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ग्लैंडर्स पर अलर्टः 80 सैंपल जांच के लिए भेजे गए
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बरेली। राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीई) की ओर से जारी रिपोर्ट में देश भर के 210 घोड़ों में ग्लैंडर फारसी की पुष्टि के बाद बरेली में भी अलर्ट जारी किया गया है। पशुपालन विभाग ने आनन-फानन में जिले के 80 घोड़ों का ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए एनआरसीई भेज दिया है। वहीं, पशु पालकों को भी रिपोर्ट आने तक घोड़ों से दूर रहने को कहा गया है।
पिछले साल रिठौरा और भोजीपुरा के दो घोड़ों में जानलेवा ग्लैंडर फारसी की पुष्टि हुई थी। इसके अलावा मंडल के चारों जिलों में पांच घोड़े ग्लैंडर से पीड़ित पाए गए थे। इन सभी को मार दिया गया था। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ललित वर्मा ने बताया कि पिछले दिनों देश भर से पहुंचे ब्लड सैंपलों की जांच के बाद एनआरसीई ने 210 घोड़ों में ग्लैंडर की पुष्टि की है। बरेली में भी पिछले साल ग्लैंडर से पीड़ित घोड़े मिले थे, लिहाजा यहां अलर्ट जारी कर दिया गया है। शासन के निर्देश पर जिले में सैंपल जुटाने का अभियान चलाकर करीब 80 ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। अगले सप्ताह तक एनआरसीई से इनकी रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति पता लगेगी।
ऐसे कर सकते हैं बीमारी का पता
सीवीओ के मुताबिक एलाइजा और कॉम्लीमेंट फिक्सेशन (सीएफटी) टेस्ट के जरिए ग्लैंडर फारसी की बीमारी का पता किया जाता है। एक्यूट फार्म में घोड़ों में इस बीमारी से फेफड़ों में गांठ और श्वसन तंत्र की म्यूकस मैमरेन पर घाव होने लगते हैं। घोड़े की नाक से रक्तस्राव होता है। इसके बाद पीड़ित घोड़े की मौत हो जाती है। बताया कि बीमारी का कोई इलाज नहीं है इसलिए पीड़ित घोड़ों को मार दिया जाता है। इसके बदले 25 हजार रुपये के हिसाब से मुआवजा दिया जाता है।
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पिछले साल रिठौरा और भोजीपुरा के दो घोड़ों में जानलेवा ग्लैंडर फारसी की पुष्टि हुई थी। इसके अलावा मंडल के चारों जिलों में पांच घोड़े ग्लैंडर से पीड़ित पाए गए थे। इन सभी को मार दिया गया था। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ललित वर्मा ने बताया कि पिछले दिनों देश भर से पहुंचे ब्लड सैंपलों की जांच के बाद एनआरसीई ने 210 घोड़ों में ग्लैंडर की पुष्टि की है। बरेली में भी पिछले साल ग्लैंडर से पीड़ित घोड़े मिले थे, लिहाजा यहां अलर्ट जारी कर दिया गया है। शासन के निर्देश पर जिले में सैंपल जुटाने का अभियान चलाकर करीब 80 ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। अगले सप्ताह तक एनआरसीई से इनकी रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति पता लगेगी।
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ऐसे कर सकते हैं बीमारी का पता
सीवीओ के मुताबिक एलाइजा और कॉम्लीमेंट फिक्सेशन (सीएफटी) टेस्ट के जरिए ग्लैंडर फारसी की बीमारी का पता किया जाता है। एक्यूट फार्म में घोड़ों में इस बीमारी से फेफड़ों में गांठ और श्वसन तंत्र की म्यूकस मैमरेन पर घाव होने लगते हैं। घोड़े की नाक से रक्तस्राव होता है। इसके बाद पीड़ित घोड़े की मौत हो जाती है। बताया कि बीमारी का कोई इलाज नहीं है इसलिए पीड़ित घोड़ों को मार दिया जाता है। इसके बदले 25 हजार रुपये के हिसाब से मुआवजा दिया जाता है।
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