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सेटेलाइट फ्लाईओवर : अभी ट्रायल है इसलिए एक्सीडेंट की भी परवाह नहीं
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सेटेलाइट पुल के बीच में बना डिवाइडर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
पुल पर ट्रैफिक चालू लेकिन न लाइटें जलीं न दोनों तरफ डिवाइडर ठीक
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फ्लाईओवर से उतरते ही सामने अंधा डिवाइडर, हादसे की आशंका बढ़ी
बरेली। सेटेलाइट फ्लाईओवर पर बतौर ट्रायल सोमवार को ट्रैफिक तो दौड़ा दिया गया लेकिन सुरक्षा उपाय न होने से जल्द ही हादसे की आशंका बढ़ गई है। एक तो पर पुल पर लगाई गई लाइटें अभी नहीं जल रही हैं, दूसरे दोनों तरफ पुल से उतरते ही सामने अंधे डिवाइडर हैं जिनकी ऊंचाई इतनी कम है कि आसानी से नजर आना मुश्किल है। जरा सी चूक से कोई भी गाड़ी इस डिवाइडर पर चढ़कर पलट सकती है।
श्यामगंज चौराहे से शाहजहांपुर की ओर जाने वाली सड़क पर सेटेलाइट चौराहे से आगे तक यह डिवाइडर पुल बनने से पहले से ही बना हुआ है। अब फ्लाईओवर बनकर तैयार होने के बाद उस पर ट्रैफिक भी शुरू कर दिया गया है लेकिन सेतु निगम ने दोनों तरफ डिवाइडरों को वैसा ही छोड़ दिया है। इन डिवाइडरों की वजह से अब हादसा होने की आशंका पैदा हो गई है। दरअसल ये डिवाइडर न सिर्फ काफी कम ऊंचाई का है बल्कि दोनों ओर पुल के मुहाने से एकदम सटा हुआ है। रिफ्लेक्टर भी नहीं लगे हैं लिहाजा एकाएक उनका आसानी से दिखना मुश्किल है। ऐसे में यह डिवाइडर कभी भी हादसे की वजह बन सकता है।
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लोक निर्माण विभाग के एक इंजीनियर के मुताबिक फ्लाईओवर के सामने डिवाइडर की ऊंचाई कम से कम दो से ढाई फुट होनी चाहिए। ऊंचाई एक फुट या कम है तो यह हादसे का कारण बन सकता है। ट्रैफिक कम होने की दशा में या रात में ड्राइवर की नजर डिवाइडर पर न पड़ी और गाड़ी का पहिया डिवाइडर पर चढ़ा तो वह पलट सकती है। डिवाइडर की ऊंचाई दो फुट से ज्यादा होनी चाहिए ताकि वह दूर से ड्राइवर को साफ दिखाई दे। सेतु निगम के डीपीएम वीके सेन ने बताया फ्लाईओवर के दोनों तरफ डिवाइडर का नए सिरे से निर्माण किया जाएगा ताकि पुल पर गुजरने वालों को कोई दिक्कत न हो।
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लाइटें लगा दीं पर अभी कनेक्शन ही नहीं
सेटेलाइट फ्लाईओवर पर पोल खड़े कर लाइटें तो लगा दी गई हैं लेकिन अभी पुल पर बिजली का कनेक्शन ही नहीं दिया गया है। इस वजह से रात में पूरे पुल पर अंधेरा छाया रहता है। कमजोर हेडलाइट वाली गाड़ियों के चालकों को इससे दिक्कत हो सकती है और इसकी वजह से भी हादसे की आशंका है।
