{"_id":"6a20740a70d239e7c5014dcc","slug":"ruvi-begins-admission-process-for-msc-courses-bareilly-news-c-4-bly1053-897951-2026-06-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: रुविवि में एमएससी पाठ्यक्रम के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: रुविवि में एमएससी पाठ्यक्रम के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू
Thu, 04 Jun 2026 12:05 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Thu, 04 Jun 2026 12:05 AM IST
विज्ञापन
बरेली। महात्मा ज्योतिबा फूले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में एमएससी (भौतिकी) पाठ्यक्रम के लिए सत्र 2026 के लिए अंतरजाल पंजीकरण शुरू हो गया है। इच्छुक बीएससी उत्तीर्ण विद्यार्थी विश्वविद्यालय के आधिकारिक पोर्टल www.mjpru.ac.in पर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश बीएससी में प्राप्त अंकों की वरीयता के आधार पर किया जाएगा, जबकि आरक्षण एवं छात्रवृत्ति का लाभ उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के तय मानकों और दिशा-निर्देशों के अनुसार देय होगा।
भौतिक विज्ञान विभाग के प्राध्यापक सलीम खान ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम अभिकलन, नैनो प्रौद्योगिकी और सतत ऊर्जा जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियां मानव सभ्यता को नई दिशा दे रही हैं। ऐसे में भौतिक विज्ञान की मूलभूत भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण और अपरिहार्य हो गई है। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करता है। यह उन्हें आधुनिक अंतरविषयक और उत्तरदायित्वपूर्ण शोध के लिए सुदृढ़ पृष्ठभूमि भी तैयार करके देता है। छात्र क्वांटम प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी और पदार्थ विज्ञान जैसे विषयों में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। नाभिकीय भौतिकी, नवीकरणीय ऊर्जा एवं संलयन, जैवभौतिकी एवं चिकित्सा भौतिकी भी इसमें शामिल हैं। संगणनात्मक भौतिकी, आंकड़ा विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ब्रह्मांड विज्ञान जैसे आधुनिक विषय भी पढ़ाए जाएंगे। इस पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद छात्रों को शिक्षण कार्य और अनुसंधानात्मक शोध में अवसर मिलेंगे। वे देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। इनमें इसरो, डीआरडीओ और सीएसआईआर जैसे संस्थान शामिल हैं। प्राध्यापक खान ने यह भी बताया कि भारत सरकार का राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (2023–2031) चल रहा है। इसके तहत क्वांटम अभिकलन पर विशेष निवेश और काम किया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम छात्रों को विभिन्न आधुनिक विषयों में विशेषज्ञता का अवसर देता है। इनमें क्वांटम प्रौद्योगिकी और नैनो प्रौद्योगिकी प्रमुख हैं। पदार्थ विज्ञान, नाभिकीय भौतिकी और नवीकरणीय ऊर्जा भी शामिल हैं। जैवभौतिकी, चिकित्सा भौतिकी और संगणनात्मक भौतिकी जैसे क्षेत्र भी उपलब्ध हैं।
विज्ञापन
भौतिक विज्ञान विभाग के प्राध्यापक सलीम खान ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम अभिकलन, नैनो प्रौद्योगिकी और सतत ऊर्जा जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियां मानव सभ्यता को नई दिशा दे रही हैं। ऐसे में भौतिक विज्ञान की मूलभूत भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण और अपरिहार्य हो गई है। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करता है। यह उन्हें आधुनिक अंतरविषयक और उत्तरदायित्वपूर्ण शोध के लिए सुदृढ़ पृष्ठभूमि भी तैयार करके देता है। छात्र क्वांटम प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी और पदार्थ विज्ञान जैसे विषयों में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। नाभिकीय भौतिकी, नवीकरणीय ऊर्जा एवं संलयन, जैवभौतिकी एवं चिकित्सा भौतिकी भी इसमें शामिल हैं। संगणनात्मक भौतिकी, आंकड़ा विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ब्रह्मांड विज्ञान जैसे आधुनिक विषय भी पढ़ाए जाएंगे। इस पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद छात्रों को शिक्षण कार्य और अनुसंधानात्मक शोध में अवसर मिलेंगे। वे देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। इनमें इसरो, डीआरडीओ और सीएसआईआर जैसे संस्थान शामिल हैं। प्राध्यापक खान ने यह भी बताया कि भारत सरकार का राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (2023–2031) चल रहा है। इसके तहत क्वांटम अभिकलन पर विशेष निवेश और काम किया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम छात्रों को विभिन्न आधुनिक विषयों में विशेषज्ञता का अवसर देता है। इनमें क्वांटम प्रौद्योगिकी और नैनो प्रौद्योगिकी प्रमुख हैं। पदार्थ विज्ञान, नाभिकीय भौतिकी और नवीकरणीय ऊर्जा भी शामिल हैं। जैवभौतिकी, चिकित्सा भौतिकी और संगणनात्मक भौतिकी जैसे क्षेत्र भी उपलब्ध हैं।
विज्ञापन