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सराफा कारोबारियों को फंसाने के लिए नेपाल से सोना लाते थे ठग
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आरोपी रविंद्र सिंह।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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ठगों के पास से नेपाल का एक सिम भी बरामद
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लालच देने के लिए शुरू में सस्ते में बेचते थे सोना
बरेली। पकड़े गए ठग नेपाल से तस्करी कर सोना लाते थे। उनके पास से नेपाल का एक सिम भी मिला है। पूछताछ में सरगना चंद्रपाल वर्मा उर्फ अनिल शर्मा ने कबूल किया है कि वह सोना नेपाल से लाता था। इसके बाद सराफा कारोबारियों को फंसाने के लिए उन्हें सस्ते में सोना बेचा जाता था। मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में सराफ उनके जाल में आसानी से फंस जाते थे।
शिकार को फंसाने के लिए ठग पहले सस्ता सोना देते थे। सोना वह नेपाल से लाते थे। हालांकि उनका कहना है कि नेपाल में सोना खरीदने पर उन्हें 10 से 15 प्रतिशत छूट मिलती थी, लेकिन पुलिस का मानना है कि एक-दो किलो सोना लेकर नेपाल बार्डर पार करना इतना आसान नहीं है। लिहाजा निश्चित ही इन लोगों के तार सोने के तस्करों से जुड़े होंगे। लखीमपुर के अहिबाबा उर्फ मुन्ना के पास से पुलिस को नेपाल का सिम भी मिला है। आशंका जताई जा रही है कि नेपाल के भी कुछ लोग इस गिरोह में शामिल हैं। ठग पहले 10 से 50 ग्राम सोना बाजार भाव से बेहद कम कीमत पर सराफ को देते थे। सोना असली होने से सराफ इन पर विश्वास कर लेते थे। फिर मोटे मुनाफे का लालच देकर ठग उनसे एक-दो किलो सोने की डील करते थे और फिर सराफ को लाखों का चूना लगा देते थे।
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ये लोग हुए गिरफ्तार
पकड़े गए सात लोगों में गिरोह का सरगना चंद्रपाल वर्मा भी शामिल है। उसने सराफ को अपना नाम अनिल शर्मा बताया था। पूछताछ में उसका सही नाम पता चला। पुलिस ने सबसे पहले किच्छा के रविंद्र सिंह को पकड़ा। इसके बाद सरगना चंद्रपाल फिर लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी थानाक्षेत्र के अहिबाब उर्फ मुन्ना, शाहजहांपुर सदर बाजार के मोहम्मद इकबाल उर्फ पप्पू और शरीफ, मेरठ के सदर बाजार के इरशाद उर्फ अट्ठे को गिरफ्तार कर लिया। जब इनसे पूछा गया कि फर्जी पुलिस वाला कौन बना था, तब बरेली पुलिस लाइन में तैनात हेड कांस्टेबल बृजेश सिंह का नाम सामने आया। अमरोहा का रहने वाला बृजेश वर्तमान में सुभाषनगर में रह रहा है। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। सरगना चंद्रपाल ठगी के मामले में मेरठ में भी गिरफ्तार हो चुका है।
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हेड कांस्टेबल फर्जी पुलिस के साथ देता था दबिश
हेड कांस्टेबल के साथ शाहजहांपुर का शरीफ और इकबाल फर्जी सिपाही बनते थे। ये दोनों सादा कपड़ों में रहते थे, जबकि हेड कांस्टेबल बृजेश वर्दी में रहता था, ताकि देखने वाले को लगे कि वाकई पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस इन लोगों से पूछताछ कर रही है। बताया जा रहा है कि काफी समय से ये लोग इसी तरह ये वारदात कर रहे हैं। बृजेश के रिटायरमेंट में दो-तीन साल ही बचे हैं। वह 2009 से अब तक पुलिस लाइन में ही तैनात है।