सेटेलाइट फ्लाईओवर तकनीकी तौर पर तैयार हो गया है लेकिन कम से कम सप्ताह भर इसका ट्रायल होना है क्योंकि पुल पर तारकोल सड़क बिछी है। ट्रायल से खामियां पता चल जाएंगी। स्ट्रीट लाइट का काम भी ट्रायल के दौरान पूरा का करा लिया जाएगा, तभी प्रोजेक्ट हैंडओवर होगा।- वीके सेन, उप परियोजना प्रबंधक सेतु निगम
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फ्लाईओवर से उतरते ही सामने अंधा डिवाइडर, हादसे की आशंका बढ़ी बरेली। सेटेलाइट फ्लाईओवर पर बतौर ट्रायल सोमवार को ट्रैफिक तो दौड़ा दिया गया लेकिन सुरक्षा उपाय न होने से जल्द ही हादसे की आशंका बढ़ गई है। एक तो पर पुल पर लगाई गई लाइटें अभी नहीं जल रही हैं, दूसरे दोनों तरफ पुल से उतरते ही सामने अंधे डिवाइडर हैं जिनकी ऊंचाई इतनी कम है कि आसानी से नजर आना मुश्किल है। जरा सी चूक से कोई भी गाड़ी इस डिवाइडर पर चढ़कर पलट सकती है।
श्यामगंज चौराहे से शाहजहांपुर की ओर जाने वाली सड़क पर सेटेलाइट चौराहे से आगे तक यह डिवाइडर पुल बनने से पहले से ही बना हुआ है। अब फ्लाईओवर बनकर तैयार होने के बाद उस पर ट्रैफिक भी शुरू कर दिया गया है लेकिन सेतु निगम ने दोनों तरफ डिवाइडरों को वैसा ही छोड़ दिया है। इन डिवाइडरों की वजह से अब हादसा होने की आशंका पैदा हो गई है। दरअसल ये डिवाइडर न सिर्फ काफी कम ऊंचाई का है बल्कि दोनों ओर पुल के मुहाने से एकदम सटा हुआ है। रिफ्लेक्टर भी नहीं लगे हैं लिहाजा एकाएक उनका आसानी से दिखना मुश्किल है। ऐसे में यह डिवाइडर कभी भी हादसे की वजह बन सकता है।
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लोक निर्माण विभाग के एक इंजीनियर के मुताबिक फ्लाईओवर के सामने डिवाइडर की ऊंचाई कम से कम दो से ढाई फुट होनी चाहिए। ऊंचाई एक फुट या कम है तो यह हादसे का कारण बन सकता है। ट्रैफिक कम होने की दशा में या रात में ड्राइवर की नजर डिवाइडर पर न पड़ी और गाड़ी का पहिया डिवाइडर पर चढ़ा तो वह पलट सकती है। डिवाइडर की ऊंचाई दो फुट से ज्यादा होनी चाहिए ताकि वह दूर से ड्राइवर को साफ दिखाई दे। सेतु निगम के डीपीएम वीके सेन ने बताया फ्लाईओवर के दोनों तरफ डिवाइडर का नए सिरे से निर्माण किया जाएगा ताकि पुल पर गुजरने वालों को कोई दिक्कत न हो।
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लाइटें लगा दीं पर अभी कनेक्शन ही नहीं
सेटेलाइट फ्लाईओवर पर पोल खड़े कर लाइटें तो लगा दी गई हैं लेकिन अभी पुल पर बिजली का कनेक्शन ही नहीं दिया गया है। इस वजह से रात में पूरे पुल पर अंधेरा छाया रहता है। कमजोर हेडलाइट वाली गाड़ियों के चालकों को इससे दिक्कत हो सकती है और इसकी वजह से भी हादसे की आशंका है।सेटेलाइट फ्लाईओवर तकनीकी तौर पर तैयार हो गया है लेकिन कम से कम सप्ताह भर इसका ट्रायल होना है क्योंकि पुल पर तारकोल सड़क बिछी है। ट्रायल से खामियां पता चल जाएंगी। स्ट्रीट लाइट का काम भी ट्रायल के दौरान पूरा का करा लिया जाएगा, तभी प्रोजेक्ट हैंडओवर होगा।- वीके सेन, उप परियोजना प्रबंधक सेतु निगम