी जिन स्कूलों को शासन के आदेश पर गोद लिया है, वे शहर से सटे हुए हैं। दूर ग्रामीण अंचल के जिन स्कूलों को वाकई मॉडल बनाने की जरूरत थी, अफसरों ने उन्हें गोद लेना अपने लिए बेहतर नहीं समझा। बिथरीचैनपुर ब्लाक की खंड शिक्षाधिकारी अकीला आदिल ने अपने लिए दो स्कूल चुने हैं। ठिरिया और सुंदरपुर के प्राथमिक विद्यालय। दोनों गांव तक पहुंचने के लिए मुख्य मार्ग से ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ा। यही स्थिति अन्य ब्लाकों के खंड शिक्षाधिकारियों की है।
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दो सौ से ज्यादा स्कूलों में शिक्षक नहीं
शिक्षाधिकारी अच्छे स्कूलों को ही झूठमूठ अच्छा बनाकर दिखाने के लिए गोद लेने में लगे हैं और जिले में दो सौ से ज्यादा परिषदीय स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। दूरदराज ग्रामीण अंचल के यह स्कूल या तो शिक्षामित्र खोल रहे हैं और दूसरे स्कूलों के शिक्षक को अटैच करके इन्हें चलवाया भर जा रहा है। जबकि हालात यह हैं कि शहर से सटे ब्लाकों के तमाम स्कूलों में मानक से भी अधिक शिक्षकों की भरमार है।
वर्जन...
पास के स्कूलों में ज्यादा दौरे कर सकेंगे इस लिहाज से इन्हें गोद लिया है और वैसे भी शासन से ऐसे कोई निर्देश नहीं थे कि दूर के स्कूल ही गोद लेने हैं।
-देवेंद्र स्वरूप सचान, बीएसए