हेड कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है। पकड़े गए ठगों से पूछताछ कर रकम बरामदगी का प्रयास किया जा रहा है। - रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी।
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लालच देने के लिए शुरू में सस्ते में बेचते थे सोना बरेली। पकड़े गए ठग नेपाल से तस्करी कर सोना लाते थे। उनके पास से नेपाल का एक सिम भी मिला है। पूछताछ में सरगना चंद्रपाल वर्मा उर्फ अनिल शर्मा ने कबूल किया है कि वह सोना नेपाल से लाता था। इसके बाद सराफा कारोबारियों को फंसाने के लिए उन्हें सस्ते में सोना बेचा जाता था। मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में सराफ उनके जाल में आसानी से फंस जाते थे।
शिकार को फंसाने के लिए ठग पहले सस्ता सोना देते थे। सोना वह नेपाल से लाते थे। हालांकि उनका कहना है कि नेपाल में सोना खरीदने पर उन्हें 10 से 15 प्रतिशत छूट मिलती थी, लेकिन पुलिस का मानना है कि एक-दो किलो सोना लेकर नेपाल बार्डर पार करना इतना आसान नहीं है। लिहाजा निश्चित ही इन लोगों के तार सोने के तस्करों से जुड़े होंगे। लखीमपुर के अहिबाबा उर्फ मुन्ना के पास से पुलिस को नेपाल का सिम भी मिला है। आशंका जताई जा रही है कि नेपाल के भी कुछ लोग इस गिरोह में शामिल हैं। ठग पहले 10 से 50 ग्राम सोना बाजार भाव से बेहद कम कीमत पर सराफ को देते थे। सोना असली होने से सराफ इन पर विश्वास कर लेते थे। फिर मोटे मुनाफे का लालच देकर ठग उनसे एक-दो किलो सोने की डील करते थे और फिर सराफ को लाखों का चूना लगा देते थे।
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ये लोग हुए गिरफ्तार
पकड़े गए सात लोगों में गिरोह का सरगना चंद्रपाल वर्मा भी शामिल है। उसने सराफ को अपना नाम अनिल शर्मा बताया था। पूछताछ में उसका सही नाम पता चला। पुलिस ने सबसे पहले किच्छा के रविंद्र सिंह को पकड़ा। इसके बाद सरगना चंद्रपाल फिर लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी थानाक्षेत्र के अहिबाब उर्फ मुन्ना, शाहजहांपुर सदर बाजार के मोहम्मद इकबाल उर्फ पप्पू और शरीफ, मेरठ के सदर बाजार के इरशाद उर्फ अट्ठे को गिरफ्तार कर लिया। जब इनसे पूछा गया कि फर्जी पुलिस वाला कौन बना था, तब बरेली पुलिस लाइन में तैनात हेड कांस्टेबल बृजेश सिंह का नाम सामने आया। अमरोहा का रहने वाला बृजेश वर्तमान में सुभाषनगर में रह रहा है। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। सरगना चंद्रपाल ठगी के मामले में मेरठ में भी गिरफ्तार हो चुका है।
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हेड कांस्टेबल फर्जी पुलिस के साथ देता था दबिश
हेड कांस्टेबल के साथ शाहजहांपुर का शरीफ और इकबाल फर्जी सिपाही बनते थे। ये दोनों सादा कपड़ों में रहते थे, जबकि हेड कांस्टेबल बृजेश वर्दी में रहता था, ताकि देखने वाले को लगे कि वाकई पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस इन लोगों से पूछताछ कर रही है। बताया जा रहा है कि काफी समय से ये लोग इसी तरह ये वारदात कर रहे हैं। बृजेश के रिटायरमेंट में दो-तीन साल ही बचे हैं। वह 2009 से अब तक पुलिस लाइन में ही तैनात है।हेड कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है। पकड़े गए ठगों से पूछताछ कर रकम बरामदगी का प्रयास किया जा रहा है। - रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी।