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स्कूल से भागे बच्चे कासगंज में मिले
बरेली
Updated Fri, 08 Jan 2016 01:56 AM IST
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बरेली। हार्टमैन कॉलेज के आठवीं क्लास के चार बच्चों ने ऐसी शरारत की कि बृहस्पतिवार को पूरा स्कूल और उनके परिवार वाले ही हिल गए। इन्होंने स्कूल में शरारत की, जिस पर टीचर ने उनकी डायरी पर पैरेंट्स को स्कूल आने का कोट लिख दिया। इसके बाद पैरेंट्स की डांट से बचने के लिए उन्होंने बिना सोचे-समझे दूर भाग जाने का खतरनाक इरादा बना लिया। रेलवे स्टेशन पहुंचे, जहां से किसी ट्रेन में बैठकर तीन कासगंज पहुंच गए। जबकि एक बच्चा शहर में घूम घाम कर शाम को घर पहुंच गया।
कई घंटे तक बच्चों के घर न आने पर परिवारवालों ने कालेज में पता किया तो वहां से पता लगा वह तो छुट्टी के बाद ही चले गए। इसके बाद तो परिवार वाले ही नहीं स्कूल वाले भी टेंशन में आ गए। उनकी डायरी पर कोट लिखने की बात पता लगी तो पैरेंट्स स्कूल वालों पर गुस्सा गए और हंगामा करने लगे। पुलिस स्कूल पहुंची और उन्होंने पैरेंट्स को शांत किया। पूरे दिन पुलिस भी उनको तलाशती रही लेकिन कोई अता पता नहीं लगा तो सबकी धड़कने बढ़ गईं। अप्रिय आशंका से हर कोई डरा हुआ था। देर शाम एक छात्र घर लौट आया और उसने बाकी तीन के कासगंज होने की जानकारी दी तो सबने राहत की सांस ली। इनमें दो छात्राएं भी हैं। उनके परिजन उन्हें लेने के लिए थाना प्रभारी इज्जतनगर के साथ कासंगज रवाना हो गए।
इस प्रकरण में अभिभावकों की ओर से बच्चों के गायब होने की थाना इज्जतनगर में रिपोर्ट भी दर्ज करा दी गई थी। एसओ इज्जतनगर सतेंद्र सिंह यादव ने बताया कि बच्चे कासगंज में मिल गए हैं। यह जानकारी उनको ट्रेन में चल रहे एक सिपाही ने बच्चों से पता पूछने के बाद दी थी। सिपाही को बच्चों ने बताया कि वह इज्जतनगर थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। चारो बच्चे शहर के कारोबारी परिवार के हैं। वहीं, कॉलेज के प्रिंसिपल हरमन मिंज ने बताया कि छुट्टी होने पर यह बच्चे बाकी बच्चों के साथ घरों के लिए भेज दिए गए। इनमें दो छात्राएं थीं, जिनमें से एक को वैन घर लेकर जाती है, जबकि दूसरी छात्रा को उसके अभिभावक कालेज से लेकर जाते हैं। बोले- बच्चे शरारत करते हैं तो स्कूल की ओर से पैरेंट्स से बातचीत के लिए डायरी पर संदेश लिख देते हैं लेकिन सोचा नहीं था कि बच्चे ऐसा भी कर लेंगे। पहले कभी इस तरह की कोई बात नहीं हुई।
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परिवार में बच्चों और अभिभावकों के बीच फ्रेंडली माहौल न होने की वजह से बच्चे अभिभावकों से डरते हैं। वह अपनी समस्याएं भी अभिभावकों से खुलकर नहीं कह पाते हैं। इसलिए, टीचर ने जब अभिभावक को बुलाने के लिए कहा तो बच्चे डर की वजह से भाग गए। अगर अभिभावक और बच्चों के बीच कम्युनिकेशन अच्छा रहेगा तो बच्चे ऐसी गलती कभी नहीं करेंगे।
- डॉ. हेमा खन्ना, मनोवैज्ञानिक
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कई घंटे तक बच्चों के घर न आने पर परिवारवालों ने कालेज में पता किया तो वहां से पता लगा वह तो छुट्टी के बाद ही चले गए। इसके बाद तो परिवार वाले ही नहीं स्कूल वाले भी टेंशन में आ गए। उनकी डायरी पर कोट लिखने की बात पता लगी तो पैरेंट्स स्कूल वालों पर गुस्सा गए और हंगामा करने लगे। पुलिस स्कूल पहुंची और उन्होंने पैरेंट्स को शांत किया। पूरे दिन पुलिस भी उनको तलाशती रही लेकिन कोई अता पता नहीं लगा तो सबकी धड़कने बढ़ गईं। अप्रिय आशंका से हर कोई डरा हुआ था। देर शाम एक छात्र घर लौट आया और उसने बाकी तीन के कासगंज होने की जानकारी दी तो सबने राहत की सांस ली। इनमें दो छात्राएं भी हैं। उनके परिजन उन्हें लेने के लिए थाना प्रभारी इज्जतनगर के साथ कासंगज रवाना हो गए।
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इस प्रकरण में अभिभावकों की ओर से बच्चों के गायब होने की थाना इज्जतनगर में रिपोर्ट भी दर्ज करा दी गई थी। एसओ इज्जतनगर सतेंद्र सिंह यादव ने बताया कि बच्चे कासगंज में मिल गए हैं। यह जानकारी उनको ट्रेन में चल रहे एक सिपाही ने बच्चों से पता पूछने के बाद दी थी। सिपाही को बच्चों ने बताया कि वह इज्जतनगर थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। चारो बच्चे शहर के कारोबारी परिवार के हैं। वहीं, कॉलेज के प्रिंसिपल हरमन मिंज ने बताया कि छुट्टी होने पर यह बच्चे बाकी बच्चों के साथ घरों के लिए भेज दिए गए। इनमें दो छात्राएं थीं, जिनमें से एक को वैन घर लेकर जाती है, जबकि दूसरी छात्रा को उसके अभिभावक कालेज से लेकर जाते हैं। बोले- बच्चे शरारत करते हैं तो स्कूल की ओर से पैरेंट्स से बातचीत के लिए डायरी पर संदेश लिख देते हैं लेकिन सोचा नहीं था कि बच्चे ऐसा भी कर लेंगे। पहले कभी इस तरह की कोई बात नहीं हुई।
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परिवार में बच्चों और अभिभावकों के बीच फ्रेंडली माहौल न होने की वजह से बच्चे अभिभावकों से डरते हैं। वह अपनी समस्याएं भी अभिभावकों से खुलकर नहीं कह पाते हैं। इसलिए, टीचर ने जब अभिभावक को बुलाने के लिए कहा तो बच्चे डर की वजह से भाग गए। अगर अभिभावक और बच्चों के बीच कम्युनिकेशन अच्छा रहेगा तो बच्चे ऐसी गलती कभी नहीं करेंगे।
- डॉ. हेमा खन्ना, मनोवैज्ञानिक