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Sawan 2025: भगवान शिव की आराधना का महीना सावन शुरू, बरेली के नाथ मंदिरों में उमड़ेगी भक्तों की भीड़
Thu, 10 Jul 2025 04:47 PM IST
मुकेश कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 10 Jul 2025 04:47 PM IST
सार
सावन का पावन महीना शुक्रवार से शुरू हो गया है। इस माह में चार सोमवार होंगे। नौ अगस्त को इसका समापन होगा। सावनभर बरेली के नाथ मंदिरों में कांवड़ियों की भीड़ रहेगी।
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Sawan 2025
- फोटो : adobe
विस्तार
सावन को शिवार्चन, उपवास और पूजन का महीना माना जाता है। यह भगवान शिव के त्याग, आशीर्वाद और पशुपति रूप में आनंद का उत्सव है। इस बार 11 जुलाई शुक्रवार को सावन का शुभारंभ हो गया है। इस माह में चार सोमवार होंगे। नौ अगस्त को इसका समापन होगा। बरेली के नाथ मंदिरों में सावनभर कांवड़ियों की भीड़ रहेगी। इसे लेकर मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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बरेली के आचार्य राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि सावन माह शिवार्चन के लिए सर्वोत्तम है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्रावण में ही समुद्र मंथन हुआ था। इस दौरान निकले विष का पान भगवान शिव ने किया था। इस विष के प्रभाव को शांत करने के लिए सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है। सावन का महीना हरियाली और जीवन का प्रतीक है।
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चालीसा पाठ करने से मिलता है लाभ
सावन में चालीसा रखने वाले भक्त दस दिन पहले ही व्रत आदि की शुरुआत कर देते हैं। मान्यता है कि सावन में देवी पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए चालीस दिन की कठोर तपस्या की थी। इससे प्रसन्न होकर भगवन शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। चालीसा के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से पापों से मुक्ति मिलती है।
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सोमवार का महत्व
सावन में सोमवार को भगवान शिव की पूजा और व्रत का विशेष महत्व है। नारद पुराण के अनुसार, श्रावण मास के सोमवार पर जो लोग चालीसा करते हैं, वह आषाढ़ शुक्ल षष्ठी से श्रावण पूर्णिमा तक पड़ने वाले सभी सोमवार को व्रत रखते हैं। यह व्रत अर्थ सिद्धि प्रदाता है। सोमवार के दिन भगवान शिव और चंद्रमा की पूजा का विधान है।
सावन में सोमवार को भगवान शिव की पूजा और व्रत का विशेष महत्व है। नारद पुराण के अनुसार, श्रावण मास के सोमवार पर जो लोग चालीसा करते हैं, वह आषाढ़ शुक्ल षष्ठी से श्रावण पूर्णिमा तक पड़ने वाले सभी सोमवार को व्रत रखते हैं। यह व्रत अर्थ सिद्धि प्रदाता है। सोमवार के दिन भगवान शिव और चंद्रमा की पूजा का विधान है।