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लीलौर झील की मिट्टी और पानी के लिए सैंपल
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सैंपल लेने पहुंची टीम।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
रामगंगा और अरिल नदी को पोषित करने वाली झील और तालाबों की है तलाश
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सिरौली। एक एनजीओ की टीम ने वन विभाग की मदद से महाभारत कालीन लीलौर झील की मिट्टी और पानी के सैंपल लिए। इन्हें जांच के लिए मुरादाबाद की लैब भेजा जाएगा।
जांच के लिए एनजीओ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से प्रोजेक्ट ऑफिसर नेहा भटनागर पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि वह रामगंगा व अरिल नदी के आसपास करीब चार किलोमीटर के दायरे में आने वाली दो हेक्टेयर की ऐसी झीलों और तालाबों का सर्वे कर रही हैं, जो अरिल नदी या रामगंगा को पोषित करती हों। यह सर्वे मुरादाबाद और बरेली में किया जा रहा है। इसी क्रम में उन्होंने रविवार को वह लीलौर झील पहुंचीं। सबसे पहले उन्होंने झील के स्रोतों के बारे में ग्रामीणों से जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने यहां विदेश से आने वाले पक्षियों के बारे में पता लगाया। इस दौरान इस झील पर 20 प्रकार के प्रवासी पक्षियों के आने की जानकारी मिली। इनमें पिनटेल, यूरेशियन कूद, वाटर हेन, ग्रे हेरोइन, नूर हेन पक्षी विदेशी पक्षी हैं। एनजीओ के कार्यकर्ताओं ने झील के आसपास पेड़ों और घास की प्रजातियों की गहराई से छानबीन की। वन विभाग की ओर से चंद्रप्रकाश ठाकरे, माखन लाल आदि मौजूद रहे। संवाद
जांच के लिए एनजीओ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से प्रोजेक्ट ऑफिसर नेहा भटनागर पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि वह रामगंगा व अरिल नदी के आसपास करीब चार किलोमीटर के दायरे में आने वाली दो हेक्टेयर की ऐसी झीलों और तालाबों का सर्वे कर रही हैं, जो अरिल नदी या रामगंगा को पोषित करती हों। यह सर्वे मुरादाबाद और बरेली में किया जा रहा है। इसी क्रम में उन्होंने रविवार को वह लीलौर झील पहुंचीं। सबसे पहले उन्होंने झील के स्रोतों के बारे में ग्रामीणों से जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने यहां विदेश से आने वाले पक्षियों के बारे में पता लगाया। इस दौरान इस झील पर 20 प्रकार के प्रवासी पक्षियों के आने की जानकारी मिली। इनमें पिनटेल, यूरेशियन कूद, वाटर हेन, ग्रे हेरोइन, नूर हेन पक्षी विदेशी पक्षी हैं। एनजीओ के कार्यकर्ताओं ने झील के आसपास पेड़ों और घास की प्रजातियों की गहराई से छानबीन की। वन विभाग की ओर से चंद्रप्रकाश ठाकरे, माखन लाल आदि मौजूद रहे। संवाद